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ओवरब्रिज क्षतिग्रस्त होने से घाटमपुर में जाम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jun 2016 02:08 AM IST
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कानपुर-सागर राजमार्ग पर स्थित शंभुआ रेलवे क्रासिंग पर बने ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त हो जाने से उसका सीधा असर घाटमपुर कसबे में पड़ा है। हजारों की संख्या में गिट्टी और मौरंग ढोने वाले ट्रकों की भीड़ से कसबे में जाम की समस्या है। वहीं, हमीरपुर रोड पर भी यही हाल है।
सोमवार को शंभुआ गांव के पास लेकर पतारा क्षेत्र के धरमपुर बंबा तक ट्रकों और वाहनों की कई किलोमीटर लंबी लाइन लगी रही।दो दिन पहले शंभुआ क्रासिंग का रेलवे ओवरब्रिज का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद पुल पर वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है, जिसके चलते सभी वाहन पुल के बगल में बने निचले रास्ते से निकाले जा रहे हैं। सिंगल रोड होने के चलते वाहनों की एक-एक कतार निकलवाई जा रही है।
इधर, कानपुर-सागर राजमार्ग पर चलने वाले वाहनों के अलावा हजारों की संख्या में मौरंग-गिट्टी ढोने वाले ट्रकों की भीड़ बनी रहती है। मौरंग-गिट्टी लादकर चलने वाले ट्रक और डंपर निर्धारित से दो गुना तक माल लादकर निकल रहे हैं, जिससे रोड क्षतिग्रस्त होने के साथ ही पुलिया और पुलों के भी टूटने का खतरा हर समय बना रहता है।
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मालूम हो कि ट्रक और डंपर में अधिकतम 40 टन माल ढोने का परमिट है। लेकिन, रोड पर चलने वाले यह वाहन 60 से लेकर 80 टन तक माल ढो रहे हैं। अधिक भार के चलते ही शंभुआ रेलवे क्रासिंग का ओवरब्रिज बनने के बाद से लगातार तीसरी बार क्षतिग्रस्त हुआ है। लोगों ने बताया कि इसी तरह हमीरपुर जिले की सीमा पर स्थित यमुना नदी का पुल भी ओवरलोड के चलते अक्सर क्षतिग्रस्त होता रहता है।
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सोमवार को शंभुआ गांव के पास लेकर पतारा क्षेत्र के धरमपुर बंबा तक ट्रकों और वाहनों की कई किलोमीटर लंबी लाइन लगी रही।दो दिन पहले शंभुआ क्रासिंग का रेलवे ओवरब्रिज का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद पुल पर वाहनों का आवागमन रोक दिया गया है, जिसके चलते सभी वाहन पुल के बगल में बने निचले रास्ते से निकाले जा रहे हैं। सिंगल रोड होने के चलते वाहनों की एक-एक कतार निकलवाई जा रही है।
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इधर, कानपुर-सागर राजमार्ग पर चलने वाले वाहनों के अलावा हजारों की संख्या में मौरंग-गिट्टी ढोने वाले ट्रकों की भीड़ बनी रहती है। मौरंग-गिट्टी लादकर चलने वाले ट्रक और डंपर निर्धारित से दो गुना तक माल लादकर निकल रहे हैं, जिससे रोड क्षतिग्रस्त होने के साथ ही पुलिया और पुलों के भी टूटने का खतरा हर समय बना रहता है।
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मालूम हो कि ट्रक और डंपर में अधिकतम 40 टन माल ढोने का परमिट है। लेकिन, रोड पर चलने वाले यह वाहन 60 से लेकर 80 टन तक माल ढो रहे हैं। अधिक भार के चलते ही शंभुआ रेलवे क्रासिंग का ओवरब्रिज बनने के बाद से लगातार तीसरी बार क्षतिग्रस्त हुआ है। लोगों ने बताया कि इसी तरह हमीरपुर जिले की सीमा पर स्थित यमुना नदी का पुल भी ओवरलोड के चलते अक्सर क्षतिग्रस्त होता रहता है।