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अदालत ने मारपीट और धमकी के आरोपी को बरी किया
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संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विनीत कुमार की अदालत ने मारपीट और आपराधिक धमकी के एक मामले में आरोपी जोगेंद्र को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा। शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के अपने बयानों से मुकर जाने के कारण यह फैसला आया।
साल्हावास पुलिस थाने में 1 मार्च 2019 को एफआईआर दर्ज की गई थी। जोगेंद्र पर भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 325, 341 और 506 के तहत आरोप लगे थे। शिकायतकर्ता राजेश ने आरोप लगाया था कि 26 फरवरी 2019 की रात करीब साढ़े बारह बजे जोगेंद्र ने उसे रोका। जोगेंद्र कथित तौर पर शराब के नशे में था और उसके हाथ में लोहे की रॉड थी।
राजेश के अनुसार, जोगेंद्र ने उसे रॉड से कमर, कंधे और पैरों पर मारा, जिससे वह गिर गया। इस दौरान दो अन्य व्यक्ति भी वहां आए और गाली-गलौज की। राजेश की मां मीना के आने पर सभी आरोपी मौके से भाग गए थे। जोगेंद्र ने राजेश को जान से मारने की धमकी भी दी थी।
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अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए तीन गवाहों की जांच की थी। शिकायतकर्ता राजेश और उसकी मां मीना दोनों ने अदालत में अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया। उन्हें शत्रुतापूर्ण गवाह घोषित किया गया। राजेश ने अदालत में कहा कि उसे कभी पीटा नहीं गया और उसने जोगेंद्र को धमकी देते या मारपीट करते नहीं देखा। मीना ने भी पुलिस को शिकायत देने से इन्कार किया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की पहचान स्थापित करने में पूरी तरह विफल रहा। जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल रामवीर के बयान के अलावा कोई अन्य पुष्टिकारक सबूत नहीं था। ऐसे में आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया। जोगेंद्र को 20,000 रुपये के जमानत बॉन्ड पर बरी किया गया।
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झज्जर। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विनीत कुमार की अदालत ने मारपीट और आपराधिक धमकी के एक मामले में आरोपी जोगेंद्र को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा। शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के अपने बयानों से मुकर जाने के कारण यह फैसला आया।
साल्हावास पुलिस थाने में 1 मार्च 2019 को एफआईआर दर्ज की गई थी। जोगेंद्र पर भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 325, 341 और 506 के तहत आरोप लगे थे। शिकायतकर्ता राजेश ने आरोप लगाया था कि 26 फरवरी 2019 की रात करीब साढ़े बारह बजे जोगेंद्र ने उसे रोका। जोगेंद्र कथित तौर पर शराब के नशे में था और उसके हाथ में लोहे की रॉड थी।
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राजेश के अनुसार, जोगेंद्र ने उसे रॉड से कमर, कंधे और पैरों पर मारा, जिससे वह गिर गया। इस दौरान दो अन्य व्यक्ति भी वहां आए और गाली-गलौज की। राजेश की मां मीना के आने पर सभी आरोपी मौके से भाग गए थे। जोगेंद्र ने राजेश को जान से मारने की धमकी भी दी थी।
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अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए तीन गवाहों की जांच की थी। शिकायतकर्ता राजेश और उसकी मां मीना दोनों ने अदालत में अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया। उन्हें शत्रुतापूर्ण गवाह घोषित किया गया। राजेश ने अदालत में कहा कि उसे कभी पीटा नहीं गया और उसने जोगेंद्र को धमकी देते या मारपीट करते नहीं देखा। मीना ने भी पुलिस को शिकायत देने से इन्कार किया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की पहचान स्थापित करने में पूरी तरह विफल रहा। जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल रामवीर के बयान के अलावा कोई अन्य पुष्टिकारक सबूत नहीं था। ऐसे में आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया। जोगेंद्र को 20,000 रुपये के जमानत बॉन्ड पर बरी किया गया।