फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   2023 Tripura Legislative Assembly election, Voting to elect a new government in the northeastern state

त्रिपुरा: पूर्वोत्तर राज्यों का सबसे अहम चुनाव, किसके सिर सजेगा ताज?

Thu, 16 Feb 2023 02:21 PM IST
New Delhi Published by: प्रभाकर मणि तिवारी Updated Thu, 16 Feb 2023 02:21 PM IST
सार

भाजपा ने यहां 55 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। सरकार में उसकी सहयोगी इंडीजीनस पीपुल्स पार्टी आफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) छह सीटों पर चुनाव लड़ रही है। दूसरी ओर, वामपंथी पार्टियां 47 और उसकी सहयोगी कांग्रेस 13 सीटों पर लड़ रही है। टिपरा मोथा ने 42 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं।

विज्ञापन
2023 Tripura Legislative Assembly election, Voting to elect a new government in the northeastern state
त्रिपुरा चुनाव 2023 - फोटो : self

विस्तार

पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा के चुनावी इतिहास के सबसे अहम विधानसभा चुनाव की तैयारियां लगभग पूरी हो गई हैं। विधानसभा की महज 60 सीटें होने के बावजूद इस राज्य ने इस बार जितनी सुर्खियां बटोरी हैं उतनी शायद कभी नहीं बटोरी थी। इसकी प्रमुख वजह है कांग्रेस-वाम गठबंधन और क्षेत्रीय पार्टी टिपरा मोथा के उभार के कारण भाजपा का सत्ता बचाने के लिए जूझना।

विज्ञापन


शाही घराने के उत्तराधिकारी प्रद्योत विक्रम देबबर्मन के नेतृत्व वाली क्षेत्रीय पार्टी टिपरा मोथा सत्तारूढ़ और विपक्षी गठबंधन दोनों को कड़ी चुनौती दे रही है। अबकी मुकाबले के तिकोना होने की उम्मीद है। हालांकि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस भी मैदान में है, लेकिन उसके खास प्रदर्शन की उम्मीद खुद पार्टी के नेताओं को भी नहीं हैं।
विज्ञापन


बांग्लादेश की सीमा से सटे बांग्लाभाषी बहुल इस राज्य में चुनावी हिंसा का पुराना इतिहास रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए शांतिपूर्ण मतदान के लिए केंद्रीय बलों को 25 हजार जवानों के अलावा राज्य पुलिस के भी 31 हजार जवानों को तैनात किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


राज्य की धनपुर सीट राज्य की सबसे वीआईपी सीट बन गई है। यहां भाजपा ने राज्य की पहली केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक को मैदान में उतारा है और विपक्षी गठबंधन ने कौशिक चंदा को। पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीएम नेता माणिक सरकार लगातार चार बार यहां से जीत चुके हैं। ऐसे में सवाल पूछा जा रहा है कि क्या धानपुर एक बार फिर मुख्यमंत्री को चुनेगा? भाजपा को बहुमत मिलने और भौमिक की जीत की स्थिति में उनको सीएम की कुर्सी सौंपने की भी अटकलें लगाई जा रही हैं। प्रतिमा केंद्र में मंत्री बनने वाली राज्य की पहली महिला हैं।
 

आंकड़ों के लिहाज से देखें तो भाजपा ने यहां 55 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। सरकार में उसकी सहयोगी इंडीजीनस पीपुल्स पार्टी आफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) छह सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इन दोनों सहयोगियों में एक सीट पर दोस्ताना मुकाबले की संभावना है। दूसरी ओर, वामपंथी पार्टियां 47 और उसकी सहयोगी कांग्रेस 13 सीटों पर लड़ रही है। टिपरा मोथा ने 42 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। भाजपा ने सबसे ज्यादा 12 महिलाओं को टिकट दिया है।

 


कांग्रेस और वाम मोर्चा साथ

भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए दो चिर प्रतिद्वंदियों यानी कांग्रेस और वाम मोर्चा ने हाथ मिला लिया है और इस गठजोड़ से भगवा खेमे में आशंकाएं भी बढ़ गई हैं। यह गठजोड़ इसमें शामिल दोनों दलों यानी वाममोर्चा और कांग्रेस के लिए समान रूप से अहम है। यहां लंबे अरसे तक राज करने वाली सीपीएम अबकी कांग्रेस को साथ लेकर भाजपा विरोधी वोटों में बिखराव रोकने की कवायद में जुटी है।

दूसरी ओर, कांग्रेस भी यहां वजूद की लड़ाई लड़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महज भाजपा नहीं बल्कि तृणमूल कांग्रेस के विरोध ने भी इन दोनों के एकजुट होने में अहम भूमिका निभाई है। हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस खासकर त्रिपुरा और मेघालय में कांग्रेस के लिए सबसे बड़े खतरे के तौर पर उभरी है। इन दोनों राज्यों में उसने कांग्रेस का लगभग सफाया कर दिया है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस तालमेल से क्या दोनों दलों के वोटर भी एक साथ हो सकेंगे? करीब सात दशकों से कांग्रेस और वाममोर्चा यहां परस्पर विरोधी रहे हैं। वर्ष 2018 में वाम विरोधी ज्यादातर वोट भगवा खेमे में चले गए थे।


क्षेत्रीय पार्टी ने बनाया मुकाबले को तिकोना

शाही घराने के उत्तराधिकारी प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मन ने मुकाबले को तिकोना बना दिया है। एक ओर, सत्ता में वापसी के जी तोड़ कोशिश कर रही भाजपा है तो दूसरी ओर अबकी सत्ता के सपने देख रहा वाम-कांग्रेस गठबंधन है। लेकिन राजनीतिक हलकों में धारणा बन रही है कि अबकी प्रद्योत की क्षेत्रीय पार्टी टिपरा मोथा किंगमेकर साबित हो सकती है।

टिपरा मोथा ने राज्य की 60 सीटों में से 42 पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। उसने अपने चुनाव घोषणापत्र में राज्य के मूल निवासियों के लिए ग्रेटर टिपरालैंड नामक अलग राज्य का वादा किया है। पार्टी ने आदिवासी परिषद के लिए अलग पुलिस बल गठित करने, 20 हजार नई नौकरियां पैदा करने और हथियार डालने वाले उग्रवादियों के लिए एकमुश्त पैकेज का भी एलान किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि खासकर अगर बांग्लाभाषी बहुल इलाकों में वाम और कांग्रेस के वोट एकजुट हो गए और आदिवासी इलाकों में टिपरा मोथा ने बेहतर प्रदर्शन किया तो भाजपा के लिए संकट पैदा हो सकता है। आदिवासी इलाकों की 20 सीटों पर टिपरा मोथा वह बेहद मजबूत नजर आती है।

भाजपा भी कांग्रेस-वाम गठबंधन और टिपरा मोथा की ओर से मिल रही चुनौतियों से वाकिफ है। लेकिन उसे अपने काम से ज्यादा विपक्षी वोटों में विभाजन पर भरोसा है। प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री समेत कई दिग्गज नेताओं के ताबड़तोड़ दौरे और विपक्ष पर तीखे हमलों से उसकी चिंता साफ झलकती है। वर्ष 2018 के चुनाव में वाममोर्चा को 42.22 और भाजपा को 43.59 फीसदी वोट मिले थे। कई सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों की जीत का अंतर बहुत कम था। कांग्रेस-वाम गठबंधन ऐसी सीटों पर समीकरण गड़बड़ा सकता है। और मतदान से ठीक पहले इसी आशंका ने भाजपा की नींद छीन ली है।




डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed