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विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस..पक्के ट्रैक पर दौड़ने से हड्डियों को नुकसान, 45 साल के बाद रहें सतर्क
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। शहर के पार्कों और स्टेडियमों में सुबह पक्के ट्रैक पर दौड़ने और जॉगिंग करने वालों को सावधानी बरतने की जरूरत है। नागरिक अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कुनाल ने खानपान और व्यायाम के प्रति लापरवाही से हड्डियों की सेहत प्रभावित होने की बात कही। उन्होंने 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को विशेष सतर्कता बरतने और नियमित जांच कराने की सलाह दी।
डॉ. कुनाल के अनुसार, अस्पताल की ओपीडी में आने वाले 45 साल से अधिक उम्र के करीब 40 प्रतिशत मरीजों में हड्डियों की क्षमता कम होने या जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे मामूली गिरावट में भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। कई बार घर में बाथरूम या रसोई में फिसलने से कूल्हे की हड्डी टूटने जैसी गंभीर स्थिति बन जाती है। इससे मरीज को लंबे समय तक दूसरों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
दाल, दूध और हरी सब्जियों को भोजन में करें शामिल
डॉ. कुनाल ने कहा कि हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खानपान जरूरी है। भोजन में दाल, दूध और हरी सब्जियां शामिल करने से कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि भी हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में मदद करती है। हालांकि, दौड़ने या जॉगिंग के लिए उपयुक्त सतह और सही तकनीक का ध्यान रखना चाहिए।
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50 साल की उम्र के बाद कराएं हड्डियों की जांच
हड्डियों की स्थिति का पता लगाने के लिए 50 साल की उम्र के बाद डॉक्टर की सलाह से बोन डेंसिटी टेस्ट यानी डेक्सा स्कैन कराया जा सकता है। समय पर जांच से हड्डियों की कमजोरी का पता लगाने और उचित उपचार शुरू करने में मदद मिलती है।
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बहादुरगढ़। शहर के पार्कों और स्टेडियमों में सुबह पक्के ट्रैक पर दौड़ने और जॉगिंग करने वालों को सावधानी बरतने की जरूरत है। नागरिक अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कुनाल ने खानपान और व्यायाम के प्रति लापरवाही से हड्डियों की सेहत प्रभावित होने की बात कही। उन्होंने 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को विशेष सतर्कता बरतने और नियमित जांच कराने की सलाह दी।
डॉ. कुनाल के अनुसार, अस्पताल की ओपीडी में आने वाले 45 साल से अधिक उम्र के करीब 40 प्रतिशत मरीजों में हड्डियों की क्षमता कम होने या जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे मामूली गिरावट में भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। कई बार घर में बाथरूम या रसोई में फिसलने से कूल्हे की हड्डी टूटने जैसी गंभीर स्थिति बन जाती है। इससे मरीज को लंबे समय तक दूसरों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
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दाल, दूध और हरी सब्जियों को भोजन में करें शामिल
डॉ. कुनाल ने कहा कि हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खानपान जरूरी है। भोजन में दाल, दूध और हरी सब्जियां शामिल करने से कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि भी हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में मदद करती है। हालांकि, दौड़ने या जॉगिंग के लिए उपयुक्त सतह और सही तकनीक का ध्यान रखना चाहिए।
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50 साल की उम्र के बाद कराएं हड्डियों की जांच
हड्डियों की स्थिति का पता लगाने के लिए 50 साल की उम्र के बाद डॉक्टर की सलाह से बोन डेंसिटी टेस्ट यानी डेक्सा स्कैन कराया जा सकता है। समय पर जांच से हड्डियों की कमजोरी का पता लगाने और उचित उपचार शुरू करने में मदद मिलती है।