{"_id":"5a9842954f1c1b692a8b4e4f","slug":"rock-phosphatee","type":"story","status":"publish","title_hn":"जनपद में जल्द शुरु हो सकता है रॉक फास्फेट का खनन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जनपद में जल्द शुरु हो सकता है रॉक फास्फेट का खनन
lalitpur
Updated Thu, 01 Mar 2018 11:42 PM IST
विज्ञापन
प्रशासन
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर।
खनिज संपदा से भरे जनपद में जल्द ही बड़े पैमाने पर एक बार फिर रॉक फास्फेट का खनन शुरू हो सकेगा। इसके लिए शासन और खनिज विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। भारत सरकार के भूतत्व और खनिकर्म निदेशालय द्वारा क्षेत्र में सर्वे का कार्य किया जाना है। क्षेत्र में सर्वे करने की अनुमति के लिए डीएम ने वन विभाग को पत्र भेजा है। वहीं, विगत दिनों से जनपद के ग्रामीण इलाकों में एक चार्टर प्लेन भी जमीन से चंद ऊंचाई पर उड़ता हुआ देखा जा रहा है, चर्चा है कि यह चार्टर प्लेन बैंगलोर की सर्वेयर कंपनी का है।
जनपद की मड़ावरा तहसील क्षेत्र में जनपद की बेशकीमती खनिज संपदा है। ग्राम सौंरई के पास स्थित ग्राम टोरी, पिसनारी व सेमरखेड़ा की जमीन के नीचे भारी मात्रा में रॉक फास्फेट है। वर्ष 1981 में राज्य खनिज निगम की संस्था यूपीएसएमडीसी द्वारा एक हजार हेक्टेयर में रॉक फास्फेट का खनन किया जाता था। यह पट्टा 20 वर्ष के लिए स्वीकृत था, जिसके चलते वर्ष 2001 में पट्टा निरस्त हो चुका था। इसके बाद राज्य खनिज विकास निगम ने इस रॉक फास्फेट की खदान के पट्टे का नवीनीकरण कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। इन 17 सालों में पट्टा नवीनीकरण और खनन को दोबारा शुरू कराने के लिए काफी प्रयास किए गए, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता। हाल ही में भारत सरकार ने दो माह पूर्व दिसंबर माह के अंत में इस नवीनीकरण के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया है। इसके बाद अब केंद्र सरकार ने मड़ावरा क्षेत्र के इन तीनों ग्रामों टोरी, पिसनारी व सेमरखेड़ा में खनिज की वास्तविक स्थिति का सर्वे कराने का निर्णय लिया है। सर्वे की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की नेशनल मिनरल एक्प्लोर्शन ट्रस्ट सर्वेयर कंपनी को सौंपी गई है। सर्वे के दौरान यहां पर ट्रंचिंग, पिटिंग, ड्रिलिंग आदि कार्य किए जाने है। यह क्षेत्र वन विभाग के अधीन आता है, इसलिए शासन के निर्देशन के क्रम में डीएम मानवेंद्र सिंह ने वन विभाग अधिकारी को पत्र भेजकर सर्वे की अनुमति मांगी है। यह अनुमति पत्र वन विभाग को विगत 24 जनवरी को भेजा गया था, एक माह से अधिक समय बीत गया है, लेकिन वन विभाग ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। रॉक फास्फेट का उपयोग सबसे ज्यादा खाद बनाने में किया जाता है। इसके साथ ही सौंदर्य प्रसाधन, जंग रोधी लेप बनाने में इसका उपयोग किया जाता है।
चार्टर प्लेन से हो रहा बुंदेलखंड की खनिज संपदा का सर्वे
