अलॉटमेंट में अफसरों की रेवड़ी बांट पर हाईकोर्ट की करारी चोट

Chandigarh Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 30 साल से चल रहे एक केस में अहम फैसला सुनाते हुए मनीमाजरा में 33 साल पहले आवंटित की गई 12 कार्मिशयल साइट्स के आवंटन को रद कर दिया है। देव सिंह द्वारा दायर याचिका पर मंगलवार को जस्टिस हेमंत गुप्ता एवं जस्टिस एएन जिंदल की खंडपीठ ने फैसला सुनाने के साथ ही, विद्यावती सोफत और सुरेश सोफत को प्लाटों का आवंटन भी रद कर दिया। हाईकोर्ट ने सभी 12 कार्मिशियल साइट्स के कब्जाधारकों को तीन महीने के अंदर साइट्स खाली करने के आदेश भी जारी किए हैं।
मनीमाजरा एनएसी मार्केट की ये साइट्स हैं- 815ए, 815बी, 815सी, 815डी, 830ए, 830सी, 830डी, 855ए, 855बी, 855सी और 855डी।
हाईकोर्ट ने कहा कि इन साइट्स के अलॉटियाें को कोई भी कंपनसेशन (मुआवजा) नहीं दिया जाएगा, क्योंकि यह अलॉटमेंट आवंटन की तिथि से ही पूरी तरह गैरकानूनी है और वे शुरू से ही इसका कद्मर्मिशियल उपयोग कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर इन साइट्स पर कब्जा करने वाले, अलॉटी या फिर किराएदार तीन महीने में इन साइट्स को खाली नहीं करते हैं, तो पब्लिक परमाइसेस एक्ट 1971 के तहत नगर निगम इन्हें अपने कब्जे में ले।
प्रशासन साइट्स को बेचे या पार्किंग बनाए
हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारी ले आउट प्लान के कार्विंग आउट पर जांच करें और अगर यह सही पाया जाता है, तो सार्वजनिक नीलामी के तहत इन साइट्स को बेच दिया जाए। अगर ले आउट प्लान में संशोधन की संभावना नहीं दिखती है, तो इन साइट्स को मैदानी इलाके में तब्दील कर दिया जाए और स्थानीय लोगाें की पार्किंग के लिए उपयोग में लाया जाए।
नोटिफाई एरिया कमेटी और यूटी के अफसरों की मिलीभगत
हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिए कि इस मामले में पूरी जांच की जाए और दोषी पाए जाने वालाें के खिलाफ मुकद्दमा चलाया जाए। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन इस मामले में आरोपी अधिकारियाें के खिलाफ सिविल, आपराधिक सुनवाई चला सकता है। फैसले में खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि इन कार्मिशियल साइट्स के आवंटन के मामले में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अपनी शक्तियों के गलत उपयोग के तथ्य सामने आए हैं। मनीमाजरा की नोटीफाई एरिया कमेटी और यूटी के प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से पब्लिक प्रापर्टी को गहरा नुकसान हुआ है।
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67 प्लाटों को किया 12 साइट्स में तब्दील
19 अपैल 1971 को नोटीफाइड कमेटी अपने गठन के बाद से ही भ्रष्टाचार में डूब गई थी। 11 सदस्यीय इस कमेटी में 6 आफिशियल और 5 नॉन आफिशियल मेंबर थे। तत्कालीन लैंड एक्यूजीशन अफसर पीपी साहनी कमेटी के पहले अध्यक्ष चुने गए थे। 24 जनवरी 1978 में कमेटी ने प्रस्ताव पास किया, जिसके तहत भूमि को कार्मिशियल उपयोग में लाने और रिहायशी सेक्टर बसाने पर सहमति दी गई। 24 अप्रैल 1979 में यूटी के चीफ आर्किटेक्ट ने कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष होशियार सिंह को पत्र लिखा, जिसमें जमीन की फिजिबिलिटी की बात की गई। इसके बाद कमेटी के महासचिव जोगिंदर सिंह वालिया को ले आउट प्लान हैंड ओवर कर दिया गया। हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी ने बताया कि ले आउट के आर्जिनल प्लान में 67 कार्मिशियल प्लॉट्स की बात थी, लेकिन बाद में इसे 12 कार्मिशियल साइट्स में बदल दिया गया।
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डीसी ने लगाई थी मनमानी पर रोक
कमेटी ने 5 मई 1979 में इन कार्मिशियल साइट्स और 242 रेजिडेंशियल प्लॉट्स में 50 फीसदी आरक्षण की बात की थी। इसमें 30 फीसी चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियाें को, 10 फीसदी एक्स सर्विसमैन को और 10 फीसदी नोटीफाइड एरिया कमेटी के कर्मचारियाें को देने की बात की गई थी। लेकिन, इस आरक्षण को तत्कालीन डीसी ने कैसिंल कर दिया और सिर्फ 5 फीसदी आरक्षण एससी, बीसी और एक्स सर्विस मैन को देने पर हामी भरी। इसके बाद कमेटी ने नोटिस जारी कर 12 साइट्स के लिए अर्जियां आमंत्रित की।
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अफसर और कमेटी के पदाधिकारी यूं डकार गए साइट्स
साइट अलाटी अधिकारी रिश्ता

1. 815ए हरिंदर सिंह जेएस वालिया पुत्र
(महासचिव, कमेटी)
2. 815बी माधुरी सुधीर के. वर्मा पत्नी
(डिवीजल टाउन प्लानर)
3. 815सी तेजेंद्र सिंह जेएस वालिया रिश्तेदार
4. 815डी सुरेखा एससी नागिन पुत्री
(सीनियर टाउन प्लानर)
5. 830ए नत्थी सिंह पीपी साहनी बेनामी
( पूर्व अध्यक्ष, कमेटी)
6. 830 बी देश राज एसएस मलिक पिता
(पूर्व डीसी, चंडीगढ़)
7. 830 सी सविता बढेरा केआर बढेरा पत्नी
(पूर्व डीसी, चंडीगढ़)
8. 830 डी बिमला मलिक आरएस मलिक साली
(पूर्व डीसी, चंडीगढ़)
9. 855ए दौलत राम होशियार सिंह बेनामी
(पूर्व डीसी, चंडीगढ़)
10. 855बी रुपिंदर सिंह जेएस वालिया रिश्तेदार
11. 855सी राजेंद्र कौर एएस महेंदीरत्ता पत्नी
(आर्किटेक्ट, चंडीगढ़)
12. 855डी आरके मंगत एस. मोहिंदर सिंह बहू
(एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, चंडीगढ़)

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