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सरकारी स्कूलों में बेंचों की कमी, विद्यार्थी दरी पर बैठकर पढ़ाई को मजबूर
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30jjrp09- शहर के सरकारी स्कूल के हॉल में पडे़ बैंच व अन्य फर्नीचर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। जिले के तीन ब्लॉकों के सरकारी स्कूलों में बेंचों की कमी है। सबसे अधिक कमी प्राइमरी स्कूलों में देखी जा रही है, जिससे विद्यार्थियों को दरी पर बैठकर पढ़ना पड़ता है। इस अव्यवस्था के कारण बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने तीन ब्लॉक के लिए 2500 डेस्क की मांग मुख्यालय से की है। अधिकारियों को उम्मीद है कि सितंबर-अक्तूबर तक सरकारी स्कूलों में बेंचों की यह कमी पूरी हो जाएगी। सरकारी स्कूलों में सुविधाओं के दावे किए जाते हैं लेकिन कई प्राइमरी स्कूलों में अब तक बेंच उपलब्ध नहीं हैं।
बच्चों को सर्दी, गर्मी और बरसात के समय भी दरियों पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। साल्हावास ब्लॉक को छोड़कर जिले के बाकी तीनों ब्लॉकों में डेस्क की कमी है। पिछले दिनों स्कूल स्तर पर एमआईएस पोर्टल पर डेस्क की जरूरत के अनुसार मांग डालने को कहा गया था। स्कूल मुखियाओं ने अपनी-अपनी जरूरत के हिसाब से डेस्क की मांग भेजी थी।
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बेंचों की कमी के कारण विद्यार्थियों को जमीन पर दरी या टाट-पट्टी बिछाकर पढ़ना पड़ता है। कड़ाके की सर्दी हो या गर्मी, बच्चों को इस असुविधा का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति उनकी शिक्षा की गुणवत्ता और स्वास्थ्य दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। कई स्कूलों में बेंचों के साथ-साथ कमरों की भी भारी कमी बताई गई है।
जिला शिक्षा अधिकारी रतींद्र सिंह ने बताया कि स्कूलों से मांग प्राप्त हो चुकी है। लगभग 2500 बेंचों की आवश्यकता है, जिसकी पूर्ति अक्तूबर तक होने की उम्मीद है।
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झज्जर। जिले के तीन ब्लॉकों के सरकारी स्कूलों में बेंचों की कमी है। सबसे अधिक कमी प्राइमरी स्कूलों में देखी जा रही है, जिससे विद्यार्थियों को दरी पर बैठकर पढ़ना पड़ता है। इस अव्यवस्था के कारण बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने तीन ब्लॉक के लिए 2500 डेस्क की मांग मुख्यालय से की है। अधिकारियों को उम्मीद है कि सितंबर-अक्तूबर तक सरकारी स्कूलों में बेंचों की यह कमी पूरी हो जाएगी। सरकारी स्कूलों में सुविधाओं के दावे किए जाते हैं लेकिन कई प्राइमरी स्कूलों में अब तक बेंच उपलब्ध नहीं हैं।
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बच्चों को सर्दी, गर्मी और बरसात के समय भी दरियों पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। साल्हावास ब्लॉक को छोड़कर जिले के बाकी तीनों ब्लॉकों में डेस्क की कमी है। पिछले दिनों स्कूल स्तर पर एमआईएस पोर्टल पर डेस्क की जरूरत के अनुसार मांग डालने को कहा गया था। स्कूल मुखियाओं ने अपनी-अपनी जरूरत के हिसाब से डेस्क की मांग भेजी थी।
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बेंचों की कमी के कारण विद्यार्थियों को जमीन पर दरी या टाट-पट्टी बिछाकर पढ़ना पड़ता है। कड़ाके की सर्दी हो या गर्मी, बच्चों को इस असुविधा का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति उनकी शिक्षा की गुणवत्ता और स्वास्थ्य दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। कई स्कूलों में बेंचों के साथ-साथ कमरों की भी भारी कमी बताई गई है।
जिला शिक्षा अधिकारी रतींद्र सिंह ने बताया कि स्कूलों से मांग प्राप्त हो चुकी है। लगभग 2500 बेंचों की आवश्यकता है, जिसकी पूर्ति अक्तूबर तक होने की उम्मीद है।