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उत्तराखंड: बागी विधायकों को झटका, हाईकोर्ट ने की याचिका खारिज

Sat, 26 Mar 2016 07:48 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 26 Mar 2016 07:48 AM IST
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Uttarakhand political crisis reached High Court
कपिल सिब्बल और सीएम हरीश रावत - फोटो : file photo

बागी विधायकों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका मिला है। बागी आठ विधायकों की ओर से विधानसभा स्पीकर के फैसले के खिलाफ याचिका को नैनीताल हाईकोर्ट ने खारिज कर दी।

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हाईकोर्ट ने कहा कि मामला विधानसभा का है और विधानसभा अध्यक्ष ही इसमें फैसला लेंगे। कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। वहीं बागी अब सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
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गौरतलब है कि दल बदल कानून के तहत विधानसभा अध्यक्ष की ओर से दिए गए नोटिस को बागी विधायकों ने हाईकोर्ट में चैलेंज किया है। जिसके बाद शुक्रवार को जस्टिस सुधांशु धूलिया की कोर्ट में मामले पर सुनवाई हुई।
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बता दें कि केवल आठ बागी विधायकों ने स्पीकर के नोटिस को चैलेंज किया था। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने नोटिस के खिलाफ याचिका दायर नहीं की थी। 

अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी और पूर्व महाअधिवक्ता उनियाल कोर्ट में बागियों की तरफ से पैरवी की। वहीं सरकार के ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने याचिका का विरोध किया। अवकाश के बावजूद न्यायालय में सुधाँशु धूलिया की एकलपीठ में मामले की सुनवाई हुई।

नोटिस को चैलेंज करने वाले बागी विधायक
रामनगर विधायक अमृता रावत, रुद्रप्रयाग विधायक हरक सिंह रावत, खानपुर विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन, जसपुर विधायक शैलेन्द्र मोहन सिंगल, केदारनाथ विधायक शैला रानी रावत, नरेन्द्रनगर विधायक सुबोध उनियाल व् रायपुर विधायक उमेश शर्मा ने रिट फाइल कर विधानसभा अध्यक्ष के 19 मार्च के आदेश को चुनौती दी।

बागी विधायकों की तरफ से कहा गया है की वित्त मंत्री डा.इंदिरा हृदेश की शिकायत के बाद विधानसभा अध्यक्ष की कार्यवाही को पूर्वाग्रह से प्रेरित माना है ।

सरकार को बचाने की नहीं, जन आकांक्षा को बचाने की चिंता

Uttarakhand political crisis reached High Court
हरीश रावत - फोटो : file photo

उच्च न्यायालय के आदेश का हम स्वागत करते हैं। पूरे देश का ध्यान इस बात पर आकर्षित करना चाहता हूं कि बड़ी मुश्किल से नॉर्थ ईस्ट राज्यों में स्थायित्व आया है।

भाजपा ने जो प्रक्रिया अरुणाचल प्रदेश से शुरू की, वही प्रक्रिया उत्तराखंड जैसे छोटे सीमांत राज्य में भी शुरू कर दी। भाजपा दल-बदल को बढ़ावा दे रही है। धनबल, बाहुबल और शक्तिबल से जिस प्रकार विधायकों को अपने कब्जे में लेकर के भाजपा उत्तराखंड सरकार को गिराना चाहती है, यह बहुत दुखद है।

मेरी चिंता सरकार को बचाने की नहीं है, बल्कि प्रदेश की जन आकांक्षाओं को बचाने की है। यदि राज्य में राजनीतिक स्थायित्व नहीं होगा तो प्रदेश की जन आकांक्षाओं को पूरा करना संभव नहीं होगा। राज्य में कैसे राजकाज चलेगा। हम उस कानून के शरण में हैं, जो भारत की संसद ने बनाया है।
-हरीश रावत, मुख्यमंत्री

बागियों को मनाने दून आएंगी अंबिका सोनी

Uttarakhand political crisis reached High Court
अंबिका सोनी - फोटो : file photo

बागी विधायकों को मनाने के लिए 27 मार्च को पूर्व सूचना मंत्री अंबिका सोनी दून पहुंचेंगी। कांग्रेस बागियों को मनाने के लिए हर हथकंडा अपना रही है।

एक तरफ जहां सरकार ने हरीश रावत ने भी अपने सुर नरम किए है वहीं केंद्रीय नेतृत्व भी भरसक कोशिश कर रहा है। इसी के तहत अंबिका सोनी बागियों को मनाने दून पहुंच रही है।

दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अ‌ध्यक्ष अजय भट्ट ने कांग्रेस द्वारा भाजपा पर खरीद फरोख्त के आरोप पलटवार किया है।

उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि हरीश रावत सरकार खुद हार्स ट्रेडिंग कर रही है। मुख्यमंत्री द्वारा भाजपा के निलंबित विधायक को पद देना यह बताता है कि किस तरह कांग्रेस खरीद फरोख्त में लगी है।

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