जनपद के मड़ावरा व महरौनी समेत अन्य ग्रामीण इलाकों में विगत कुछ दिनों से एक चार्टर प्लेट जमीन से चंद ही ऊंचाई पर उड़ता हुआ देखा जा रहा है। इसको देखकर स्थानीय लोगों जनपदवासियों में तरह की चर्चाओं का दौर बना हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह चार्टर प्लेन बैंगलोर की जियोलॉजिकल ऑफ इंडिया सर्वेयर कंपनी का है। इस प्लेट में लैस सेंसर सैटेलाइट तकनीकी से खनिज संपदा का सर्वे किया जा रहा है। जनपद के अलावा जनपद से सटे हुए मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्रों टीकमगढ़, छतरपुरा आदि क्षेत्रों में भी सर्वे कर रहा है। यह प्लेन मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र सागर के निकट ढाना हवाई पट्टी से उड़ान भरकर बुंदेलखंड की खनिज संपदा का सर्वे कर रहा है। इस संबंध में जिला खनिज अधिकारी अरविंद कुमार से बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि यह जियोलॉजिकल ऑफ इंडिया कंपनी खनिज संपदा का सर्वे का काम करती है। विगत रोज उन्होंने भी एक प्लेन को तालबेहट क्षेत्र में देखा था। इस तरह के प्लेन का उपयोग जमीन के अंदर छिपी खनिज संपदा की का सर्वे करने के लिए किया जाता है। इससे इंजीनियर्स की टीम वाटर आर्वन सतह की फोटोग्राफी करते हैं और संसर के जरीए खनिज संपदा का अनुमान लगाया जा सकता है। वैसे भी बुंदेलखंड का यह क्षेत्र खनिज संपदा से भरा हुआ है। वहीं खनिज अधिकारी ने बताया कि इस चार्टर प्लेन से खनिज संपदा के सर्वे करने के बारे में कोई अनुपति व सूचना किसी कंपनी व शासन द्वारा नहीं दी गई है।
विज्ञापन
वन विभाग से मांगी अनुमति
शासन के निर्देशन के क्रम में डीएम ने रॉक फास्फेट की खदान के भौतिक सर्वे की अनुमति के लिए वन विभाग केे पत्र भेजा है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। सर्वे की जिम्मेदारी भारत सरकार की नेशनल मिनरल एक्प्लोर्शन ट्रस्ट सर्वेयर कांपनी को सौंपा गया है। शासन की गंभीरता को देखकर लगता है कि जल्द ही रॉक फास्फेट का खनन दोबारा शुरु हो सकेगा।
- अरविंद कुमार
जिला खनिज अधिकारी, ललितपुर।
अभी जानकारी नहीं है कि सर्वे की अनुमति या फिर पत्र का कोई जवाब प्रशासन को भेजा गया है।
- गोविंद शरण, डीएफओ, ललितपुर।
विज्ञापन
खनिज संपदा से भरे जनपद में जल्द ही बड़े पैमाने पर एक बार फिर रॉक फास्फेट का खनन शुरू हो सकेगा। इसके लिए शासन और खनिज विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। भारत सरकार के भूतत्व और खनिकर्म निदेशालय द्वारा क्षेत्र में सर्वे का कार्य किया जाना है। क्षेत्र में सर्वे करने की अनुमति के लिए डीएम ने वन विभाग को पत्र भेजा है। वहीं, विगत दिनों से जनपद के ग्रामीण इलाकों में एक चार्टर प्लेन भी जमीन से चंद ऊंचाई पर उड़ता हुआ देखा जा रहा है, चर्चा है कि यह चार्टर प्लेन बैंगलोर की सर्वेयर कंपनी का है।
जनपद की मड़ावरा तहसील क्षेत्र में जनपद की बेशकीमती खनिज संपदा है। ग्राम सौंरई के पास स्थित ग्राम टोरी, पिसनारी व सेमरखेड़ा की जमीन के नीचे भारी मात्रा में रॉक फास्फेट है। वर्ष 1981 में राज्य खनिज निगम की संस्था यूपीएसएमडीसी द्वारा एक हजार हेक्टेयर में रॉक फास्फेट का खनन किया जाता था। यह पट्टा 20 वर्ष के लिए स्वीकृत था, जिसके चलते वर्ष 2001 में पट्टा निरस्त हो चुका था। इसके बाद राज्य खनिज विकास निगम ने इस रॉक फास्फेट की खदान के पट्टे का नवीनीकरण कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। इन 17 सालों में पट्टा नवीनीकरण और खनन को दोबारा शुरू कराने के लिए काफी प्रयास किए गए, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता। हाल ही में भारत सरकार ने दो माह पूर्व दिसंबर माह के अंत में इस