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17वीं लोकसभा के तीन साल: जानिए क्या रहीं उपलब्धियां, कितना संतोषजनक रहा अब तक का सत्र?

Mon, 20 Jun 2022 12:32 PM IST
Suraj Mohan Jha सूरज मोहन झा
Updated Mon, 20 Jun 2022 12:32 PM IST
सार

17वीं लोक सभा के पहले सत्र में शून्यकाल का जितना उपयोग किया गया शायद ही कभी किया गया हो। 37 दिनों के कामकाज में 1066 मुद्दों को सांसदों ने शून्यकाल के दौरान उठाए जो एक रिकॉर्ड है।

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3years of 17th lok sabha, an analytical review on it
17वीं लोकसभा (फाइल फोटो) - फोटो : संसद टीवी

विस्तार

विधायिका की तीन मुख्य जिम्मेदारियां होती हैं, कानून बनाने के लिए विधेयक पारित करना, जनहित के मुद्दों पर चर्चा करना और सरकार की जवाबदेही तय करना। संसद विधायी कामकाज पर चर्चा के अतिरिक्त प्रश्न काल, शून्यकाल, महत्वपूर्ण विषयों पर संसदीय नियामवली के अनुसार चर्चा और ध्यानाकर्षण के जरिए अपना मुख्य दायित्व निभाती है।

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साल 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को 303 सीटें मिली और पूर्ण बहुमत के साथ नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने।  17 जून 2019 को 17वीं लोक सभा की पहली बैठक हुई थी। इस लिहाज से देखें तो 17वीं लोक सभा के तीन साल पूरे हुए हैं और बीते तीन सालों में कोरोना जैसे वैश्विक महामारी के बावजूद हमने संसद की सुनहरी तस्वीर देखी है जो भारत में संसदीय लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है।

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17वीं लोक सभा के तीन साल के आकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। 17वीं लोक सभा के आठ सत्रों में कार्य उत्पादकता 106 प्रतिशत रही है जो 14वीं,15वीं और 16वीं लोक सभा के पहले तीन सत्रों से बहुत ज्यादा है। 

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कानून बनाना लोकसभा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। इसी से जनहित की बेहतर नीतियां लागू होती हैं और जनप्रतिनिधि अपनी भूमिका के साथ न्याय करते हैं। इस लिहाज से 17वीं लोकसभा के बीते तीन साल काफी महत्वपूर्ण रहे हैं। इन तीन वर्षों में लोक सभा में 139 विधेयक पेश हुए, जबकि 149 विधेयक सदन से पारित हुए हैं।


इनमें सबसे ज्यादा 35 विधेयक 17वीं लोक सभा के पहले सत्र में पारित हुए थे। 17वीं लोक सभा के पहले ही सत्र में भाजपा के एजेंडे में सबसे ऊपर रहे जम्मू कश्मीर में धारा 370 को हटाने और तीन तलाक कानून पर संसद की मोहर लग गई।

धारा 370 हटाना मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है, क्योंकि जनसंघ से भाजपा तक के सफर में यह उनके कार्यकर्ताओं की बीच सबसे बड़ा भावनात्मक मुद्दा था। अगर हम 17वीं लोक सभा में पारित कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों की बात करें तो

जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, नागरिकता (संशोधन) विधेयक, इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) विधेयक, ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, विदेशी अंशदान (विनियमन) विधेयक, चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक, आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक और दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक जैसे महत्वपूर्ण बिल संसद से पारित होकर कानून की शक्ल ले चुके हैं।


हालांकि तीनों कृषि कानून, जो साल 2020 के मानसून सत्र में संसद से पारित हुए थे उसे किसानों के भारी विरोध के कारण वर्ष 2021 के शीतकालीन सत्र में कृषि कानून रिपील विधेयक लाकर निरस्त कर दिया गया।

