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तेजी से विकास कर रहा बांग्लादेश, भारत से है कई मामलों में आगे

Sanjiv Pandeyसंजीव पांडेय Updated Thu, 10 Oct 2019 10:07 AM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना - फोटो : पीटीआई
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शेख हसीना का भारत दौरा समाप्त हो गया है। नई दिल्ली में शेख हसीना ने बदलते बांग्लादेश की तस्वीर रखी। भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर को बांग्लादेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। कट्टररपंथी जमात की कमर तोड़ने वाली बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारतीय व्यवस्था को बताया कि 1947 में भारत से अलग अस्तित्व में आए बंगाली मुसलमानों ने अपनी अलग पहचान एशियाई मानचित्र पर बना है, जिसका लोहा चीन से लेकर पश्चिमी देश भी मान रहे है।

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जहां पूरे विश्व में बांग्लादेशी मुसलमानों को अच्छा उद्यमी माना जा रहा है वहीं बांग्लादेश ने अपनी धरती पर भी कई बड़े महत्वपूर्ण परिवर्तन कर दिखाए हैं। बांग्लादेश ने इस्लामिक स्टेट और अलकायदा जैसे संगठनों की ही कमर सिर्फ बांग्लादेश में नहीं तोड़ी, बल्कि आर्थिक विकास की एक बड़ी रेखा खींच दी है।

आज एशियाई निवेश का बड़ा केंद्र बांग्लादेश बन गया है, जहां चीन, जापान, दक्षिण कोरिया के निवेशक ही नहीं पश्चिमी निवेशक भी पहुंच रहे है। भारत में भी बांग्लादेश ने यही संकेत दिया है कि भारत और पूर्वी एशिया के बीच बांग्लादेश एक ब्रिज बनने को तैयार है।


उतर पूर्व के राज्यों के विकास में बांग्लादेश की भूमिका
भारत के उतर पूर्वी राज्यों के विकास में बांग्लादेश की अब महत्वपूर्ण भूमिका हो गई है। यह इलाका भौगोलिक रूप से भारत से ज्यादा बांग्लादेश के नजदीक है। किसी जमाने मे बांग्लादेश इनके लिए समस्या था, क्योंकि उतर पूर्वी राज्यों में गरीबी और बेरोजगारी के कारण बांग्लादेशी घुसपैठ करते थे। लेकिन अब स्थिति बदल गई।

दरअसल, बांग्लादेश पिछले बीस सालों में आर्थिक ताकत बन गया। अब उतर पूर्वी राज्यों को बांग्लादेशी निवेश की जरूरत है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि त्रिपुरा ने बांग्लादेशी उद्यमियों को त्रिपुरा मे निवेश के लिए आमंत्रित किया है।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लव देव ने कुछ दिन पहले त्रिपुरा में विकसित हो रहे स्पेशल इकनॉमिक जोन में निवेश के लिए बांग्लादेश के उद्यमियों को आमंत्रित किया था। यह खबर चौंकाने वाली थी। एक गरीब मुल्क जो 1971 में भारत के सहयोग से आजाद हुआ वो क्या इतना विकास कर गया है, कि भारत में भी निवेश की क्षमता रखता है? 

दरअसल, उतर पूर्वी राज्यों के लिए सबसे नजदीक का बंदरगाह चिटगांव है। भारत को समुद्री नौवहन के लिए चिटगांव महत्वपूर्ण है। चिटगांव बंदरगाह उतर पूर्वी राज्यों के लिए आयात और निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है।

त्रिपुरा से यह महज 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यही नहीं उतर पूर्वी राज्यों को पूरे भारत से जोड़ने में बांग्लादेश महत्वपूर्ण है। अगर आज बांग्लादेश के रास्ते पश्चिम बंगाल और उतर पूर्व के त्रिपुरा, मिजोरम समेत कई राज्यों को जोड़ा जाएगा तो परिवहन खर्च में खासी बचत होगी।

फिलहाल उतर पूर्व से भारत को पश्चिम बंगाल का सिलीगुड़ी कनेक्ट करता है, जो बांग्लादेश की सीमा से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

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