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अमृतसर ब्लास्टः आतंक के इस नये चेहरे से कितना अलर्ट है इंडिया?

Tue, 20 Nov 2018 05:43 PM IST
Updated Tue, 20 Nov 2018 05:43 PM IST
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अमृतसर ब्लास्ट में खालिस्तानी आतंकियों के हाथ होने की बात सामने आ रही है। - फोटो : File Photo

अमृतसर ब्लास्ट में खालिस्तानी आतंकियों के हाथ होने की बात सामने आ रही है। यदि घटना में अगर प्रत्यक्ष तौर पर उनकी भूमिका है तो यह कहने में गुरेज नहीं होगा कि दशकों से निष्क्रिय खालिस्तानी आतंकियों ने पंजाब में फिर से पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। मीडिया आर्इ खबरों के मुताबिक पिछले माह ही हमारी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले थे कि कनाडा और पाकिस्तान के रास्ते खालिस्तानी आतंकी दोबारा से भारत में अपनी जड़ी फैलाना चाहते हैं। हालांकि अमृतसर में हुई घटना को इस्लामिक स्टेट और जैश-ए मोहम्मद से जोड़ा जा रहा है। लेकिन माना जा रहा है कि जांच के बाद खालिस्तानी तत्वों की बात सामने आ सकती है। 

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दरअसल, पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों के पीछे  पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ सामने आता रहा है। इधर पिछले वर्षों से हिंदुस्तान में तो नहीं, लेकिन विदेशों में खालिस्तानी आतंकियों व अलगाववादियों की गतिविधियां लगातार बढ़ने की खबरे सुनने को मिल रही हैं। लेकिन अब वक्त पहले से जुदा है, इसलिए खालिस्तानियों को भारत में फिलहाल दोबारा से वापसी करना आसान नहीं होगा। हां, ये जरूर है कि छिटपुट घटनाओं से दशहत जरूर फैला सकते हैं। 
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लोकतंत्र के लिए चुनौती 
पंजाब की घटना हमारे सुरक्षा तंत्र के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। आतंकियों की मौजूदा गतिविधियां निश्चित रूप केंद्र सरकार के लिए भी चिंता की बात है, क्योंकि एक वक्त था जब भारत से बमुश्किल खालिस्तानियों को खदेड़ा गया था। अब उनके प्रति हमारी हुकूमत को अनदेखी करना शुतरमुर्ग की नीति का अनुसरण करने जैसा होगा। आतंकियों के तंत्र को भेदने के लिए हमारी हुकूमत को कारगर नीति पर काम करना होगा। अभी हाल ही में विदेशी दौरे के दौरान खालिस्तानी तत्वों ने अकाली दल बादल के नेता मनजीत सिंह जीके व कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की रैली में नारेबाजी करके अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने का प्रयास किया। 
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अमृतसर घटना के बाद भारत को अलर्ट रहना होगा। - फोटो : File Photo

पाकिस्तान के हाथ होने के सबूत 
लगातार इस बात के सबूत सामने आते रहे हैं कि पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी इंटर सर्विस इंटेलीजेंस भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। कुछ समय पहले जर्मनी में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया गया और इस मामले की जांच के दौरान सामने आया कि यूरोप में इन आतंकी संगठनों की गतिविधियां बढ़ रही हैं। यही नहीं इस षड्यंत्र को पाकिस्तान से लगातार समर्थन मिलता रहा है। जबकि विदेशों में रहने वाले सिख समुदाय के लोगों का कट्टरपंथी तबका भी इसमें लगा रहा है। हालांकि ये लोग छिटपुट घटनाओं को ही अंजाम दे पाते हैं। 2016-17 में पंजाब के कर्इ इलाकों में अलग-अलग समय जिन आठ लोगों की हत्या हुर्इ उसमें विदेशों में रहने वाले सिखों की संलिप्तता सामने आर्इ थी, जबकि संसाधन और पैसा भी वहीं से आया था। 

अमृतसर घटना के बाद ये बात अब सर्वविदित हो चुकी है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को इन आतंकियों की बढ़ रही खुराफात पर न तो रक्षात्मक होने की आवश्यकता है और न ही भयभीत बल्कि इसका दृढ़ता से जवाब देना समय की मांग है। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.

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