17वीं लोक सभा की शुरुआत ऐतिहासिक पहले सत्र के साथ हुई जिसमें रिकार्ड 35 विधेयक पारित हुए थे और कुल 37 बैठकों में 280 घंटे कामकाज हुआ। गौरतलब है कि पहले सत्र में एक भी मिनट व्यवधान से बाधित नहीं हुआ बल्कि 73 घंटे समय से ज्यादा बैठकर सांसदों ने विधायी कामकाज को निपटाया।

ऐसा नहीं कि 17वीं लोक सभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध की वजह से सदन का कामकाज बाधित न हुआ हो। अब तक 17वीं लोक सभा के आठ सत्रों में हुए कुल 176 बैठकों में 995 घंटे का कामकाज हुआ है और गतिरोध की  वजह से 138 घंटे बर्बाद हुए हैं। 17वीं लोक सभा के छठे सत्र में पेगासस जासूसी मामला और केंद्र के तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर विपक्ष ने पूरे सत्र में भारी हंगामा किया। इसका नतीजा रहा कि सत्र के 77 घंटे से ज्यादा का समय सदन का बर्बाद हो गया।

17वीं लोक सभा में हंगामे की वजह से 138 घंटे सदन के बर्बाद हो चुके हैं लेकिन इसका सकारात्मक पक्ष यह है कि माननीयों ने 255 घंटे से ज्यादा समय सदन में देर तक बैठकर इसकी भरपाई भी कर दी है।

कोरोना महामारी का असर

कोरोना महामारी की वजह से 17वीं लोकसभा बुरी तरह प्रभावित रहा है, साल 2020 के बजट सत्र को बीच में ही महामारी की वजह से सत्रावसान करना पड़ा और देश में राष्ट्रव्यापी स्तर पर लॉकडाउन का ऐलान किया गया। पूरा विश्व कोरोना की वजह से रुका हुआ था, ऐसे में विधायिका के समक्ष चुनौती थी कि महामारी के साथ-साथ संसद और विधानमंडलों की बैठक कैसे बुलाई जाए?

 छह महीने के भीतर सदन की बैठक कराना संवैधानिक अपरिहार्यता थी और साल 2020 का मानसून सत्र कोविड प्रोटोकॉल के तहत पहला पूर्ण सत्र था, जिसमें सुबह 9 से 1 बजे तक राज्यसभा की बैठक और बाद में दोपहर 3 से 7 बजे तक लोकसभा की बैठक हुई थी।

इसके अलावा सांसदों के बैठने की जगह में भी बदलाव किए गए, ताकि कोरोना के दौर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सके। पहली बाद संसद के दोनों सदनों का इस्तेमाल एक सदन की बैठक के लिए हो रहा था और दर्शक दीर्घाओं में भी सांसदों को बैठाया गया था। इस सत्र में प्रश्नकाल नहीं रखा गया था जिसका विपक्ष ने काफी विरोध किया और कहा कि सरकार सवालों के जवाब सदन के अंदर देने से बचना चाह रही है। 

ऐसा माना जाता है कि संसदीय लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना, लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ऑक्सीजन के समान होता है। प्रश्नकाल के दौरान लोकसभा सदस्य प्रशासन और सरकार के कार्यकलापों के प्रत्येक पहलू पर प्रश्न पूछ सकते हैं। प्रश्नकाल के दौरान सरकार को कसौटी पर परखा जाता है।

प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए प्रश्न तीन प्रकार के होते हैं- तारांकित प्रश्न, अतारांकित प्रश्न और अल्प सूचना प्रश्न।

17वीं लोक सभा के तीन सालों के आठ सत्रों में प्रश्नकाल के दौरान कुल 2900 प्रश्न लिस्टेट थे जिसमें से 844 प्रश्नों से मौखिक उत्तर सदन में मंत्रियों द्वारा दिए गए। वहीं 35609 अतारांकित प्रश्नों के भी उत्तर सरकार द्वारा दिए गए।


