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इस सर्जरी के बाद जरूर कराएं बायोप्सी

Sat, 12 Mar 2016 01:42 PM IST
लखनऊ, अमर उजाला/ब्यूरो
लखनऊ, अमर उजाला/ब्यूरो Updated Sat, 12 Mar 2016 01:42 PM IST
सार

  • 20वें सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी वीक में कई देशों से आए गैस्ट्रो-सर्जन और विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। 
  • कैंसर के 80 प्रतिशत मामलों में पित्ताशय में पथरी पाई जा रही है। 
  • पित्ताशय की सर्जरी के बाद बायोप्सी जरूर कराएं।
  • हर पेट दर्द में अजवायन का प्रयोग न करें।

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surgical gastroenterology week in sgpgi
कैंसर - फोटो : google

विस्तार

आजकल पथरी की वजह से पित्ताशय की सर्जरी सामान्य हो गई है। इसे लेप्रोस्कोपी के जरिए निकालकर उसी दिन मरीज को छुट्टी भी दे दी जाती है।

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लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती, चिकित्सकों को यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि कहीं मरीज को कैंसर तो नहीं है। 
आज 90 प्रतिशत मामलों में पित्ताशय के ऑपरेशन के बाद उसकी सर्जरी नहीं करवाई जा रही है।

जबकि कैंसर के 80 प्रतिशत मामलों में पित्ताशय में पथरी भी पाई जा रही है। इसलिए पित्ताशय की सर्जरी के बाद बायोप्सी जरूर कराएं, जिससे सभी तरह की शंकाओं का समाधान हो सके। 
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यह कहना है एसजीपीजीआई में 20वें सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी वीक  में आए विशेषज्ञों का। इस वीक में देश भर से आए गैस्ट्रो-सर्जन और विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। 
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तीन दिवसीय सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी वीक  के शुभारंभ के पहले दिन शुक्रवार को पित्त और अग्नाशय से संबंधित बीमारियों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। इनमें कैंसर सभी की प्रमुखता पर रहा। 

पित्ताशय में पथरी होने के 5 प्रतिशत मामले कैंसर में बदल रहे हैं। यानी हर 100 में से 5 लोगों में कैंसर हो रहा है। यह आंकड़ा छोटा नजर आता है, लेकिन जिस तरह से बड़ी आबादी में पथरी मिल रही है, उसी अनुपात में कैंसर भी बड़ी आबादी को प्रभावित कर रहा है।

600 रुपये में हो सकती है जांच

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कैंसर - फोटो : amarujala

एसजीपीजीआई के गेस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. रजनीश गुलाटी ने बताया कि इसके पीछे खुद मरीजों का इलाज में देर करना और विशेषज्ञों का पूरी जांच न करना बड़ी वजह है। 

उन्होंने बताया कि अल्ट्रासाउंड के दौरान ही गहनता से जांच की जाए तो कैंसर की संभावना पकड़ी जा सकती है, लेकिन केवल पथरी की पहचान करके अल्ट्रासाउंड पूरा कर लिया जा रहा है। इस लिए विशेषज्ञों द्वारा ही इसका अल्ट्रासाउंड करवाया जाए।

डॉ. रजनीश ने बताया कि सर्जरी के बाद पित्ताशय या उसमें से निकाली गई गांठ के बाद ही ऑपरेशन पूरा मान लिया जा रहा है। 90 प्रतिशत मामलों में कैंसर की संभावना का पता लगाने के लिए बायोप्सी जैसा आसान विकल्प भी नहीं अपनाया जा रहा है।

मात्र छह सौ रुपये में होने वाली इस जांच के जरिए पुष्टि की जा सकती है कि पथरी की वजह से पेट के किसी अंग में कैंसर तो नहीं हो गया।

सर्जरी के बाद पित्ताशय को अलग कर लेने के बावजूद कैंसर का खतरा खत्म नहीं हो जाता। अगर पित्ताशय में कैंसर था और बायोप्सी नहीं करवाई गई, तो कभी पता नहीं चल सकेगा कि मरीज पर क्या खतरा बना हुआ है। 

हर पेट दर्द में अनउपयोगी अजवायन 

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कैंसर - फोटो : amarujala

ऐसे मामलों में पित्ताशय निकाले जाने के बावजूद अन्य अंगों में कैंसर होने की संभावना बनी रहती है, वह कभी भी लौट कर आ सकता है और बाकी अंगों को अपनी चपेट में ले सकता है। 

बंगलूरू से आए गेस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. सादिक सिकोरा ने पित्ताशय को सर्जरी के दौरान निकालने पर जोर दिया। साथ ही बताया कि चिकित्सकों के पास आ रहे प्रत्येक हजार केसेस में 10 केसेस कैंसर के हैं। यह बताता है कि पथरी और कैंसर दोनों मिलकर बड़ी संख्या में मरीजों के लिए आफत बन चुके हैं।

विभागाध्यक्ष राजन सक्सेना ने बताया कि अक्सर माना जाता है कि अजवायन खाने से पेट दर्द होने ठीक हो जाएगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर पेट दर्द में ऐसे नुस्खे उपयोग किए जाते रहें। 

यह संकेत हो सकता है कि पित्ताशय में पथरी हो गई है, जिसका समय पर इलाज करवाना चाहिए। अक्सर लंबे समय के दौरान यह पथरी कैंसर की वजह बन जाती है। इसका असर दूसरे अंगों खासतौर से लिवर पर भी होता है। ऐसे में पेट दर्द होने पर अल्ट्रासाउंड करवाना जरूरी हो जाता है। 


 
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