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मासूमों की जान से खिलवाड़, अफसर अंजान

Tue, 30 Aug 2016 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर Updated Tue, 30 Aug 2016 12:37 AM IST
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Playing with the lives of innocent, ignorant officers
ई रिक्शा और वैन में ढोए जाते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
 शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रहे कई निजी स्कूलों में बच्चों को ई रिक्शा, आटो, रिक्शा से पहुंचाया जा रहा है। वाहनों में मासूमों को बैगों के साथ ठूंसकर बैठाया जाता है। जगह कम होने की वजह से बच्चे बेहद असहज माहौल में स्कूल आते-जाते हैं। किसी बच्चे का हाथ तो किसी बच्चे का पैर वाहन से बाहर लटका होता है।
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आलम यह है कि ई रिक्शा खुद तो अवैध हैं और उनके चालक क्षमता से अधिक बच्चों को वाहन में ठूंसकर टूटी फूटी सड़कों से हिचकोले खाते बच्चों को घर लाने और ले जाने की जिम्मेदारी संभाले हैं। दिलचस्प बात है कि जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ देखकर भी अंजान बनकर किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
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दरअसल क्षेत्र के कई प्राइवेट स्कूलों ने तो बच्चों के लिए स्कूल बसें लगवा रखी हैं। हालांकि बसों में भी परिवहन विभाग के पूरे नियमों का पालन नहीं होता है। इनसे इतर गली- मोहल्लों में खुले कईं स्कूल अभिभावकों से तो बस फीस ले रहे हैं, लेकिन पैसे बचाने के चक्कर में बच्चों को ई रिक्शा, वैन और आटो से घर भेजा जा रहा है। इन वाहनों में बैठने वाले मासूमों की सुरक्षा का कोई इंतजाम होता है।
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सुबह स्कूल खुलने और दोपहर स्कूल बंद होने के दौरान इन वाहनों में ठूंसकर बिठाए बच्चों का नजारा आम होता है। सड़क पर दौड़ने वाली ये गाड़ियां पुलिस, परिवहन के साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों की आंखों के सामने से गुजरती हैं, मगर अभी तक ऐसे वाहनों पर कार्यवाही अमल पर नहीं लाई जा सकी है।


एआरटीओ प्रवर्तन पूजा नयाल कहती है कि नियमानुसार ई रिक्शा और आटो तो स्कूली बच्चों को नहीं ढो सकते हैं। स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाली बसों में भी दो दरवाजे होने चाहिए। कई बार जब आटो या वैन को स्कूली बच्चों को ढोते हुए पकड़ा जाता है तो स्कूल वाले वाहन उनकी ओर से लगाए जाने से ही मुकर जाते हैं।

वे ऐसे वाहनों को बच्चों के अभिभावकों की ओर से भेजे होने की बात कहकर पल्ला झाड़ देते हैं। बच्चों की जान से खिलवाड़ करने वाले वाहनों को सीज करने के साथ ही संबंधित चालक के खिलाफ कड़ी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

अभिभावक बेहतर भविष्य के लिए जिगर के टुकड़ों को स्कूल तो भेजते हैं, मगर उनकी सुरक्षा को लेकर लापरवाह रहते हैं। यही कारण है कि बच्चे वैन, ई रिक्शा, आटो में ठूंसकर घर स्कूल से घर लाए और पहुंचाए जाते हैं, मगर अभिभावक ऐसे हालात में बच्चों को रखने पर टोकाटाकी नहीं करते हैं। बीते 8 अगस्त को ग्राम बांसखेड़ा के पास बच्चों को स्कूल ला रहे विक्रम तालाब में पलट गया था। हादसे में आधा दर्जन छात्र चोटिल हुए थे। वाहन में करीब दो दर्जन से अधिक बच्चे सवार थे।



एएसपी कमलेश उपाध्याय ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखे बिना अगर उन्हें किसी भी वाहन में ठूंसकर ले जाया जा रहा है तो यह बहुत गलत है। ऐसे वाहनों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। अभिभावकों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति सचेत रहे। ऐसे वाहनों में बच्चों को कतई स्कूल न भेजें, जिसमें सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है।

ये हैं स्कूल वाहन के नियम
- वाहन पीला रंग का होने के साथ ही खिड़कियों में जाली लगी होनी चाहिए
- आरामदेय सीटें और सीटों के नीचे बच्चों के स्कूल बैग, किताबें रखने की व्यवस्था हो
- बस में दो इमरजेंसी गेट की व्यवस्था हो। आराम से बैठने की दृष्टि से सीट की ऊंचाई सामान्य सीट से थोड़ी नीची हो
- चालक की सीट के पास स्पीड एलार्म की व्यवस्था होनी चाहिए
- परमिट पर वाहन स्वामी कम से से कम 5 साल पुराने लाइसेंस धारक को ही वाहन चलाने को रखेगा।  
- मैदानी क्षेत्र में संचालित होने वाली स्कूल बस की आयु सीमा 15 साल है।
 
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