प्रश्नकाल के लिहाज से 17वीं लोक सभा काफी ऐतिहासिक रही और लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से तो कई बार सदन के अंदर प्रश्नकाल के दौरान सूचीबद्ध पूरे 20 तारांकित प्रश्न पूछे गए और संबंधित मंत्रियों द्वारा उनके जवाब दिए गए। 17वीं लोक सभा में कुछ सवाल प्रश्नकाल में अस्वीकृत भी किए गए जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी विवाद भी रहा।

3years of 17th lok sabha, an analytical review on it
लोकसभा की कार्यवाही - फोटो : संसद टीवी

शून्यकाल का सदुपयोग

17वीं लोक सभा के पहले सत्र में शून्यकाल का जितना उपयोग किया गया शायद ही कभी किया गया हो। 37 दिनों के कामकाज में 1066 मुद्दों को सांसदों ने शून्यकाल के दौरान उठाए जो एक रिकॉर्ड है। 18 जुलाई को तो शून्यकाल 4 घंटे 48 मिनट तक चला और इस दौरान रिकॉर्ड 161 सांसदों को बोलने का मौका मिला।

17वीं लोक सभा में अब तक शून्यकाल के दौरान 4648 जनहित के मुद्दे सांसदों द्वारा सदन में उठाए गए हैं। वहीं नियम 377 के तहत भी 3039 मुद्दे लोक सभा सदस्य सदन के अंदर बीते तीन सालों में उठा चुके हैं। 

17वीं लोक सभा में 154 प्राइवेट मेंबर बिल भी सदन के अंदर पेश किए गए।

एक सांसद जो मंत्री नहीं है, वह प्राइवेट मेंबर होता है। प्राइवेट मेंबर द्वारा पेश किए जाने वाले बिलों को प्राइवेट मेंबर्स के बिल कहा जाता है। पहली लोक सभा से लेकर अब तक 14 बिल ही संसद से पारित हुए हैं। साल 1970 से, संसद से कोई प्राइवेट मेंबर बिल पास नहीं हुआ है।


भारतीय संसद का क्षेत्र काफी विस्तृत होता है और इसका काफी कार्य संसदीय समितियों द्वारा निपटाया जाता है। संसदीय समितियों में सभी दलों के सांसद सदस्य होते हैं और कई महत्वपूर्ण समिति के अध्यक्ष तो विपक्ष के सांसद होते हैं इसलिए इसे लघु संसद भी कहा जाता है। विधेयक, मंत्रालयों के अनुदान की मांगों सहित महत्वपूर्ण विषयों और कार्यपालिका के कामकाज की पड़ताल करने का काम भी संसदीय समितियां करती हैं और अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करती है।

17वीं लोक सभा में अब तक विभागों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की 446 रिपोर्ट पेश हो चुकी हैं। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार संसदीय समितियों को कमजोर कर रही है और विधेयकों को समितियों के पास पड़ताल के लिए भेजने के बजाए सीधा सदन में लाकर पारित करा रही है इसलिए कई कानूनों पर समाज में मतभेद होता है।

महिलाओं की बढ़ती सहभागिता

17वीं लोक सभा में 78 महिला सदस्य चुनाव जीतकर लोक सभा पहुंची जो पहली लोक सभा से लेकर अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।  265 सांसद पहली बार चुनकर लोक सभा पहुंचे। अगर हम 17वीं लोक सभा के आठ सत्रों को आकड़ों के लिहाज से देखें तो कोरोना जैसी महामारी की चुनौती के बावजूद कामकाज के लिहाज इसे सकारात्मक कहा जाएगा।

17वीं लोक सभा के छठे सत्र सहित कुछ एक घटनाओं को छोड़ दें तो संसदीय व्यवस्था की अवधारणा को सफल साबित करते यह तीन साल भविष्य में अपनी उपलब्धियों के लिए सुनहरे अक्षरों में याद किया जाएगा। 17वीं लोक सभा के आठों सत्रों की उत्पादकता, संसद सदस्यों के भाषण, सदन से पारित विधेयक और नए सांसदो की सक्रियता, यह चारों पहलू इस पूरे तीन साल को संसदीय इतिहास के नजरिए से ऐतिहासिक बनाते है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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