विज्ञापन
विज्ञापन

अंतरिक्ष इतिहास में भारत को जगह दिलाने वाले दो महान वैज्ञानिकों की कहानी

Lalit fularaललित फुलारा Updated Tue, 13 Aug 2019 10:42 AM IST
विक्रम साराभाई-सतीश धवन
विक्रम साराभाई-सतीश धवन - फोटो : अमर उजाला
ख़बर सुनें
15 अगस्त 2019 को भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो को 50 साल पूरे हो रहे हैं। इसी दिन भारत अपनी आजादी का 73 वां जश्न भी मनाएगा। भारतीय अनुसंधान संगठन (इसरो) की शुरुआत 15 अगस्त 1969 के दिन, अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के मकसद से हुई। इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। भारत में स्पेस प्रोग्राम (अंतरिक्ष कार्यक्रम) के जनक डॉक्टर विक्रम ए साराभाई थे लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान में शोध को नई दिशा देने का श्रेय महान वैज्ञानिक सतीश धवन को जाता है।
विज्ञापन
इन दोनों ही वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष इतिहास में भारत को खास जगह दिलाई। विक्रम ए साराभाई और सतीश धवन, दोनों ही भारत के महान रॉकेट साइंटिस्ट थे जिनके प्रयोसों की बदौलत ही इसरो आज 'नासा' के बाद स्पेस साइंस के क्षेत्र में सबसे बड़ी और विश्वसनीय एजेंसी है। जिसकी कामयाबी का लोहा दुनियाभर के देश मानते हैं। हाल ही में 22 जुलाई 2019 को चंद्रयान-2 को चांद पर भेजकर इसरो ने एक बार फिर इतिहास रचा है। इसरो का काम स्पेस टेक्नोलॉजी का विकास और राष्ट्र की जरूरत के हिसाब से वैज्ञानिक कार्यों को अंजाम देना है।

यह इसरो ही है जिसने 19 अप्रैल 1975 को भारत के पहले सैटेलाइट आर्यभट्ट के प्रक्षेपण के जरिए इतिहास रचा और दुनियाभर के देशों को सकते में डालकर अंतरिक्ष के क्षेत्र में पहला कदम बढ़ाया। 5 साल बाद इसरो ने रोहिणी सैटेलाइट को धरती की कक्षा पर स्थापित कर एक और कमाल किया। यह पहला भारतीय सैटेलाइट था जो कि धरती की कक्षा में स्थापित हुआ और पूरी दुनिया गवाह बनी।

इसरो ने लगातार अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में शोध और वैज्ञानिक कार्यों को अंजाम देकर भारत को अमेरिका, रूस और चीन की कतार में अग्रणीय खड़ा किया। 2019 भी इसरो की एक और कामयाबी का गवाह बना। अगर विक्रम साराभाई और सतीश धवन जैसे महान वैज्ञानिक नहीं होते तो इसरो भी नहीं होता। जब इसरो अपने 50 साल का जश्न मना रहा होगा तो ये दो महान वैज्ञानिक, पूरी शिद्दत और ईमानदारी से याद किए जाएंगे।आइए इसरो के जनक और इसरो की दिशा बदलने वाले भारत के दो महान भारतीय विक्रम साराभाई और सतीश धवन के बारे में जानते हैं।

 
विज्ञापन
आगे पढ़ें

विज्ञापन

Recommended

शेयर मार्केट, अब नहीं रहेगा गुत्थी
Invertis university

शेयर मार्केट, अब नहीं रहेगा गुत्थी

समस्या कैसी भी हो, पाएं इसका अचूक समाधान प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से केवल 99 रुपये में
Astrology Services

समस्या कैसी भी हो, पाएं इसका अचूक समाधान प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से केवल 99 रुपये में

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Blog

परदे के पीछे अरुण जेटली के होने का मतलब

अरुण जेटली चले गए। शनिवार को दिन भर समाचार माध्यमों और राजनीतिक जगत में उनके व्यक्तित्व के अनेक पहलू और कृतित्व के अनेक अनछुए अध्याय सामने आए।

25 अगस्त 2019

विज्ञापन

बहरीन के 200 साल पुराने जिस मंदिर में मोदी ने की पूजा उसकी ये हैं खासियत

पीएम मोदी बहरीन के मनामा के 200 साल पुराने श्रीनाथ मंदिर में पूजा करने गए। यहां उन्होंने पूजा तो की ही साथ ही मंदिर के पुनर्निमाण योजना का शुभारंभ भी किया। हम आपको बताते हैं कि दो सौ साल पुराने इस मंदिर की क्या है खासियत।

25 अगस्त 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree