{"_id":"590249df4f1c1baf2bc0d1eb","slug":"increased-drinking-water-crisis-in-villages","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांवों में भी बढ़ा पेयजल संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांवों में भी बढ़ा पेयजल संकट
bhadohi hindi news
Updated Fri, 28 Apr 2017 01:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गर्मी की तल्खी बढ़ने के साथ ही भदोही जिले में कई स्थानों पर पेयजल किल्लत गहराने लगी है। समर्सिबल पंपों पर तेजी से बढ़ती निर्भरता के बावजूद अब भी हैंडपंपों के सहारे प्यास बुझा रही 50 फीसदी से अधिक आबादी का एक बड़ा हिस्सा पीने के पानी के लिए जलालत झेल रहा है। लापरवाही के चलते एक ही हैंडपंप पर बस्ती के कई परिवारों की हलक तर करने का भार हो गया है। ऐसे में सुबह-शाम हैंडपंपों अथवा समर्सिबल पंप पर पानी के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है।
जिले के ज्यादातर गांवों में औसतन चार से पांच हैंडपंप खराब हालत में हैं। ऐसे में जिन गांवों में निजी समर्सिबल पंप नहीं हैं, वहां ठीक-ठाक हालत में चल रहे इक्का-दुक्का हैंडपंपों पर पानी के लिए किचकिच शुरू हो गई है। ज्ञानपुर क्षेत्र के चकमनीराय गांव में कई परिवारों को पीने के पानी के लिए एक हैंडपंप पर ही आश्रित होना पड़ रहा है। ऐसे में वहां लोगों की भीड़ अक्सर लग जाती है। इसी तरह आसपास के गांवों में भी गर्मी में पानी की किल्लत सिर उठाने लगी है। चौरी संवाददाता के मुताबिक क्षेत्र के ज्यादातर गांवों में दो-चार हैंडपंप या तो खराब हो गए हैं या गंदा पानी उगल रहे हैं। ऐसे में गांवों की कई बस्तियों की पेयजल की जरूरत को निजी समर्सिबल पंप पूरी कर रहे हैं। ऐसे में जिनके यहां समर्सिबल पंप लगे हैं, वहां सुबह-शाम पानी के लिए भारी भीड़ लग रही है। ऐसे हालात में बिजली न रहने पर मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। क्षेत्र के वेदमनपुर, कोल्हण, चौरीखास, बरदहां, जद्दूपुर, बसफटियां, हरिचंदनपुर, रमईपुर, गोहिलांव, अर्जुनपुर आदि गांवों में हैंडपंपों के खराब रहने से लोगों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गोहिलांव के राजकुमार यादव, संवरपुर के बबलू मिश्रा, वेदमनपुर के आशीष दुबे ने कहा कि रिबोर लायक हैंडपंपों को ठीक कराने की दिशा में जिम्मेदार लोग सोच नहीं रहे हैं। इससे लोग पानी के लिए परेशान हैं।
उल्लेखनीय है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 1900 से अधिक हैंडपंप खराब पड़े हैं। वे रिबोर लायक हो गए हैं। इससे पानी की दिक्कत मुंह चिढ़ाने लगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले के ज्यादातर गांवों में औसतन चार से पांच हैंडपंप खराब हालत में हैं। ऐसे में जिन गांवों में निजी समर्सिबल पंप नहीं हैं, वहां ठीक-ठाक हालत में चल रहे इक्का-दुक्का हैंडपंपों पर पानी के लिए किचकिच शुरू हो गई है। ज्ञानपुर क्षेत्र के चकमनीराय गांव में कई परिवारों को पीने के पानी के लिए एक हैंडपंप पर ही आश्रित होना पड़ रहा है। ऐसे में वहां लोगों की भीड़ अक्सर लग जाती है। इसी तरह आसपास के गांवों में भी गर्मी में पानी की किल्लत सिर उठाने लगी है। चौरी संवाददाता के मुताबिक क्षेत्र के ज्यादातर गांवों में दो-चार हैंडपंप या तो खराब हो गए हैं या गंदा पानी उगल रहे हैं। ऐसे में गांवों की कई बस्तियों की पेयजल की जरूरत को निजी समर्सिबल पंप पूरी कर रहे हैं। ऐसे में जिनके यहां समर्सिबल पंप लगे हैं, वहां सुबह-शाम पानी के लिए भारी भीड़ लग रही है। ऐसे हालात में बिजली न रहने पर मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। क्षेत्र के वेदमनपुर, कोल्हण, चौरीखास, बरदहां, जद्दूपुर, बसफटियां, हरिचंदनपुर, रमईपुर, गोहिलांव, अर्जुनपुर आदि गांवों में हैंडपंपों के खराब रहने से लोगों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गोहिलांव के राजकुमार यादव, संवरपुर के बबलू मिश्रा, वेदमनपुर के आशीष दुबे ने कहा कि रिबोर लायक हैंडपंपों को ठीक कराने की दिशा में जिम्मेदार लोग सोच नहीं रहे हैं। इससे लोग पानी के लिए परेशान हैं।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 1900 से अधिक हैंडपंप खराब पड़े हैं। वे रिबोर लायक हो गए हैं। इससे पानी की दिक्कत मुंह चिढ़ाने लगी है।
विज्ञापन