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रोहिंग्या समुदाय पर अत्याचार के विरुद्ध ज्ञापन
mau news
Updated Tue, 12 Sep 2017 12:26 AM IST
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मऊ। जमीअत ए उलमा मऊ का एक प्रतिनिधि मंडल सोमवार को जिला अध्यक्ष मौलाना अब्दुल हई के नेतृत्व में जिलाधिकारी ऋषिरेंद्र से कार्यालय पहुुंचकर मिला। इस दौरान प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन डीएम को सौंपा। डीएम को सौंपे गए इस पांच सूत्री ज्ञापन में बर्मा के म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के अल्पसंख्यक मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार और नस्लकुशी पर लगाम लगाने की मांग किया गया है।
जिला अध्यक्ष मौलाना अब्दुल हई ने बताया कि डीएम के माध्यम से इस ज्ञापन को केंद्र सरकार को भेजा गया है। इसमें म्यांमार में मुसलमानों पर हो रहें अत्याचार की निंदा भारत सरकार द्वारा की जाए। साथ ही म्यांमार के राजदूत को बुलाकर उसकी सरकार को कानून की बालादस्ती कायम रखने के लिए कहा जाय। म्यांमार के मुसलमानों पर जो अत्याचार नरसंहार हो रहा है वह ने केवल मानवता के विरूद्ध है बल्कि सरकारी आतंकवाद के दायरे में आता है इस लिए म्यांमार के राजदूत को तलब करके रोहन्गिया के मुसलमानों के नरसंहार पर जवाब तलब किया जाय। भारत सरकार अपने प्रभाव का प्रयोग करते हुए म्यांमार सरकार पर दबाव बनाए। ताकि वहां की सेना द्वारा रोहन्गिया मुसलमानों की नस्लकुशी का जो घिनौना खेल खेल रही है, बंद हो। म्यांमार की स्थिति सामान्य होने तक रोहन्गिया के मुसलमानों को भारत में रखा जाए। स्थिति समान्य होने पर उन्हें संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में ही वापस भेजा जाय। नगर अध्यक्ष मौलाना अब्दुल अलीम नदवी ने कहा कि संसार के अधिकांश देश, संयुक्त राष्ट्र तथा मानवाधिकार संगठनों ने इस नरसंहार की कड़े शब्दों में निंदा किया है। मौलाना इफ्तेखार अहमद मिफ्ताही ने कहा कि भारत की पूरानी संस्कृति भी यही रही है कि यहां की जनता एवं सरकार ने सोैव अत्याचार नरसंहार के विरूद्ध शोषित एवं पीड़ितों के पक्ष में आवाज बुलंद की है। ज्ञापन सौंपने के दौरान मौलाना नजीर अहमद, मौलाना अब्दुल अलीम नदवी, मौलाना फैयाज अहमद, मौलाना कमाल अख्तर, मौलाना मरगूबुल हक, अबू बकर अंसारी, नौशाद अंसारी, मकसूद अहमद, इस्लामुददीन आजमी, मौलाना अरशद जमाल, मुम्ताज मजहरी, मौलाना अनवर रशीद, मोहम्मद अबूजर, मोहम्मद शाबान, राजू आदि उपस्थित रहे।
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जिला अध्यक्ष मौलाना अब्दुल हई ने बताया कि डीएम के माध्यम से इस ज्ञापन को केंद्र सरकार को भेजा गया है। इसमें म्यांमार में मुसलमानों पर हो रहें अत्याचार की निंदा भारत सरकार द्वारा की जाए। साथ ही म्यांमार के राजदूत को बुलाकर उसकी सरकार को कानून की बालादस्ती कायम रखने के लिए कहा जाय। म्यांमार के मुसलमानों पर जो अत्याचार नरसंहार हो रहा है वह ने केवल मानवता के विरूद्ध है बल्कि सरकारी आतंकवाद के दायरे में आता है इस लिए म्यांमार के राजदूत को तलब करके रोहन्गिया के मुसलमानों के नरसंहार पर जवाब तलब किया जाय। भारत सरकार अपने प्रभाव का प्रयोग करते हुए म्यांमार सरकार पर दबाव बनाए। ताकि वहां की सेना द्वारा रोहन्गिया मुसलमानों की नस्लकुशी का जो घिनौना खेल खेल रही है, बंद हो। म्यांमार की स्थिति सामान्य होने तक रोहन्गिया के मुसलमानों को भारत में रखा जाए। स्थिति समान्य होने पर उन्हें संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में ही वापस भेजा जाय। नगर अध्यक्ष मौलाना अब्दुल अलीम नदवी ने कहा कि संसार के अधिकांश देश, संयुक्त राष्ट्र तथा मानवाधिकार संगठनों ने इस नरसंहार की कड़े शब्दों में निंदा किया है। मौलाना इफ्तेखार अहमद मिफ्ताही ने कहा कि भारत की पूरानी संस्कृति भी यही रही है कि यहां की जनता एवं सरकार ने सोैव अत्याचार नरसंहार के विरूद्ध शोषित एवं पीड़ितों के पक्ष में आवाज बुलंद की है। ज्ञापन सौंपने के दौरान मौलाना नजीर अहमद, मौलाना अब्दुल अलीम नदवी, मौलाना फैयाज अहमद, मौलाना कमाल अख्तर, मौलाना मरगूबुल हक, अबू बकर अंसारी, नौशाद अंसारी, मकसूद अहमद, इस्लामुददीन आजमी, मौलाना अरशद जमाल, मुम्ताज मजहरी, मौलाना अनवर रशीद, मोहम्मद अबूजर, मोहम्मद शाबान, राजू आदि उपस्थित रहे।
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