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एनसीआई बाढ़सा में अब रोबोटिक सर्जरी से होगा कैंसर का इलाज
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फोटो नंबर 71: नेशनल कैंसर संस्थान, बाढ़सा।
मनोज कौशिक
बादली। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई), एम्स बाढ़सा में कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने के लिए रोबोटिक सर्जरी समेत कई आधुनिक तकनीकें शुरू की जा रही हैं। इससे हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है। संस्थान में रोबोटिक सर्जरी सिस्टम, आधुनिक ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप और 3डी-4के लैप्रोस्कोपिक सिस्टम लगाया जा रहा है।
रोबोटिक सर्जरी की मदद से डॉक्टर छोटे चीरे के जरिए जटिल ऑपरेशन कर सकेंगे। इससे रक्तस्राव कम होने और मरीज के जल्द स्वस्थ होने में मदद मिल सकती है। वहीं, ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप और 3डी-4के लैप्रोस्कोपिक सिस्टम से सर्जरी के दौरान शरीर के सूक्ष्म हिस्सों को अधिक स्पष्टता से देखने में मदद मिलेगी।
संस्थान की माइक्रोबायोलॉजी लैब में मल्टीप्लेक्स पीसीआर सिस्टम भी लगाया जाएगा। इसके लिए मशीन मंगवाई जा रही है। इस तकनीक से एक साथ कई तरह के संक्रमणों की पहचान कम समय में की जा सकेगी। इससे विशेष रूप से कीमोथेरेपी ले रहे और कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले मरीजों में संक्रमण का पता लगाने तथा समय पर उपचार शुरू करने में मदद मिलेगी।
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पेट में फैले कैंसर के इलाज में भी मिलेगी सुविधा
एनसीआई में हाइपरथर्मिक इंट्रा पेरिटोनियल कीमोथेरेपी (एचआईपीईसी) तकनीक भी शुरू की जा रही है। इसमें सर्जरी के दौरान पेट के अंदर प्रभावित क्षेत्र में गर्म कीमोथेरेपी दवा दी जाती है। इस तकनीक का उपयोग पेट में फैले कुछ प्रकार के कैंसर के उपचार में किया जाता है।
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एक साल में 6 हजार सर्जरी
संस्थान के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में यहां 20 हजार से अधिक नए कैंसर मरीज पंजीकृत हुए। इस दौरान 6 हजार सर्जरी और 40 हजार से अधिक कीमोथेरेपी की गईं। रेडियोलॉजी की 55 हजार से अधिक जांचें और पांच लाख से अधिक लैब जांच भी हुईं। संस्थान की लैब में प्रतिदिन 60 हजार सैंपल जांचने की क्षमता बताई गई है, जबकि रेडियोथेरेपी की सुविधा से प्रतिदिन करीब 150 मरीजों का उपचार किया जाता है।
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वर्जन
आधुनिक तकनीकों से संस्थान में कैंसर मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। रोबोटिक सर्जरी और नई मशीनों से इलाज की सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। आधुनिक मशीनों से एनसीआई बाढ़सा देश के चुनिंदा हाईटेक कैंसर सेंटरों में शामिल है।
समीर बख्शी, प्रमुख, एनसीआई बादसा।
फोटो नंबर 71: नेशनल कैंसर संस्थान, बाढ़सा।
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बादली। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई), एम्स बाढ़सा में कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने के लिए रोबोटिक सर्जरी समेत कई आधुनिक तकनीकें शुरू की जा रही हैं। इससे हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है। संस्थान में रोबोटिक सर्जरी सिस्टम, आधुनिक ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप और 3डी-4के लैप्रोस्कोपिक सिस्टम लगाया जा रहा है।
रोबोटिक सर्जरी की मदद से डॉक्टर छोटे चीरे के जरिए जटिल ऑपरेशन कर सकेंगे। इससे रक्तस्राव कम होने और मरीज के जल्द स्वस्थ होने में मदद मिल सकती है। वहीं, ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप और 3डी-4के लैप्रोस्कोपिक सिस्टम से सर्जरी के दौरान शरीर के सूक्ष्म हिस्सों को अधिक स्पष्टता से देखने में मदद मिलेगी।
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संस्थान की माइक्रोबायोलॉजी लैब में मल्टीप्लेक्स पीसीआर सिस्टम भी लगाया जाएगा। इसके लिए मशीन मंगवाई जा रही है। इस तकनीक से एक साथ कई तरह के संक्रमणों की पहचान कम समय में की जा सकेगी। इससे विशेष रूप से कीमोथेरेपी ले रहे और कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले मरीजों में संक्रमण का पता लगाने तथा समय पर उपचार शुरू करने में मदद मिलेगी।
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पेट में फैले कैंसर के इलाज में भी मिलेगी सुविधा
एनसीआई में हाइपरथर्मिक इंट्रा पेरिटोनियल कीमोथेरेपी (एचआईपीईसी) तकनीक भी शुरू की जा रही है। इसमें सर्जरी के दौरान पेट के अंदर प्रभावित क्षेत्र में गर्म कीमोथेरेपी दवा दी जाती है। इस तकनीक का उपयोग पेट में फैले कुछ प्रकार के कैंसर के उपचार में किया जाता है।
एक साल में 6 हजार सर्जरी
संस्थान के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में यहां 20 हजार से अधिक नए कैंसर मरीज पंजीकृत हुए। इस दौरान 6 हजार सर्जरी और 40 हजार से अधिक कीमोथेरेपी की गईं। रेडियोलॉजी की 55 हजार से अधिक जांचें और पांच लाख से अधिक लैब जांच भी हुईं। संस्थान की लैब में प्रतिदिन 60 हजार सैंपल जांचने की क्षमता बताई गई है, जबकि रेडियोथेरेपी की सुविधा से प्रतिदिन करीब 150 मरीजों का उपचार किया जाता है।
वर्जन
आधुनिक तकनीकों से संस्थान में कैंसर मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। रोबोटिक सर्जरी और नई मशीनों से इलाज की सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। आधुनिक मशीनों से एनसीआई बाढ़सा देश के चुनिंदा हाईटेक कैंसर सेंटरों में शामिल है।
समीर बख्शी, प्रमुख, एनसीआई बादसा।
फोटो नंबर 71: नेशनल कैंसर संस्थान, बाढ़सा।