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श्रद्धालुओं ने तीसरे सोमवार को किया भगवान शिव का जलाभिषेक
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17jjrp15- संकट मोहन शिव हनुमान मंदिर में शिवलिंग पर जलाभिषेक करते श्रद्धालु। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। सावन के तीसरे सोमवार को शिवालयों और मंदिरों में श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। यह दिन नाग पंचमी के साथ एक दुर्लभ महासंयोग लेकर आया।
शिव भक्तों ने ओम नमो शिवाय और हर-हर महादेव के जयकारे लगाए। उन्होंने नगर खेड़ा बाबा प्रसाद गिरी मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में जलाभिषेक किया। भक्तों ने गंगा जल, फल, फूल, शहद और बेल पत्र चढ़ाकर पूजा की। पंडित पवन कौशिक ने मंत्रोच्चारण के साथ जलाभिषेक संपन्न कराया। भक्तों ने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कामना की। महिलाओं ने श्रावण मास के तीसरे सोमवार को व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा की।
पंडित पवन कौशिक ने बताया कि सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी का यह दुर्लभ संयोग एकसाथ था। सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, जबकि नाग पंचमी नाग देवता की पूजा के लिए है। भगवान शिव के गले में नाग विराजमान हैं, इसलिए यह दिन शिव और नाग उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग देवता और भगवान शिव की पूजा एक ही दिन होने से इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यह संयोग 23 साल बाद बना है, इससे पहले साल 2003 में ऐसा योग बना था।
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झज्जर। सावन के तीसरे सोमवार को शिवालयों और मंदिरों में श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। यह दिन नाग पंचमी के साथ एक दुर्लभ महासंयोग लेकर आया।
शिव भक्तों ने ओम नमो शिवाय और हर-हर महादेव के जयकारे लगाए। उन्होंने नगर खेड़ा बाबा प्रसाद गिरी मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में जलाभिषेक किया। भक्तों ने गंगा जल, फल, फूल, शहद और बेल पत्र चढ़ाकर पूजा की। पंडित पवन कौशिक ने मंत्रोच्चारण के साथ जलाभिषेक संपन्न कराया। भक्तों ने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कामना की। महिलाओं ने श्रावण मास के तीसरे सोमवार को व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा की।
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पंडित पवन कौशिक ने बताया कि सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी का यह दुर्लभ संयोग एकसाथ था। सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, जबकि नाग पंचमी नाग देवता की पूजा के लिए है। भगवान शिव के गले में नाग विराजमान हैं, इसलिए यह दिन शिव और नाग उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग देवता और भगवान शिव की पूजा एक ही दिन होने से इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यह संयोग 23 साल बाद बना है, इससे पहले साल 2003 में ऐसा योग बना था।
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