{"_id":"9674","slug":"Chandigarh-9674-54","type":"story","status":"publish","title_hn":"किडनी कांड के लपेटे में आए दो बड़े अस्पताल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किडनी कांड के लपेटे में आए दो बड़े अस्पताल
Chandigarh
Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
मोहाली। किडनी के अवैध कारोबार की जांच में जुटी मोहाली पुलिस ने एक लैब टेक्नीशियन को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। इसके साथ ही पुलिस ने गिरोह के छह लोगों के खिलाफ परचा दर्ज किया गया है। किडनी कांड की जांच के लिए करीब साढ़े चार महीने पहले गठित एसआईटी ने जांच पूरी करने के बाद एसएसपी को रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद ही पुलिस ने यह कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक सिल्वर ओक्स अस्पताल और सूर्या किडनी केयर सेंटर के स्टाफ और डॉक्टरों ने ह्यूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांट एक्ट के नियमों का उल्लंघन किया है। हालांकि सूर्या किडनी केयर प्रबंधन ने दावा किया कि अस्पताल से ब्लड सैंपल लेने का आरोपी लैब टेक्नीशियन सचिन कभी उनके संस्थान का कर्मचारी नहीं रहा।
एसएसपी गुरप्रीत भुल्लर ने बताया कि जांच में सामने आया है कि कुछ डोनर व रेसीपिएंट स्थायी तौर पर नेपाल के रहने वाले थे। इनका मोहाली का अस्थायी पता देकर सूर्या किडनी सेंटर और सिल्वर ओक्स अस्पताल में इनकी किडनी ट्रांसप्लांट की। इसके लिए दूतावास का लेटर जरूरी है, लेकिन इन केसों में एंबेसी का लेटर नहीं लगाया गया। सिर्फ नेपाल के गृह मंत्रालय की रिपोर्ट ही लगाई गई। इस तरह अस्पतालों ने ह्यूमन ट्रांसप्लांट एक्ट की धारा 6 एफ(ई) का उल्लंघन किया।
पड़ताल के दौरान पुलिस को गाजियाबाद निवासी इकरामुद्दीन ने बयान दिया कि उसकी बहन बीमार रहती थी, उसके इलाज के लिए पैसों की जरूरत थी। उसने अपने जानकार शकील को यह बात बताई। शकील ने कहा कि शरीर में एक नाड़ी होती है, जिसे निकाल भी लिया जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता। वह नाड़ी निकलवाने के लिए उसे दो लाख रुपये दिला देगा। शकील, इकरामुद्दीन को लेकर चंडीगढ़ के खुड्डा लाहौरा आ गया। सर्जरी से पहले उसका चेकअप हुआ। लैब टेक्नीशियन सचिन ने उसका ब्लड सैंपल लिया। इसके बाद उसका सूर्या किडनी केयर सेंटर में ऑपरेशन हुआ, फिर उसे छुट्टी दे दी गई। इकरामुद्दीन को ऑपरेशन के एवज में एक लाख रुपये देकर अपने घर लौट जाने की धमकी दी गई। वहां पेट दर्द होने पर उसने चेकअप कराया तो पता चला कि उसकी एक किडनी धोखे से निकाल ली गई है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने और भी कई लोगों के जाली कागजात तैयार कर धोखे से उनकी किडनी बेच दीं। पड़ताल में सामने आया है कि सिल्वर ओक्स और सूर्या किडनी सेंटर के स्टाफ और डाक्टरों ने ह्यूमन ट्रांसप्लांट एक्ट का उल्लंघन किया।
विज्ञापन
इकरामुद्दीन ने लैब टेक्नीशियन सचिन की शिनाख्त की। इसके बाद थाना फेज आठ में सचिन, शकील, विकास, अमिताभ पांडे, उसकी मां मंजू पांडे, भाई अभिषेक आनंद पांडे के खिलाफ परचा दर्ज किया है। सुलतानपुर, यूपी निवासी सचिन उर्फ फागू लाल (मौजूदा निवासी बुड़ैल) को गिरफ्तार कर पुलिस पूछताछ कर रही है। एसएसपी भुल्लर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ट्रैफिक स्वर्णदीप सिंह की अगुवाई में एक टीम बनाई गई है।
बाक्स
इस तरह फांसते थे...
