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सत्यवान हत्याकांड में दो दोषियों को उम्रकैद, 85 हजार रुपये जुर्माना
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झज्जर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुखप्रीत सिंह की अदालत ने वर्ष 2017 के सत्यवान हत्याकांड में भूपेंद्र उर्फ कन्ना उर्फ काला और जितेंद्र उर्फ कल्टा को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर अलग-अलग धाराओं में कुल 85 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, रुडियावास निवासी सत्यवान अपने भाई जय भगवान के साथ रात करीब 9:45 बजे प्लॉट से घर लौट रहे थे। इसी दौरान चौपाल के मोड़ के पास आरोपियों ने पुरानी रंजिश के चलते उन पर गोलियां चला दीं। गोली लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वहां से गुजर रहे मेहताब को छर्रे लगे थे। जय भगवान ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि भूपेंद्र और सत्यवान के बीच करीब छह माह पहले झगड़ा हुआ था।
पुलिस ने जांच के बाद भूपेंद्र और जितेंद्र को गिरफ्तार किया था। भूपेंद्र की निशानदेही पर देसी दो नाली बंदूक बरामद की गई। एफएसएल रिपोर्ट में हथियार से घटनास्थल पर मिले कारतूस चलाए जाने की पुष्टि हुई। अदालत ने मृतक के भाई जय भगवान की गवाही को विश्वसनीय माना।
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अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या के प्रयास की धारा 307 के आरोप से बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से घायल मेहताब को गवाही के लिए पेश नहीं किए जाने के कारण यह आरोप साबित नहीं हो सका।
अलग-अलग धाराओं में सुनाई सजा
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के तहत दोनों दोषियों को उम्रकैद और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। धारा 120-बी के तहत दोनों को 10-10 साल कैद और 15-15 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। वहीं, शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत भूपेंद्र को तीन साल कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, रुडियावास निवासी सत्यवान अपने भाई जय भगवान के साथ रात करीब 9:45 बजे प्लॉट से घर लौट रहे थे। इसी दौरान चौपाल के मोड़ के पास आरोपियों ने पुरानी रंजिश के चलते उन पर गोलियां चला दीं। गोली लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वहां से गुजर रहे मेहताब को छर्रे लगे थे। जय भगवान ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि भूपेंद्र और सत्यवान के बीच करीब छह माह पहले झगड़ा हुआ था।
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पुलिस ने जांच के बाद भूपेंद्र और जितेंद्र को गिरफ्तार किया था। भूपेंद्र की निशानदेही पर देसी दो नाली बंदूक बरामद की गई। एफएसएल रिपोर्ट में हथियार से घटनास्थल पर मिले कारतूस चलाए जाने की पुष्टि हुई। अदालत ने मृतक के भाई जय भगवान की गवाही को विश्वसनीय माना।
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अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या के प्रयास की धारा 307 के आरोप से बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से घायल मेहताब को गवाही के लिए पेश नहीं किए जाने के कारण यह आरोप साबित नहीं हो सका।
अलग-अलग धाराओं में सुनाई सजा
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के तहत दोनों दोषियों को उम्रकैद और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। धारा 120-बी के तहत दोनों को 10-10 साल कैद और 15-15 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। वहीं, शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत भूपेंद्र को तीन साल कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।