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फसल पंजीकरण की नई व्यवस्था, ओटीपी समस्या से किसान परेशान
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23jjrp24- सरल केंद्र में फसल पंजीकरण करवाने पहुंचे किसान। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। किसानों की फसल पंजीकरण के लिए बुधवार को नई व्यवस्था लागू की गई। छुट्टी के दिन भी सरल केंद्र खोला गया, जहां 300 किसानों ने अपनी फसल का पंजीकरण करवाया। अलग-अलग काउंटर बनने से किसानों को मंगलवार जैसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
पंजीकरण प्रक्रिया कुछ ही समय में पूरी हो गई। हालांकि, पंचायती जमीन या किराये पर काश्त कर रहे किसानों को समस्या हुई। पंजीकरण के लिए ''मेरी फसल मेरा ब्योरा'' पोर्टल पर पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी आता है। पंचायती जमीन पर काश्त करने वाले किसानों को सरपंचों के मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाता है। कई बार संबंधित सरपंच व्यस्त होने के कारण ओटीपी नहीं दे पाते, जिससे पंजीकरण रुक जाता है। इसी प्रकार किराये की जमीन पर काश्त कर रहे किसानों को भी मालिक से ओटीपी मिलने में दिक्कत आती है। कई बार मालिक ओटीपी नहीं देते, जिससे पंजीकरण नहीं हो पाता।
इंसेट
नई व्यवस्था से मिली राहत
सरल केंद्र में किसानों के लिए 5 से 6 काउंटर बनाए गए थे। इससे फसल पंजीकरण में किसानों को ज्यादा दिक्कत नहीं आई। मंगलवार को केवल तीन काउंटर होने के कारण किसानों ने लघु सचिवालय में विरोध किया था। बुधवार को नई व्यवस्था से किसानों को काफी राहत मिली।
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इंसेट
ओटीपी से जुड़ी चुनौतियां
भिंडावास में पंचायती जमीन पर काश्त कर रहे किसान सरल केंद्र पहुंचे। उन्होंने सरपंच के नंबर पर ओटीपी पहुंचाया, लेकिन फोन न उठने से पंजीकरण नहीं हो सका। उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। अन्य गांवों के किराये पर जमीन लेने वाले किसानों को भी ऐसी ही समस्या का सामना करना पड़ा। ओटीपी न मिलने के कारण किसानों को इंतजार करना पड़ता है।
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झज्जर। किसानों की फसल पंजीकरण के लिए बुधवार को नई व्यवस्था लागू की गई। छुट्टी के दिन भी सरल केंद्र खोला गया, जहां 300 किसानों ने अपनी फसल का पंजीकरण करवाया। अलग-अलग काउंटर बनने से किसानों को मंगलवार जैसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
पंजीकरण प्रक्रिया कुछ ही समय में पूरी हो गई। हालांकि, पंचायती जमीन या किराये पर काश्त कर रहे किसानों को समस्या हुई। पंजीकरण के लिए ''मेरी फसल मेरा ब्योरा'' पोर्टल पर पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी आता है। पंचायती जमीन पर काश्त करने वाले किसानों को सरपंचों के मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाता है। कई बार संबंधित सरपंच व्यस्त होने के कारण ओटीपी नहीं दे पाते, जिससे पंजीकरण रुक जाता है। इसी प्रकार किराये की जमीन पर काश्त कर रहे किसानों को भी मालिक से ओटीपी मिलने में दिक्कत आती है। कई बार मालिक ओटीपी नहीं देते, जिससे पंजीकरण नहीं हो पाता।
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नई व्यवस्था से मिली राहत
सरल केंद्र में किसानों के लिए 5 से 6 काउंटर बनाए गए थे। इससे फसल पंजीकरण में किसानों को ज्यादा दिक्कत नहीं आई। मंगलवार को केवल तीन काउंटर होने के कारण किसानों ने लघु सचिवालय में विरोध किया था। बुधवार को नई व्यवस्था से किसानों को काफी राहत मिली।
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ओटीपी से जुड़ी चुनौतियां
भिंडावास में पंचायती जमीन पर काश्त कर रहे किसान सरल केंद्र पहुंचे। उन्होंने सरपंच के नंबर पर ओटीपी पहुंचाया, लेकिन फोन न उठने से पंजीकरण नहीं हो सका। उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। अन्य गांवों के किराये पर जमीन लेने वाले किसानों को भी ऐसी ही समस्या का सामना करना पड़ा। ओटीपी न मिलने के कारण किसानों को इंतजार करना पड़ता है।