पुलिस तफ्तीश में सामने आया है कि आरोपी डोनर के ब्लड सैंपल लेते जरूर थे, लेकिन उन्हें रेसीपिएंट के ही किसी रिश्तेदार के सैंपल के साथ बदल देते थे ताकि दोनों का डीएनए मैच हो जाए। इकरामुद्दीन के मामले में भी सचिन ने सबके सामने उसका ब्लड सैंपल लिया, लेकिन बाद में अमिताभ से कुछ पैसे लेकर उसने एक रेसीपिएंट अर्चना गोयल के भाई का सैंपल इकरामुद्दीन के सैंपल से बदल दिया।
बाक्स
सचिन कभी नहीं था सूर्या में
सूर्या किडनी केयर सेंटर के एडमिनिस्ट्रेटर जशनजीत ने बयान जारी करके कहा है कि अस्पताल ने नेपाल निवासी सिर्फ दो लोगों की किडनी ट्रांसप्लांट की हैं। दोनों ही मामलों में नेपाल एंबेसी से अनुमति हासिल की गई। जेनेटिक मैचिंग की सुविधा सूर्या में नहीं है, इसलिए यह काम एसआरएल (लैब) से कराया जाता है। एसआरएल लैब सीधे मरीजों के सैंपल लेती है। जिस सचिन का नाम आ रहा है वह एसआरएल का प्रतिनिधित्व करता है। सचिन कभी भी सूर्या किडनी सेंटर का मुलाजिम नहीं रहा है।
बॉक्स
जनवरी में बनी थी एसआईटी
लखनऊ पुलिस द्वारा 25 दिसंबर, 2011 को किडनी कांड के खुलासे की आंच मोहाली तक भी पहुंची थी। लखनऊ पुलिस यहां जांच के लिए आई थी। इसके बाद मोहाली पुलिस ने भी अपनी जांच टीम बनाई थी। 20 जनवरी को मोहाली के डीसी ने जांच के आदेश दिए। इसके बाद एसपी-डी की अगुवाई में एसआईटी बनाई गई थी।
विज्ञापन
एसएसपी गुरप्रीत भुल्लर ने बताया कि जांच में सामने आया है कि कुछ डोनर व रेसीपिएंट स्थायी तौर पर नेपाल के रहने वाले थे। इनका मोहाली का अस्थायी पता देकर सूर्या किडनी सेंटर और सिल्वर ओक्स अस्पताल में इनकी किडनी ट्रांसप्लांट की। इसके लिए दूतावास का लेटर जरूरी है, लेकिन इन केसों में एंबेसी का लेटर नहीं लगाया गया। सिर्फ नेपाल के गृह मंत्रालय की रिपोर्ट ही लगाई गई। इस तरह अस्पतालों ने ह्यूमन ट्रांसप्लांट एक्ट की धारा 6 एफ(ई) का उल्लंघन किया।
विज्ञापन
पड़ताल के दौरान पुलिस को गाजियाबाद निवासी इकरामुद्दीन ने बयान दिया कि उसकी बहन बीमार रहती थी, उसके इलाज के लिए पैसों की जरूरत थी। उसने अपने जानकार शकील को यह बात बताई। शकील ने कहा कि शरीर में एक नाड़ी होती है, जिसे निकाल भी लिया जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता। वह नाड़ी निकलवाने के लिए उसे दो लाख रुपये दिला देगा। शकील, इकरामुद्दीन को लेकर चंडीगढ़ के खुड्डा लाहौरा आ गया। सर्जरी से पहले उसका चेकअप हुआ। लैब टेक्नीशियन सचिन ने उसका ब्लड सैंपल लिया। इसके बाद उसका सूर्या किडनी केयर सेंटर में ऑपरेशन हुआ, फिर उसे छुट्टी दे दी गई। इकरामुद्दीन को ऑपरेशन के एवज में एक लाख रुपये देकर अपने घर लौट जाने की धमकी दी गई। वहां पेट दर्द होने पर उसने चेकअप कराया तो पता चला कि उसकी एक किडनी धोखे से निकाल ली गई है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने और भी कई लोगों के जाली कागजात तैयार कर धोखे से उनकी किडनी बेच दीं। पड़ताल में सामने आया है कि सिल्वर ओक्स और सूर्या किडनी सेंटर के स्टाफ और डाक्टरों ने ह्यूमन ट्रांसप्लांट एक्ट का उल्लंघन किया।
विज्ञापन
इकरामुद्दीन ने लैब टेक्नीशियन सचिन की शिनाख्त की। इसके बाद थाना फेज आठ में सचिन, शकील, विकास, अमिताभ पांडे, उसकी मां मंजू पांडे, भाई अभिषेक आनंद पांडे के खिलाफ परचा दर्ज किया है। सुलतानपुर, यूपी निवासी सचिन उर्फ फागू लाल (मौजूदा निवासी बुड़ैल) को गिरफ्तार कर पुलिस पूछताछ कर रही है। एसएसपी भुल्लर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ट्रैफिक स्वर्णदीप सिंह की अगुवाई में एक टीम बनाई गई है।
बाक्स
इस तरह फांसते थे...
पुलिस तफ्तीश में सामने आया है कि आरोपी डोनर के ब्लड सैंपल लेते जरूर थे, लेकिन उन्हें रेसीपिएंट के ही किसी रिश्तेदार के सैंपल के साथ बदल देते थे ताकि दोनों का डीएनए मैच हो जाए। इकरामुद्दीन के मामले में भी सचिन ने सबके सामने उसका ब्लड सैंपल लिया, लेकिन बाद में अमिताभ से कुछ पैसे लेकर उसने एक रेसीपिएंट अर्चना गोयल के भाई का सैंपल इकरामुद्दीन के सैंपल से बदल दिया।
बाक्स
सचिन कभी नहीं था सूर्या में
सूर्या किडनी केयर सेंटर के एडमिनिस्ट्रेटर जशनजीत ने बयान जारी करके कहा है कि अस्पताल ने नेपाल निवासी सिर्फ दो लोगों की किडनी ट्रांसप्लांट की हैं। दोनों ही मामलों में नेपाल एंबेसी से अनुमति हासिल की गई। जेनेटिक मैचिंग की सुविधा सूर्या में नहीं है, इसलिए यह काम एसआरएल (लैब) से कराया जाता है। एसआरएल लैब सीधे मरीजों के सैंपल लेती है। जिस सचिन का नाम आ रहा है वह एसआरएल का प्रतिनिधित्व करता है। सचिन कभी भी सूर्या किडनी सेंटर का मुलाजिम नहीं रहा है।
बॉक्स
जनवरी में बनी थी एसआईटी
लखनऊ पुलिस द्वारा 25 दिसंबर, 2011 को किडनी कांड के खुलासे की आंच मोहाली तक भी पहुंची थी। लखनऊ पुलिस यहां जांच के लिए आई थी। इसके बाद मोहाली पुलिस ने भी अपनी जांच टीम बनाई थी। 20 जनवरी को मोहाली के डीसी ने जांच के आदेश दिए। इसके बाद एसपी-डी की अगुवाई में एसआईटी बनाई गई थी।