दिल्ली सरकार के सुझाव के बाद नए कॉरिडोर जोड़ना नहीं चाहती डीएमआरसी
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दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन ने मेट्रो फेज-चार के कॉरिडोर को जल्द मंजूरी देने की मांग की है। तर्क दिया है कि फेज-तीन का निर्माण इसी साल पूरा हो रहा है जिसमें लगी एजेंसियां सामान उठा लेंगी तो निर्माण लागत और बढ़ जाएगी।
अभी 104 किमी कॉरिडोर की शुरुआती लागत 32,399 करोड़ है जो निर्माण पूरा होने तक 49,973 करोड़ रुपये हो जाएगी। दिल्ली सरकार से प्रोजेक्ट की मंजूरी के बाद ही केंद्र सरकार की मंजूरी मिलेगी। हालांकि अंतिम फैसला दिल्ली सरकार को ही लेना है जिस पर मंत्री स्तर पर जल्द बैठक होगी।
सूत्र बताते हैं कि डीएमआरसी ने दिल्ली सरकार की फेज-4 में कुछ कॉरिडोर घटाने, कुछ नए कॉरिडोर जोड़ने की सिफारिश पर भी असहमति जताई है। तर्क दिया गया है कि राइट्स की रिपोर्ट और डीएमआरसी सर्वे के आधार पर डीपीआर बनाए गए हैं।
दिल्ली सरकार की तरफ से द्वारका से प्रेम पिआऊ (अरबन एक्सटेंशन रोड) कॉरिडोर की फिजिबिलिटी स्टडी को मंजूरी देकर डीएमआरसी को 18.6 किमी के कॉरिडोर की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट आगे बढ़ाने का पत्र भेजा गया था।
जिस पर डीएमआरसी ने कहा है कि यहां यात्री इतने नहीं है कि सरकारी प्रोजेक्ट का वित्तीय रिटर्न मिल पाए। दिल्ली सरकार ने आरके आश्रम से जनकपुरी वेस्ट को जोड़ने वाले 28.92 किमी को फेज-4 के अंतिम चरण में ले जाने और रिठाला से नरेला कॉरिडोर में परिवर्तन करके कंझावला से ले जाने को कहा था।
पुराने पैटर्न पर फेज-चार के निर्माण की सिफारिश
इसमें भी डीएमआरसी ने कहा है कि इस कॉरिडोर पर 2021 में दैनिक राइडरशिप 5.51 लाख दैनिक है जो सबसे अधिक है। फिर बदलाव करके फिर से कुछ जगह के डीपीआर बनाने में और देरी होगी। डीएमआरसी ने पुराने एसपीवी मॉडल पर ही निर्माण की सिफारिश भेजी है जिसमें 54.61 फीसदी राशि जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी(जाइका) से लोन लिया जाएगा।
वहीं 5000 करोड़ रुपये डीडीए की हिस्सेदारी रहेगी। इसमें दिल्ली सरकार को 11,334 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी देनी है। अगर बिल्ड ऑपरेट एंड ट्रांसफर(बीओटी) मॉडल पर जाते हैं तो दिल्ली सरकार को 24,979 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। साथ ही 5,235 करोड़ रुपये पुराने चरण की लाइन पर यात्री बढ़ने से ट्रेन खरीदने के लिए सरकार को खर्च करने होंगे।
लंबे समय से चल रही है फेज-4 की तैयारी
दिल्ली मेट्रो अधिकारियों ने पिछले दिनों सरकार की मीटिंग में कहा कि फेज-4 की तैयारी में पहला पत्र सरकार को 2 नवंबर, 2011 में लिखा था। मार्च, 2012 में सर्वे की स्वीकृति दी गई। डीएमआरसी ने दिसंबर, 2014 में डीपीआर जमा कराई।
मार्च, 2015 तक डीपीआर को स्वीकृति मिलने पर अप्रैल, 2016 में काम शुरू करके मार्च, 2022 तक खत्म करने की बात डीपीआर में कही गई थी। डीएमआरसी की तरफ से बनाई गई डीपीआर के आधार पर आप
सरकार ने डीएमआरसी, पीडब्ल्यूडी, परिवहन विभाग की कई बैठकें की। उसमें फेज-4 के कॉरिडोर को प्राथमिकता के हिसाब से टुकड़ों में बांटकर काम आगे शुरू करने का फैसला किया गया था।
आज से चालक रहित मेट्रो का ट्रायल
एक नजर में फेज-4 का प्रोजेक्ट
अप्रैल, 2016 में शुरू करना था निर्माण कार्य, स्वीकृति में हो चुकी है देरी नेटवर्क जुड़ने से 2021 तक 16.21 लाख, 2031 तक 22.24 लाख और 2041 तक 29.51 लाख यात्री मेट्रो में बढ़ेंगे।प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत 32,399 करोड़ है जो निर्माण पूरा होने तक 49,973 करोड़ रुपये हो जाएगी।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन मंगलवार को फेज-तीन में चलने वाली बिना ड्राइवर वाली मेट्रो का ट्रायल करने जा रही है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ट्रेन को मुकुंदपुर डिपो से हरी झंडी दिखाएंगे।
हालांकि ट्रायल वाली मेट्रो ट्रेन में ड्राइवर तैनात रहेगा। डीएमआरसी के अनुसार, शुरुआत में ट्रेन का ट्रायल ऑपरेटर के साथ होगा फिर बिना ऑपरेटर के ट्रायल किया जाएगा। विश्व के तमाम मेट्रो सिस्टम ने यह तकनीक अपनाई है।
दिल्ली मेट्रो रेल के फेज-तीन की सबसे लंबी लाइन मजलिस पार्क से शिव विहार के ट्रैक पर इस ड्राइवर रहित मेट्रो का ट्रायल होगा। इस सेक्शन में मायापुरी, नारायणा और त्रिलोकपुरी में करीब दो किमी के टुकड़े का निर्माण नहीं हो सका है। इससे जनता को मेट्रो की सेवाएं टुकड़ों में मिलेंगी। मेट्रो ने दिसंबर, 2016 तक सभी कॉरिडोर खोलने का लक्ष्य रखा था।