नवीनीकरण के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया है। इसके बाद अब केंद्र सरकार ने मड़ावरा क्षेत्र के इन तीनों ग्रामों टोरी, पिसनारी व सेमरखेड़ा में खनिज की वास्तविक स्थिति का सर्वे कराने का निर्णय लिया है। सर्वे की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की नेशनल मिनरल एक्प्लोर्शन ट्रस्ट सर्वेयर कंपनी को सौंपी गई है। सर्वे के दौरान यहां पर ट्रंचिंग, पिटिंग, ड्रिलिंग आदि कार्य किए जाने है। यह क्षेत्र वन विभाग के अधीन आता है, इसलिए शासन के निर्देशन के क्रम में डीएम मानवेंद्र सिंह ने वन विभाग अधिकारी को पत्र भेजकर सर्वे की अनुमति मांगी है। यह अनुमति पत्र वन विभाग को विगत 24 जनवरी को भेजा गया था, एक माह से अधिक समय बीत गया है, लेकिन वन विभाग ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। रॉक फास्फेट का उपयोग सबसे ज्यादा खाद बनाने में किया जाता है। इसके साथ ही सौंदर्य प्रसाधन, जंग रोधी लेप बनाने में इसका उपयोग किया जाता है।
विज्ञापन
चार्टर प्लेन से हो रहा बुंदेलखंड की खनिज संपदा का सर्वे
जनपद के मड़ावरा व महरौनी समेत अन्य ग्रामीण इलाकों में विगत कुछ दिनों से एक चार्टर प्लेट जमीन से चंद ही ऊंचाई पर उड़ता हुआ देखा जा रहा है। इसको देखकर स्थानीय लोगों जनपदवासियों में तरह की चर्चाओं का दौर बना हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह चार्टर प्लेन बैंगलोर की जियोलॉजिकल ऑफ इंडिया सर्वेयर कंपनी का है। इस प्लेट में लैस सेंसर सैटेलाइट तकनीकी से खनिज संपदा का सर्वे किया जा रहा है। जनपद के अलावा जनपद से सटे हुए मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्रों टीकमगढ़, छतरपुरा आदि क्षेत्रों में भी सर्वे कर रहा है। यह प्लेन मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र सागर के निकट ढाना हवाई पट्टी से उड़ान भरकर बुंदेलखंड की खनिज संपदा का सर्वे कर रहा है। इस संबंध में जिला खनिज अधिकारी अरविंद कुमार से बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि यह जियोलॉजिकल ऑफ इंडिया कंपनी खनिज संपदा का सर्वे का काम करती है। विगत रोज उन्होंने भी एक प्लेन को तालबेहट क्षेत्र में देखा था। इस तरह के प्लेन का उपयोग जमीन के अंदर छिपी खनिज संपदा की का सर्वे करने के लिए किया जाता है। इससे इंजीनियर्स की टीम वाटर आर्वन सतह की फोटोग्राफी करते हैं और संसर के जरीए खनिज संपदा का अनुमान लगाया जा सकता है। वैसे भी बुंदेलखंड का यह क्षेत्र खनिज संपदा से भरा हुआ है। वहीं खनिज अधिकारी ने बताया कि इस चार्टर प्लेन से खनिज संपदा के सर्वे करने के बारे में कोई अनुपति व सूचना किसी कंपनी व शासन द्वारा नहीं दी गई है।
विज्ञापन
वन विभाग से मांगी अनुमति
शासन के निर्देशन के क्रम में डीएम ने रॉक फास्फेट की खदान के भौतिक सर्वे की अनुमति के लिए वन विभाग केे पत्र भेजा है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। सर्वे की जिम्मेदारी भारत सरकार की नेशनल मिनरल एक्प्लोर्शन ट्रस्ट सर्वेयर कांपनी को सौंपा गया है। शासन की गंभीरता को देखकर लगता है कि जल्द ही रॉक फास्फेट का खनन दोबारा शुरु हो सकेगा।
- अरविंद कुमार
जिला खनिज अधिकारी, ललितपुर।
अभी जानकारी नहीं है कि सर्वे की अनुमति या फिर पत्र का कोई जवाब प्रशासन को भेजा गया है।
- गोविंद शरण, डीएफओ, ललितपुर।