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रेणुकूट के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष पर रासुका के खिलाफ याचिका खारिज
Thu, 14 Jan 2021 07:08 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 14 Jan 2021 07:08 PM IST
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अदालत
- फोटो : file
नगर पंचायत रेणुकूट के पूर्व अध्यक्ष अनिल सिंह पर रासुका लगाए जाने के खिलाफ याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। पूर्व अध्यक्ष पर निर्वाचित अध्यक्ष शिव प्रताप सिंह की कार्यालय के भीतर हुई हत्या का षड्यंत्र रचने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि इस हत्याकांड से न सिर्फ कानून व्यववस्था बल्कि लोक शांति भी भंग हुई। बाजार बंद हो गए,चारो तरफ अफरा तफरी फैल गई, हफ्तों तक बच्चे स्कूल नहीं जा सके और शहरी जीवन पंगु हो गया।
याची अनिल सिंह तीन अक्तूबर 2019 से जेल मे बंद है। जहां जिलाधिकारी सोनभद्र ने रासुका तामील की। न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ ने अनिल सिंह की बंदीप्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला दिया है।
नगर पंचायत अध्यक्ष शिव प्रताप सिंह अपने कार्यालय में जन शिकायतें सुन रहे थे।तभी दो मोटर साइकिल सवार आए और उनको नमस्कार करने के बाद ताबडतोड़ फायर कर भाग गए। इस हमले में शिवप्रताप की मौत हो गई। घटना की एफआईआर पिपरी थाने में हत्या व षडयंत्र के आरोप में दर्ज करायी गई।
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विवेचना के दौरान यह साक्ष्य आया कि भाड़े के शूटरों से हत्या करवाई गई थी। शूटर सात सितंबर से नौ सितंबर 19 तक एक होटल में ठहरे थे।फिर 29 सितंबर को दुबारा आए।एक गेस्ट हाउस में ठहरे। इस दौरान शूटर याची के भाई ब्रजेश सिंह और जमुना सिंह के लगातार संपर्क में थे।
सीसीटी वी फुटेज में ब्रजेश व उनके ड्राइवर को देखा गया। याची का आपराधिक इतिहास है। इस घटना से चुने हुए अध्यक्ष की कार्यालय में हत्या से राज्य व्यवस्था को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने इस घटना को कानून व्यवस्था का मामला न मानते हुए कहा कि यह लोक व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने वाली घटना है और हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
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याची अनिल सिंह तीन अक्तूबर 2019 से जेल मे बंद है। जहां जिलाधिकारी सोनभद्र ने रासुका तामील की। न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ ने अनिल सिंह की बंदीप्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला दिया है।
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नगर पंचायत अध्यक्ष शिव प्रताप सिंह अपने कार्यालय में जन शिकायतें सुन रहे थे।तभी दो मोटर साइकिल सवार आए और उनको नमस्कार करने के बाद ताबडतोड़ फायर कर भाग गए। इस हमले में शिवप्रताप की मौत हो गई। घटना की एफआईआर पिपरी थाने में हत्या व षडयंत्र के आरोप में दर्ज करायी गई।
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विवेचना के दौरान यह साक्ष्य आया कि भाड़े के शूटरों से हत्या करवाई गई थी। शूटर सात सितंबर से नौ सितंबर 19 तक एक होटल में ठहरे थे।फिर 29 सितंबर को दुबारा आए।एक गेस्ट हाउस में ठहरे। इस दौरान शूटर याची के भाई ब्रजेश सिंह और जमुना सिंह के लगातार संपर्क में थे।
सीसीटी वी फुटेज में ब्रजेश व उनके ड्राइवर को देखा गया। याची का आपराधिक इतिहास है। इस घटना से चुने हुए अध्यक्ष की कार्यालय में हत्या से राज्य व्यवस्था को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने इस घटना को कानून व्यवस्था का मामला न मानते हुए कहा कि यह लोक व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने वाली घटना है और हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।