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बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: दीदी के चुनाव क्षेत्र में क्यों नहीं गए मोदी?

सार

मोदी बंगाल विधानसभा चुनाव में कुल रोड शो और जनसभा 19 किये। उत्तर कोलकाता में भी रोड शो किये लेकिन दक्षिण कोलकाता में गए ही नहीं।

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Bengal Assembly Elections 2026: Why did pm narendra Modi not visit mamata banerjee constituency
पश्चिम बंगाल के बनगांव में पीएम मोदी की रैली। - फोटो : X @BJPLive

विस्तार

बीजेपी 2021 के विधानसभा चुनाव में नारा दी थी- अबकी बार दो सौ पार। चुनाव परिणाम आने के बाद सौ भी पार नहीं हुआ तो बीजेपी समर्थकों ने ही कहना शुरू किया कि मोदी-दीदी में सेटिंग है। धीरे धीरे पांच साल में जंगल की आग की तरह यह फैल गया।

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2026 के विधानसभा चुनाव में मोदी, दीदी के चुनाव क्षेत्र भवानीपुर गए ही नहीं। न सिर्फ भवानीपुर बल्कि दक्षिण कोलकाता में ही नहीं गए। जबकि नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के उम्मीदवार हैं। अन्य दो स्टार प्रचारक शाह और योगी भी नहीं गए।
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बीजेपी कार्यकर्ता और समर्थक ही अब यह सवाल कर रहे हैं कि आखिर यह तीनों इस चुनाव क्षेत्र में क्यों नहीं गए! फिर एक बार मोदी-दीदी की सेटिंग की चर्चा जोर पकड़ रही है। मोदी अपने आखिरी चुनाव प्रचार बैरकपुर में भी दीदी का नाम एकबार भी नहीं लिए!
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मार्च के अंतिम सप्ताह में बीजेपी से ही खबर थी कि मोदी दक्षिण कोलकाता में रोड शो करेंगे, यह भवानीपुर और रासबिहारी विधानसभा को कवर करेगा। अप्रैल के मध्य में कहा गया कि सुरक्षा कारणों से एसपीजी ने अनुमति नहीं दी है। सिलीगुड़ी में भी एसपीजी से रोड शो की अनुमति नहीं मिलने के बाद जनसभा आयोजित की गई थी।

मोदी बंगाल विधानसभा चुनाव में कुल रोड शो और जनसभा 19 किये। उत्तर कोलकाता में भी रोड शो किये लेकिन दक्षिण कोलकाता में गए ही नहीं। अमित शाह हालांकि नामांकन के दिन शुभेंदु अधिकारी के साथ रोड शो करते हुए नामांकन दाखिल कराने पहुंचे थे।

बीजेपी तर्क दे रही है कि ब्रिगेड की रैली में मोदी शामिल हुए थे, ब्रिगेड और भवानीपुर दोनों दक्षिण कोलकाता में आता है। मोदी ने ब्रिगेड परेड ग्राउंड में 14 मार्च 2026 को बीजेपी की परिवर्तन यात्रा के समापन पर एक विशाल रैली को संबोधित किया था। यह रैली चुनाव घोषणा होने के पहले हुई थी। चुनाव की घोषणा 15 मार्च 2026 को हुई थी।

टीएमसी ने इस पर कटाक्ष भी किया है। टीएमसी के उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार कहते हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के एक दिन पहले तक हिटलर कहता रहा कि जीत जर्मनी की होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मोदी-शाह जानते हैं कि बंग विजय नहीं होगा, इसलिए नहीं आकर किरकिरी होने से अपने को बचा रहे हैं।

दूसरी तरफ, एक रैली में ममता बनजी ने दहाड़ते हुए कहा "मुझे कुर्सी नहीं चाहिए।" इस बयान ने बंगाल से लेकर दिल्ली तक की सियासत में कयासों का बाजार गर्म कर दिया है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर यह बात क्यों कही? कहीं यह किसी बहुत बड़े सियासी तूफान के आने से पहले की खामोशी भरी आहट तो नहीं है!

बहरहाल, सवाल है कि क्या ममता बनर्जी की टीएमसी पार्टी चुनाव हार रही है? क्या ममता बनर्जी राजनीतिक संन्यास ले रही हैं? क्या ममता बनर्जी केंद्र की राजनीति करेंगी? क्या अभिषेक बनर्जी को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप देगीं? तमाम इस तरह के सवाल राजनीतिक माहौल में तैर रहे हैं।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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