फरीदाबाद: अस्पतालों में बढ़ाई जाए आइसोलेशन वार्ड की संख्या
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व कोविड-19 के नोडल अधिकारी राजीव अरोड़ा ने बुधवार को जिला अधिकारियों के साथ बैठक ली। उन्होंने सरकारी व निजी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड व बेड की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अस्पताल व सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के हाथों को सैनिटाइज कराने की व्यवस्था कराने के भी निर्देश अतिरिक्त मुख्य सचिव ने जारी किए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव बुधवार को लघु सचिवालय में कोरोना वायरस से बचाव के जिला स्तर पर की गई तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि मॉल्स में खान-पान व मेडिकल स्टोर को छोड़कर अन्य सभी स्टोर बंद किए जाएं।
उन्होंने निर्देश दिए कि जिला प्रशासन व नगर निगम ऐसी तैयारियां रखें कि कोई भी परिस्थिति आने पर सभी इंतजाम पूरे हों। उन्होंने बताया कि हरियाणा में रोहतक स्थित स्वास्थ्य विश्वविद्यालय व सोनीपत स्थित खानपुर कलां मेडिकल कालेज में कोरोना वायरस की जांच के लिए लैब तैयार कर ली गई है। संदिग्ध रोगी मिलने पर उसका पूर्ण रिकार्ड व डाटा जरूर रखा जाए। उसके इलाज के लिए उसे फॉलोअप लिया जाए। सिनेमा हॉल व मॉल्स को 31 मार्च तक बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। मॉल में केवल दवाइयों की दुकान व खानपान के सामान के स्टोर ही खोले जा सकेंगे अन्य दुकानें बंद कर दी जाएं। मंडल आयुक्त संजय जून ने बताया कि सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
इस संबंध में जारी सरकार की सभी हिदायतों की अनुपालना गंभीरता के साथ सुनिश्चित की जाएगी। वायरस से बचाव के लिए लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। नगर निगम आयुक्त यश गर्ग ने कहा कि निगम के 50 कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों को सैनिटाइज किया जा रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर भी सैनिटाइज किया जाएगा। पलिस आयुक्त केके राव ने कहा कि सभी आइसोलेशन वार्ड की सूची उपलब्ध करवाई जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर पुलिस की हरसंभव मदद वहां उपलब्ध करवाई जा सके।
अभी तक प्रदेश में बनाए गए हैं 298 आइसोलेशन वार्ड
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 298 आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं। प्रदेश स्तर पर 1,328 बेड आरक्षित हैं। संदिग्ध व्यक्तियों को अलग रखने के लिए 553 कमरे व 3 हजार 71 बेड तैयार किए गए हैं। हेल्पलाइन नंबर-108 पर उपलब्ध एंबुलेंस सुविधा के तहत प्रत्येक जिला में करीब दो एंबुलेंस को अलग रखा जाए, ताकि अन्य मरीजों से उन्हें अलग रखा जा सके। जन सुविधाओं के जुड़े विभागों के कर्मचारियों व अधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाए। कोरोना वायरस के बारे में जागरूकता जमीनी स्तर पर लोगों के पास पहुंचनी चाहिए।