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इविवि को आठ दिन में लगातार तीन झटके

Mon, 08 Apr 2019 11:44 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 08 Apr 2019 11:44 PM IST
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AU: gets three consecutive shocks in eight days.
इलाहाबाद विश्वविद्यालय

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) को आठ दिनों के भीतर लगातार तीन झटके लगे हैं। एनआईआरएफ रैंकिंग में टॉप 200 से बाहर होने से पहले नैक की ओर से दी गई ‘बी डबल प्लस’ की ग्रेडिंग से भी इविवि की साख गिरी और इस बार सिविल सेवा परीक्षा में चयन के मामले में इविवि का तकरीबन सफाया हो गया।

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विश्वविद्यालयों की रैंकिंग पांच श्रेणियों के आधार पर की जाती है। पहली श्रेणी है टीएलआर यानी टीचिंग लर्निंग एंड रिसोर्सेज, दूसरी  श्रेणी है आरपीसी (रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रैक्टिस), तीसरी श्रेणी है जीओ (ग्रेजुएट आउटकम), चौथी श्रेणी है ओआई (आउटरीच एंड इंक्यूसिविटी) और पांचवीं श्रेणी है पीआर (पर्सेप्शन)। टीएलए के तहत देखा जाता है छात्र कितने हैं, छात्रों और फैकेल्टी मेंबर्स का क्या अनुपात है, कितना बजट मिला और कितना खर्च हुआ। आरपीसी के तहत कितने शोध पत्र पब्लिश हुए, कितने पेंटेंट हुए, कितने ग्रांटेड हैं। जीओ श्रेणी के तहत समीक्षा की जाती है कि ग्रेजुएट आउटकम्स क्या है। यानी विश्वविद्यालय के कितने छात्रों को प्लेसमेंट मिला। पीएचडी छात्रों की भी समीक्षा होती है। 
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वहीं, ओआई श्रेणी के तहत दूसरे राज्यों एवं देशों के छात्रों की उपस्थिति का प्रतिशत, शारीरिक रूप से अक्षम छात्रों के लिए फैकेल्टी, विश्वविद्यालय में आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर छात्रों की स्थिति और महिला प्रतिशत की समीक्षा होती है। वहीं, पर्सेप्शन के तहत आम लोगों, शिक्षकों, छात्रों की ओर से विश्वविद्यालय के प्रति की गई ऑनलाइन टिप्प्णी की समीक्षा की जाती है। इविवि को टॉप 200 में भी जगह न मिलने से स्पष्ट है कि इन तमाम श्रेणियों में इविवि अन्य विश्वविद्यालय के मुकाबले कहीं नहीं ठहर सका।
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टॉप 100 में शमिल प्रयागराज के तीन शिक्षण संस्थानों को किस मानक में मिले कितने अंक

एमएनएनआईटी
मानक - अंक
टीएलआर - 63.13
आरपीसी - 28.38
जीओ - 65.55
ओआई - 49.49
पर्सेप्शन - 19.77
00
ट्रिपल आईटी
मानक - अंक
मानक - अंक
टीएलआर - 42.66
आरपीसी - 16.38
जीओ - 68.86
ओआई - 45.45
पर्सेप्शन - 17.10
00
शुआट्स
मानक - अंक
टीएलआर - 67.03
आरपीसी - 19.37
जीओ - 41.53
ओआई - 43.33
पर्सेप्शन - 5.64

‘इलाहाबाद विश्वविद्यालय की बेहतरी के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। संस्था किसी एक व्यक्ति के भरोसे नहीं चलती। मेरे समय में इविवि की 12वीं रैंकिंग थी। उस वक्त जो कुछ अच्छा होता था, उसकी जिम्मेदारी मैं खुद लेता था और अच्छा सामूहिक प्रयास से होता था। इंस्टीट्यूट के डूबने के कई कारण होते हैं। रिक्रूटमेंट में अच्छे शिक्षकों को लाना जरूरी है। प्रोजेक्ट के लिए सरकार से अनुदान लाना होगा। पढ़ाई के साथ रिसर्च के क्षेत्र में भी काफी काम करने की जरूरत है। सामूहिक प्रयास ने ऑर्गनाइजेशन के साथ मैनेजमेंट को भी पूरी गंभीरता से काम करने की जरूरत है। शिक्षकों को भी अपनी जिम्मेदारी का एहसास करते हुए पठन-पाठन का माहौल बनाने के लिए उन्हें आगे आना होगा।’ प्रो. आरजी हर्षे, पूर्व कुलपति, इविवि

