सूर्यकुमार यादव: क्या वनडे टीम में इस 'टी-20 स्पेशलिस्ट' को लेना बीसीसीआई की भूल थी?
सूर्य कुमार यादव को विशुद्ध रूप से टी-20 का खिलाड़ी कहा जाए तो गलत नहीं होगा, क्योंकि वे कम गेंदों में अधिक रन बनाने की क्षमता रखते हैं और उनका टी-20 का रिकॉर्ड काफी सराहनीय है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
क्रिकेट में कब कोई खिलाड़ी हीरो और कब जीरो बन जाए, यह कहा नहीं जा सकता। हीरो से जीरो बने नए-नवेले खिलाड़ी हैं सूर्यकुमार यादव। चेन्नई में भारत-ऑस्ट्रेलिया के तीसरे वनडे में भी सूर्यकुमार यादव पहली ही गेंद पर आउट होकर पैवेलियन लौट आए। विशाखापट्टनम और मुंबई में भी उन्होंने पहली गेंद पर अपना विकेट गंवा दिया था। अनचाहे उनके नाम गोल्डन डक का अनोखा रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। वह पहले ऐसे भारतीय खिलाड़ी बने हैं, जिन्होंने गोल्डन डक की हैट्रिक लगा दी है और यह दुर्भाग्यपूर्ण रिकॉर्ड अपने नाम किया है।
सोशल मीडिया पर सूर्य कुमार यादव का न केवल मजाक उड़ाया जा रहा है, बल्कि उनकी जमकर आलोचना भी हो रही है। हालांकि, कुछ यूजर्स उनके वापस फॉर्म में लौटने की बात करके उनका हौसला भी बढ़ा रहे हैं।
टी-20 मैचों में रहा है बेहतर रिकॉर्ड
कड़े संघर्षों के बाद टीम इंडिया में शामिल हुए सूर्य कुमार यादव का कैरियर अब तक थोड़ा उतार-चढ़ाव वाला रहा है, लेकिन खास बात यह है कि जब-जब उनकी आलोचना हुई है, वह निखरकर बाहर आए हैं। अपने अनोखे बैटिंग स्टाइल के लिए उनकी तुलना दक्षिण अफ्रीका के धुआंधार बल्लेबाज रहे ए.बी. डिविलियर्स से होती है। डिविलियर्स को 360 डिग्री मैन भी कहा जाता है और वह ग्राउंड में कहीं पर भी छक्का लगा सकते थे। कुछ ऐसा ही प्रदर्शन सूर्य कुमार यादव ने दिखाया है, लेकिन क्रिकेट प्रेमी अपने पसंदीदा खिलाड़ी को सदैव स्कोर करते देखना चाहते हैं। उन्हें यह बात कतई बर्दाश्त नहीं होती कि स्टार खिलाड़ी यूं मैच दर मैच विकेट गंवाकर चला जाए।
सूर्य कुमार यादव को विशुद्ध रूप से टी-20 का खिलाड़ी कहा जाए तो गलत नहीं होगा, क्योंकि वे कम गेंदों में अधिक रन बनाने की क्षमता रखते हैं और उनका टी-20 का रिकॉर्ड काफी सराहनीय है। पिछले दिनों टी-20 में उन्होंने तीन शतक लगाकर क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया था, लेकिन वनडे में उनका कोई भी शतक नहीं है। उनके टी-20 के फॉर्म को देखते हुए जब क्रिकेट प्रेमियों का दबाव पड़ा तो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने उन्हें टेस्ट में भी मौका दिया। हालांकि, वे एक ही टेस्ट मैच खेले और 8 रन ही बना सके।
सूर्य कुमार यादव की डिविलियर्स से तुलना पर भी लोग हास्य-व्यंग कर रहे हैं। कुछ का तो यहां तक कहना है कि यह बीसीसीआई की ही गलती है कि उन्होंने टी-20 स्पेशलिस्ट बल्लेबाज को वनडे में मौका दे दिया।
सूर्य कुमार यादव के पिछले 15 वनडे मैचों का स्कोर देखें तो यह बात साफ भी हो जाती है। इन मैचों में सूर्य कुमार यादव का अधिकतम स्कोर 34 रन नाबाद रहा है। 9 बार वो सिंंगल डिजिट के स्कोर पर आउट हुए हैं। 21 वनडे में उन्होंने दो बार ही हॉफ सेंचुरी लगाई है। खेल प्रेमी कह रहे हैं कि सूर्य की जगह रजत पाटीदार, यशस्वी जयसवाल, पृथ्वी शॉ, सरफराज, संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों को मौका दिया जाना चाहिए था।
लग रहा है कि बीसीसीआई और टीम के सिलेक्टर्स सूर्य कुमार यादव के वनडे और टेस्ट मैच खेलने पर पुनर्विचार कर सकती है। यह संभावना अधिक है कि सूर्य कुमार यादव को टी-20 तक ही सीमित कर दिया जाए, जैसे चेतेश्वर पुजारा को टेस्ट मैचों तक सीमित कर दिया गया है।
सूर्य कुमार यादव जैसे प्रतिभावान क्रिकेटर के कैरियर में उतार-चढ़ाव वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है। क्रिकेट प्रेमियों को भी संयम का परिचय देना चाहिए। महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली जैसे खिलाड़ी भी कैरियर में उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। विराट ने तो पिछले दिनों टेस्ट में करीब-करीब तीन साल बाद शतक लगाया था। क्रिकेट प्रेमियों को भी निराशा के दौर में अपने खिलाड़ी को नहीं छोड़ना चाहिए।
खेल, खेल होता है, कभी शतक लगता है तो कभी शून्य पर भी खिलाड़ी आउट हो जाता है। उम्मीद है कि बीसीसीआई सूर्य कुमार यादव के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और यह प्रतिभावान खिलाड़ी दोबारा अपनी बैटिंग का लोहा मनवाएगा।
---------------------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।