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मनु भाकर, सुरुचि फौगाट को 10 मीटर में निराशा, 25 मीटर से उम्मीदें
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संवाद न्यूज एजेंसी
साल्हावास। जापान के आइची-नागोया शहर में चल रहे 20वें एशियन गेम्स 2026 में ओलंपियन मनु भाकर और शूटिंग सनसनी सुरुचि फौगाट का पहले दिन प्रदर्शन निराशाजनक रहा। बुधवार को 10 मीटर स्पर्धा में उन्हें पदक नहीं मिला। हालांकि, परिवार और ग्रामीणों को अब भी अगले इवेंट से उम्मीदें हैं।
बुधवार को हुए मैच के परिणाम से खिलाड़ियों के परिवारों और खेल प्रेमियों में निराशा है। सभी को 10 मीटर में देश के लिए पहला स्वर्ण मिलने की उम्मीद थी लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। परिवार को निराशा जरूर है पर आस अभी बाकी है। इसका कारण 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा का बाकी होना है। मनु भाकर इस स्पर्धा में मौजूदा एशियन गेम्स चैंपियन हैं और ओलंपिक में भी पदक दिला चुकी हैं।
सुरुचि फौगाट भी इसी स्पर्धा में भारतीय टीम का हिस्सा हैं और बेहतरीन फॉर्म में हैं। खेल प्रेमियों का कहना है कि मनु भाकर और सुरुचि फौगाट हार मानने वाली नहीं हैं। ये दोनों बेटियां गांव की मिट्टी से बनी हैं। उन्होंने धूल में तपकर सोना बनना सीखा है। सभी को पूरा विश्वास है कि अगले मैच में दोनों दोगुने जोश के साथ वापसी करेंगी। वे तिरंगे की शान बढ़ाएंगी।
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मनु भाकर के लिए यह एशियन गेम्स सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं है। यह उनके बेहद कठिन निजी दौर के बीच आया है। उनकी 84 वर्षीय दादी दया कौर का रोहतक के निजी अस्पताल में निधन हो गया था। दादी के निधन की खबर मिलते ही उन्होंने ट्रेनिंग कैंप छोड़ा और पैतृक गांव गोरिया पहुंचकर अंतिम विदाई दी।
वहीं चाचा महेंद्र सिंह ने बताया कि बुधवार को 10 मीटर इवेंट में मनु भाकर से उम्मीद थी कि पदक जीतेगी लेकिन थोड़े मार्जिन से चूक गईं। अब 25 मीटर में उम्मीद है। आशा है कि वे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर से देश को गौरवान्वित करेंगी।
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साल्हावास। जापान के आइची-नागोया शहर में चल रहे 20वें एशियन गेम्स 2026 में ओलंपियन मनु भाकर और शूटिंग सनसनी सुरुचि फौगाट का पहले दिन प्रदर्शन निराशाजनक रहा। बुधवार को 10 मीटर स्पर्धा में उन्हें पदक नहीं मिला। हालांकि, परिवार और ग्रामीणों को अब भी अगले इवेंट से उम्मीदें हैं।
बुधवार को हुए मैच के परिणाम से खिलाड़ियों के परिवारों और खेल प्रेमियों में निराशा है। सभी को 10 मीटर में देश के लिए पहला स्वर्ण मिलने की उम्मीद थी लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। परिवार को निराशा जरूर है पर आस अभी बाकी है। इसका कारण 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा का बाकी होना है। मनु भाकर इस स्पर्धा में मौजूदा एशियन गेम्स चैंपियन हैं और ओलंपिक में भी पदक दिला चुकी हैं।
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सुरुचि फौगाट भी इसी स्पर्धा में भारतीय टीम का हिस्सा हैं और बेहतरीन फॉर्म में हैं। खेल प्रेमियों का कहना है कि मनु भाकर और सुरुचि फौगाट हार मानने वाली नहीं हैं। ये दोनों बेटियां गांव की मिट्टी से बनी हैं। उन्होंने धूल में तपकर सोना बनना सीखा है। सभी को पूरा विश्वास है कि अगले मैच में दोनों दोगुने जोश के साथ वापसी करेंगी। वे तिरंगे की शान बढ़ाएंगी।
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मनु भाकर के लिए यह एशियन गेम्स सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं है। यह उनके बेहद कठिन निजी दौर के बीच आया है। उनकी 84 वर्षीय दादी दया कौर का रोहतक के निजी अस्पताल में निधन हो गया था। दादी के निधन की खबर मिलते ही उन्होंने ट्रेनिंग कैंप छोड़ा और पैतृक गांव गोरिया पहुंचकर अंतिम विदाई दी।
वहीं चाचा महेंद्र सिंह ने बताया कि बुधवार को 10 मीटर इवेंट में मनु भाकर से उम्मीद थी कि पदक जीतेगी लेकिन थोड़े मार्जिन से चूक गईं। अब 25 मीटर में उम्मीद है। आशा है कि वे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर से देश को गौरवान्वित करेंगी।