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लॉकडाउन के चलते पॉटरी उद्योग को लगा करोड़ों का फटका

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2020 01:07 AM IST
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Pottery industry hit crores due to lockdown
खुर्जा। लॉकडाउन के चलते पॉटरी उद्योग को करोड़ों का फटका लगा है। उद्योगों के बंद रहने पिछले दो माह में पॉटरी उद्योग को ३ हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। वहीं गोदामों में रखा करोड़ों रुपये का कच्चा और पक्का माल भी खराब हो गया। शासन के निर्देश के बाद भी तमाम समस्याओं के चलते अभी भी सिर्फ ३० प्रतिशत फैक्ट्रियां चालू हो पाई हैं। ऐसे में पॉटरी उद्योग की गति काफी धीमी है। पॉटरी उद्यमियों की मानें तो पटरी पर आने में पांच से छ माह का समय लग जाएगा। नगर में करीब पॉटरी की करीब ४०० इकाइयां हैं। इन इकाइयों से देश ही नहीं विदेशों तक माल भेजा जाता है। जिसका सालाना टर्न ओवर करीब १५ हजार करोड़ रुपये का है। कोरोना महामारी के चलते २४ मार्च को देश में लॉकडाउन घोषित होने के बाद से फैक्ट्र्यिां बंद हो गईं। लॉकडाउन ०.३ समाप्त होने के बाद मई माह में शासन ने फैक्ट्रियों को चालू करने के निर्देश जारी किए थे। लेकिन ऑर्डर न मिलने, कच्चा माल न आ पाने, लेबर आदि की समस्या के चलते करीब ७० प्रतिशत फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं। खराब हो रहे गोदाम में पड़े कच्चे-पक्के माल अचानक लॉकडाउन होने के कारण पहले के ऑडर पर बने सिरेमिक गोदाम में पड़े ब्रेकेज हो गए। वहीं पक्के माल तैयार न होने के कारण रॉ मैटेरियल भी बेकार हो गए। पॉटरी उद्यमी दर्शन छतवाल ने बताया कि तैयार माल और रॉ मैटेरियल के खराब होने से करीब १०० करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बड़े शहरों से नहीं आ पा रहा आर्डर पॉटरी उद्यमी दर्शन छतवाल ने बताया कि दिल्ली, मुंबई, इंदौर, चेन्नई, पूना आदि बड़े शहरों में ट्रेडिंग हब है। लेकिन शहरों में ज्यादातर स्थान हॉटस्पॉट होने के कारण होल सेल मार्किट बंद पड़े हैं। ऐसे में मॉल का आर्डर नहीं आ पा रहा है। इसके चलते थोड़े-बहुत माल ही पॉटरी इकाइयों में तैयार किए जा रहे हैं। इससे पॉटरी उद्यमियों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। पॉटरी पर आने में लगेगा का समय केपीएमए के सचिव निखिल पोद्दार का कहना है कि पॉटरी उद्योग पहले से ही मार झेल रहा था। कोरोना महामारी ने स्थिति और भी गंंभीर कर दी है। उद्योगों महामारी के चलते बाजार को भी खड़ा होने में काफी समय लगेगा। उद्योगों के सामने कच्चा माल, मजदूर आदि की समस्याएं खड़ी हैं। ऐसे में पॉटरी उद्योग को पटरी पर आने में काफी समय लगेगा।
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