‘इलाहाबाद विश्वविद्यालय की हालत किसी से छिपी नहीं है। शिक्षकों की भर्ती में किस तरह की गड़बड़ियां हुई, सभी को मालूम है। कार्य परिषद में लोगों को बोलने नहीं दिया जाता। निर्णय बदल दिए जाते हैं। संस्थान को संभालने में वहां के प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है लेकिन इविवि में प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं हैं। जिन शिक्षकों को कक्षाओं में जाकर पढ़ाना चाहिए, वे अफसरों की कुर्सियां संभाल कर बैठे हैं। अच्छे अफसरों को वहां रुकने नहीं दिया जाता। संस्थान को सामूहिक प्रयास से ही बेहतर बनाया जा सकता है लेकिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय कुलपति के कुछ करीबियों के हाथों में है। इविवि लगातार गर्त में जा रहा है। इसे बचाना है तो वहां के पूरे सिस्टम को बदलना होगा।’ प्रो. सीएल खेत्रपाल, पूर्व कुलपति, इविवि

‘एनआईआरएफ की ओर से पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विश्वविद्यालयों की रैंकिंग होती है। इसमें शिक्षक-छात्र अनुपात सबसे महत्वपूर्ण पक्ष होता है। इविवि में पिछले कई वर्षों से शिक्षकों की नियुक्तियां नहीं हुई हैं। शिक्षकों के 500 से अधिक पद खाली हैं। इविवि ने शिक्षकों की बहाली शुरू की थी लेकिन यूजीसी, एमएचआरडी और सुप्रीमकोर्ट के निर्णय के कारण हमें शिक्षक भर्ती प्रक्रिया बीच में ही रोकनी पड़ी।’ डॉ. चितरंजन सिंह, इविवि

कॉलेजों ने भी किया हताश
एनआईआरएफ की रैंकिंग में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कॉलेजों ने भी हताश किया। एनआईआरएफ ने कॉलेज श्रेणी में अलग से रैंकिंग जारी की है और टॉप 100 की सूची में कोई भी कॉलेज शामिल नहीं है। वहीं, इविवि प्रशासन कॉलेजों में पीजी, पीएचडी की पढ़ाई शुरू करके अपनी ही पीठ थपथपा रहा है।

छात्रसंघ महामंत्री ने इविवि प्रशासन पर साधा निशाना
छात्रसंघ महामंत्री शिवम सिंह ने टॉप 200 सूची से इविवि के बाहर होने पर अफसोस जताते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। महामंत्री का कहना है कि प्रो. हांगलू के कुलपति बनने के बाद से ही विश्वविद्यालय के खराब दिन शुरू हो गए थे। नतीजा सामने है। रैंकिंग लगातार गिरती जा रही है और नैक ग्रेडिंग में भी विश्वविद्यालय की हालत अच्छी नहीं है। इविवि प्रशासन अव्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों को निलंबित और निष्कासित करने के बजाय सुधार की ओर कदम उठाता तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती।


शिक्षक संघ का दावा, नियुक्तियां होती तो सुधरते हालात
इलाहाबाद विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. राम सेवक दुबे का कहना है कि इविवि में जब तक अध्यापकों की नियुक्तियां नहीं होंगी और शिक्षक-छात्र अनुपात ठीक नहीं होगा, तब तक अध्यापकों को न तो रिसर्च करने का वक्त मिलेगा और न ही लेखन आदि के लिए शिक्षक समय निकाल सकेंगे। एक प्रोफेसर को सप्ताह में छह कक्षाएं लेनी चाहिए लेकिन मौजूद हालात में 18 कक्षाएं लेनी पड़ रही हैं। अगर शिक्षकों की नियुक्तियां होतीं तो हालात बेहतर होते।

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