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चंडीगढ़ से चुनाव लड़ने की इच्छा तो थी : मनीष तिवारी
Chandigarh
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। अगर यह कहूं कि चंडीगढ़ से कभी चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं थी तो झूठ होगा। हां कभी ऐसी इच्छा थी लेकिन अब वह मर गई है। मुझे जिस संसदीय क्षेत्र की जनता ने चुना है, मैं अब उसी की सेवा करना चाहता हूं। हालांकि चुनाव में सीटों का बंटवारा राष्ट्रीय नेतृत्व ही तय करता है। इसलिए नेतृत्व का जो आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा। यह कहना है लुधियाना से कांग्रेस सांसद और सूचना प्रसारण राज्य मंत्री मनीष तिवारी का।
रेलमंत्री पवन बंसल चंडीगढ़ के मौजूदा सांसद हैं। मनीष तिवारी भी इसी शहर में पले-बढ़े हैं और यहीं से उन्होंने राजनीति की एबीसी सीखी है। इसलिए केंद्र में मंत्री बनने के बाद शनिवार को जब पहली बार शहर के मीडिया से मुखातिब हुए तो एक सवाल से दिल में वर्षों से दबे अरमान अपने आप बाहर आ गए। तिवारी से जब चंडीगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ने के संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने राजनीति के एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह ही जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में चंडीगढ़ की जनता के पास एक कुशल नेतृत्व है। यहां से चुनाव लड़ने की इच्छा भी अब मर चुकी है। लुधियाना की जनता ने मुझे चुना है और भरोसा किया है। उसी के बलबूते केंद्र में मुझे वजीर की कुर्सी मिली है। इसलिए मेरी इच्छा तो अगला चुनाव भी वहीं से लड़ने की है।
पंजाब के हक की वकालत
यहां प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने चंडीगढ़ पर पंजाब के हक की भी मजबूत वकालत की। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की साझा राजधानी है। जो व्यवस्था यूटी प्रशासन को चलाने के लिए बनाई गई थी उसको ही मजबूती से अपनाया जाना चाहिए। मालूम हो कि चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा की साठ तथा चालीस फीसदी की प्रशासनिक पदों पर हिस्सेदारी का नियम है। इसके बावजूद यूटी कैडर के अधिकारियों की भी यहां नियुक्ति की जा रही है।
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रेलमंत्री पवन बंसल चंडीगढ़ के मौजूदा सांसद हैं। मनीष तिवारी भी इसी शहर में पले-बढ़े हैं और यहीं से उन्होंने राजनीति की एबीसी सीखी है। इसलिए केंद्र में मंत्री बनने के बाद शनिवार को जब पहली बार शहर के मीडिया से मुखातिब हुए तो एक सवाल से दिल में वर्षों से दबे अरमान अपने आप बाहर आ गए। तिवारी से जब चंडीगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ने के संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने राजनीति के एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह ही जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में चंडीगढ़ की जनता के पास एक कुशल नेतृत्व है। यहां से चुनाव लड़ने की इच्छा भी अब मर चुकी है। लुधियाना की जनता ने मुझे चुना है और भरोसा किया है। उसी के बलबूते केंद्र में मुझे वजीर की कुर्सी मिली है। इसलिए मेरी इच्छा तो अगला चुनाव भी वहीं से लड़ने की है।
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पंजाब के हक की वकालत
यहां प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने चंडीगढ़ पर पंजाब के हक की भी मजबूत वकालत की। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की साझा राजधानी है। जो व्यवस्था यूटी प्रशासन को चलाने के लिए बनाई गई थी उसको ही मजबूती से अपनाया जाना चाहिए। मालूम हो कि चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा की साठ तथा चालीस फीसदी की प्रशासनिक पदों पर हिस्सेदारी का नियम है। इसके बावजूद यूटी कैडर के अधिकारियों की भी यहां नियुक्ति की जा रही है।
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