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27 साल पहले मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को राष्ट्रपति ने सौंपा था राजदंड

Sat, 27 May 2023 02:55 PM IST
Satish Alia सतीश एलिया
Updated Sat, 27 May 2023 02:55 PM IST
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27 years ago the President handed over the scepter to the Speaker of the Madhya Pradesh Legislative Assembly
राष्ट्रपति डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी को राजदंड सौंपते हुए। - फोटो : सतीश एलिया

मध्यप्रदेश की विधानसभा जब 40 बरस तक वायसराय लॉर्ड मिंटो के सम्मान में भोपाल के तत्कालीन नवाब के बनाए भवन मिंटो हॉल से 1996 में नए भवन में पहुंची तो तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा ने इस भवन का उद्घाटन किया। उन्होंने तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी को राजदंड अपनी तरफ से सौंपा। पुराने विधानसभा भवन में अध्यक्ष के आसन पर राजदंड न था। 3 अगस्त 1996 को राष्ट्रपति ने विधानसभा भवन का उद्घाटन किया था। तब राज्यपाल थे मोहम्मद शफी कुरैशी, मुख्यमंत्री थे दिग्विजय सिंह और नेता प्रतिपक्ष थे विक्रम वर्मा।

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नए भवन का नाम इंदिरा गांधी विधानसभा भवन रखा गया, इसका तत्कालीन प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी ने इतना तीखा विरोध किया की इंदिरा विधान भवन की नाम पट्टिका तोड़ने मेँ बीजेपी और बचाने में कांग्रेस विधायक आपस में धक्का-मुक्की पर उतर आए थे और कई विधायक रक्त रंजित हो गए थे। काफी बड़े आकार की स्टील निर्मित नाम पट्टिका तोड़ने में उसकी ही चोट से कई विधायकों को सर में चोटें आई थीं।    
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विधानसभा भवन का नाम अब भी वही है। हालांकि, उद्घाटन के 7 साल बाद 2003 में बीजेपी की सरकार बनी और तब से 2018-2019 के 15 माह छोड़कर बीजेपी की ही सरकार है। 15 माह कमलनाथ के मुख्यमंत्री काल में कांग्रेस सरकार रही। इंदिरा गांधी मध्य प्रदेश विधानसभा भवन का भूमि पूजन तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ ने 14 मार्च 1981 को किया था, तब लागत 10 करोड़ रुपये अनुमानित थी। निर्माण काम 17 सितंबर 1984 को शुरू हो सका। 12 साल से ज्यादा समय में भवन बना तो लागत 54 करोड़ को पार कर चुकी थी।

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विधानसभा थी तब भी लोकप्रिय नाम मिंटो हॉल था

अब कुशाभाऊ ठाकरे नामकरण के बाद भी वही प्रचलित जैसे हमारे देश का वर्तमान संसद भवन अंग्रेजों का बनाया और वर्तमान जरूरतों के लिहाज से नाकाफी है। वैसे ही 1909 में लॉर्ड मिंटो ने भोपाल में तब की लाल कोठी और अब के राजभवन के ठीक सामने मिंटो हॉल भवन निर्माण की आधारशिला रखी थी। भोपाल रियासत की चौथी नवाब बेगम सुल्तानजहां ने बनवाया मिंटो के सम्मान में था लेकिन तब 3 लाख रुपये की लागत से बने भवन में मिंटो कभी गए नहीं।


बाद में सुल्तान जहां ने इसमें कन्या महाविद्यालय खुलवाया। सांसद, केंदीय मंत्री, राज्यसभा उपसभापति, राज्यपाल रहीं नजमा हेपतुल्ला उसी हमीदिया कॉलेज में पढ़ीं थी।  बाद में 1956 में मध्य भारत, विंध्य प्रदेश, भोपाल रियासत, छग और राजस्थान की टोंक रियासत के सिरोंज, लटेरी मिलाकर मध्यप्रदेश राज्य बना और भोपाल राजधानी बनी तो मिंटो हॉल को मध्यप्रदेश विधानसभा भवन बना दिया लेकिन बोलचाल में जुबान पर मिंटो हॉल ही चढ़ा रहा। 

40 बरस बाद कांग्रेस की सरकार ने नया विधानसभा भवन बनाने का फैसला किया। भूमि पूजन और निर्माण कार्य शुरू होने के बीच 3 साल का फासला रहा। अर्जुन सिंह के मुख्यमंत्री काल में काम शुरू हुआ और 12 साल बाद दिग्विजयसिंह के कार्यकाल में पूरा हुआ। बीच में ढाई साल बीजेपी की सुन्दर लाल पटवा सरकार रही।

पहले विधानसभा में नहीं था राजदंड

मध्यप्रदेश विधानसभा के तत्कालीन उप सचिव जो बाद में प्रमुख सचिव भी रहे, भगवानदेव इसराणी ने बताया कि तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा ने नए भवन के उद्घाटन अवसर पर तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी को राजदंड प्रदान किया था। तब से मध्य प्रदेश विधानसभा में अध्यक्ष के आसन के समीप इसे सम्मान रखा जाता है। पुराने विधानसभा भवन में य़ह व्यवस्था य़ह परंपरा नहीं थी।

गौरतलब, है कि इस भवन के उद्घाटन के एक दिन पहले भोपाल के एक अखबार में भवन के एक छज्जा का हिस्सा गिरने की खबर फोटो सहित प्रकाशित हुई थी। राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने उद्घाटन समारोह में कहा कि मैंने खबर पड़ी है कि कुछ गिर गया है। उन्होंने विधानसभा के सदन के विशाल गुंबद की तरफ देखकर चुटकी ली थी कि कहीं ये तो नहीं गिर पड़ेगा।

छग बनने के बाद बुच ने कहा था इसे बना दो होटल

1 नवंबर 2000 को अलग छग राज्य बनने के बाद जब 320 विधायकों के लिए भवन में संख्या 230 ही रह गई और विधान परिषद के लिए बना विशाल सभागार बंद ही था तो मध्य प्रदेश के चर्चित और तेजतर्रार नौकरशाह रहे महेश नीलकंठ बुच ने कहा था  इस आगा खान अवॉर्ड विजेता विधानसभा भवन को अब 5 स्टार होटल में तब्दील कर देना चाहिए।

मिंटो हॉल अब कुशा भाऊ ठाकरे सभागार

1996 में विधानसभा नए भवन में जाने के करीब एक दशक बाद मिंटो हॉल को कन्वेंशन सेंटर में बदल दिया गया। इस बीच जहां कभी विधानसभा का सदन होता था, फिल्मी विधानसभा लगी यानी राजनीति और अन्य कई फ़िल्मों की शूटिंग होती रही। अन्य आयोजन अब भी होते हैं। मिंटो हॉल का नामकरण राजा भोज, सर हरि सिंह गौर से लेकर वीर सावरकर के नाम पर किए जाने की मांग होती रही।

आखिरकार मध्य प्रदेश सरकार ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और मध्य प्रदेश बीजेपी में पितृ पुरुष कहे और माने जाने वाले कुशाभाऊ ठाकरे के नाम पर मिंटो हॉल का नाम रखा। इसका एलान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 26 नवंबर 2021 को इसी हॉल में चल रही प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक में किया था। लेकिन लोग अब भी कुशाभाऊ ठाकरे सभागार का पता समझाने, पूछने, बताने में मिंटो हॉल नाम पुकारते हैँ।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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