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घटा दीयों का कारोबार, झज्जर में 500 से घटकर 200 रह गए कुम्हार परिवार
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19jjrp14- झज्जर। शिल्पकार की तरफ से बनाए गए मिट्टी के दीये। संवाद
झज्जर। दीपावली पर मिट्टी के दीये बनाने का कारोबार झज्जर क्षेत्र में लगातार सिमट रहा है। मिट्टी की कमी और बढ़ती लागत के चलते जहां पहले करोड़ों दीये तैयार कर देश-विदेश में भेजे जाते थे, वहीं अब इनकी संख्या लाखों में रह गई है। सस्ती मिट्टी की तलाश में कई व्यापारी झज्जर से राजस्थान की ओर रुख कर चुके हैं।
इसका असर पारंपरिक मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने के काम पर भी पड़ रहा है। पहले झज्जर क्षेत्र में मिट्टी आसानी से उपलब्ध हो जाती थी, जिससे दीये और अन्य मिट्टी के बर्तन बनाने में परेशानी नहीं होती थी। अब मिट्टी की उपलब्धता कम होने के साथ उसकी कीमत और ईंधन की लागत भी बढ़ गई है। इससे दीयों के उत्पादन की लागत बढ़ रही है और बाजार में सामान बेचना महंगा पड़ रहा है।
मिट्टी के बर्तन बनाने वाले परिवारों की संख्या में भी गिरावट आई है। स्थानीय लोगों को कहना है कि पहले झज्जर क्षेत्र में करीब 500 परिवार इस काम से जुड़े थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर लगभग 200 रह गई है। युवा पीढ़ी भी इस पारंपरिक व्यवसाय को अपनाने में कम रुचि दिखा रही है, जिससे आने वाले समय में इस कारोबार के और सिमटने की आशंका है।
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हर साल घट रहे दीयों के ऑर्डर
शहर के शिल्पकार इंद्रपाल खोहाल ने बताया कि दीपावली पर मिट्टी के दीयों के ऑर्डर हर साल कम हो रहे हैं। झज्जर में पर्याप्त मिट्टी नहीं मिलने के कारण कई व्यापारी राजस्थान चले गए हैं, जहां कम कीमत पर मिट्टी उपलब्ध हो जाती है। उन्होंने बताया कि पहले यहां तैयार होने वाले करोड़ों दीये देश के साथ विदेशों में भी भेजे जाते थे, लेकिन अब कारोबार सीमित होकर लाखों दीयों तक रह गया है। मिट्टी की कमी बनी रही तो आने वाले वर्षों में उत्पादन और घट सकता है।
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इसका असर पारंपरिक मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने के काम पर भी पड़ रहा है। पहले झज्जर क्षेत्र में मिट्टी आसानी से उपलब्ध हो जाती थी, जिससे दीये और अन्य मिट्टी के बर्तन बनाने में परेशानी नहीं होती थी। अब मिट्टी की उपलब्धता कम होने के साथ उसकी कीमत और ईंधन की लागत भी बढ़ गई है। इससे दीयों के उत्पादन की लागत बढ़ रही है और बाजार में सामान बेचना महंगा पड़ रहा है।
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मिट्टी के बर्तन बनाने वाले परिवारों की संख्या में भी गिरावट आई है। स्थानीय लोगों को कहना है कि पहले झज्जर क्षेत्र में करीब 500 परिवार इस काम से जुड़े थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर लगभग 200 रह गई है। युवा पीढ़ी भी इस पारंपरिक व्यवसाय को अपनाने में कम रुचि दिखा रही है, जिससे आने वाले समय में इस कारोबार के और सिमटने की आशंका है।
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हर साल घट रहे दीयों के ऑर्डर
शहर के शिल्पकार इंद्रपाल खोहाल ने बताया कि दीपावली पर मिट्टी के दीयों के ऑर्डर हर साल कम हो रहे हैं। झज्जर में पर्याप्त मिट्टी नहीं मिलने के कारण कई व्यापारी राजस्थान चले गए हैं, जहां कम कीमत पर मिट्टी उपलब्ध हो जाती है। उन्होंने बताया कि पहले यहां तैयार होने वाले करोड़ों दीये देश के साथ विदेशों में भी भेजे जाते थे, लेकिन अब कारोबार सीमित होकर लाखों दीयों तक रह गया है। मिट्टी की कमी बनी रही तो आने वाले वर्षों में उत्पादन और घट सकता है।