दोस्त बना दुश्मन: जिसे खिलाया बिस्कुट उसी ने की गद्दारी, पालतु कुत्ते हुए खुंखार
यदि आपने कुत्ते पाल रखे हैं तो जरा संभलकर। आवारा कुत्तों का पहले से ही शहर में आतंक है, वहीं अब पालतू कुत्ते भी खुंखार होने लगे हैं। एसपी सिटी रणविजय सिंह को पुलिस के एक उच्च अधिकारी के कुत्ते ने काटा तो मंगलवार को लखनऊ तक इसकी गूंज हो गई। सरकारी अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन के इंजेक्शन को लेकर मारामारी रहती है।
जिला अस्पताल में हर रोज करीब 100 से 125 मरीज आते हैं, जिनमें से 70 से 80 मरीजों को इंजेक्शन लगाए जाते हैं, बाकी की काउंसलिंग कर उन्हें वापस भेज दिया जाता है। वहीं सीएचसी और पीएचसी पर भी देहात में 25 से 50 मरीज आते हैं। एक तरफ एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने को लेकर मारामारी है, तो दूसरी कुत्तों का आतंक जारी है।
मेरठ में हर साल 50 हजार से ज्यादा लोगों को कुत्तों काटते हैं। इस सबके बावजूद जिला अस्पताल के अलावा, मेडिकल कॉलेज और सरकारी कार्यालयों में ही कुत्तों की भरमार रहती है। रिकार्ड के अनुसार प्रतिदिन औसतन 137 लोगों को कुत्ते निशाना बनाते हैं। शहर की सड़कों के अलावा, गली मोहल्लों और देहात में भी कुत्तों का आतंक है। पूर्व में काजीपुर के खुंखार कुत्तों ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया था।
एसपी सिटी को बनाया निशाना
एसपी सिटी रणविजय सिंह को एडीजी के पालतू कुत्ते ने काट लिया था। जिसके बाद एसपी सिटी ने अस्पताल में इंजेक्शन लगवाए। एसपी सिटी का कहना है कि कुत्ता पालतू है, पहले से उन्हें पहचानता है। लेकिन अचानक से कुत्ते ने काट लिया। जिसके बाद उन्होंने अस्पताल में इंजेक्शन लगवाए।
एसपी ट्रैफिक को दी वॉच करने की सलाह
सोमवार रात को मवाना रोड स्थित डिफेंस कालोनी में एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेयी की बेटी को उन्हीं के पालतू कुत्ते ने काट लिया। एसपी ट्रैफिक का पालतू कुत्ता लाफा नस्ल का है। एसपी ट्रैफिक का कहना है कि डॉक्टर ने सलाह दी है कि वह दस दिन तक कुत्ते को वॉच करें। एसपी ट्रैफिक का कहना है कि बेटी को काटने के बाद वह इस कुत्ते को घर में नहीं रखेंगे।
यह कहते हैं डॉक्टर
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल का कहना है कि कुत्तों के काटने पर जानकारी न होने केकारण मरीज के पिसी हुई मिर्च लगा दी जाती है, जो कि गलत है। इससे ठीक होने के बजाय घाव में संक्रमण होने का खतरा ज्यादा रहता है। कुत्ते या किसी जानवर के काटने पर 72 घंटे के अंदर एंटी रैबीज वैक्सीन का इंजेक्शन जरूर लगवाना चाहिए। रैबीज बेहद खतरनाक बीमारी है। रैबीज हो जाने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है। यह रोग 19 वर्ष तक मरीज को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। एक समय ऐसा भी था, जब कुत्ते के काटने पर 16 इंजेक्शन लगवाने पड़ते थे, वह भी पेट में।
कैसे होता है रैबीज
जानवर जैसे कुत्ता, बंदर, लंगूर आदि के काटने से जो लार व्यक्ति के खून में मिल जाती है, उससे रैबीज नामक बीमारी होने का खतरा रहता है। रैबीज रोग सीधे रोगी के मानसिक संतुलन को खराब कर देता है, जिससे रोगी का अपने दिमाग पर कोई संतुलन नहीं रहता है। रैबीज रोगी को सबसे ज्यादा पानी से डर लगता है। रोगी के मुंह से लार निकलती है। रोगी को रोशनी से डर लगता है। यहां तक कि वह भौंकना भी शुरू कर देता है।
रोकथाम: रैबीज रोग की रोकथाम के लिए अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इससे बचाव हो सकता है। नियमानुसार पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवा 28 दिन के बाद लगाया जाता है।
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