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प्रार्थना महोत्सव: टांग खींचने वालों को पास्टर की खरी-खरी, बोले- 'लोग चाहते हैं कि आप बढ़ें, पर उनसे आगे नहीं'
Sat, 28 Jan 2023 11:22 PM IST
ललित कुमार सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Sat, 28 Jan 2023 11:22 PM IST
सार
रायपुर राजधानी के सेंट जोसफ कैथेड्रल बैरनबाजार के सभागार में अजमेर के प्रवचनकर्ता पास्टर सचिव क्लाइव और डॉ. नीतू पी. चौधरी चंडीगढ़ का तीन दिवसीय प्रार्थना महोत्सव शुरू हुआ।
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पास्टर क्लाइव और डॉ. नीतू पी चौधरी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
रायपुर राजधानी के सेंट जोसफ कैथेड्रल बैरनबाजार के सभागार में अजमेर के प्रवचनकर्ता पास्टर सचिव क्लाइव और डॉ. नीतू पी. चौधरी चंडीगढ़ का तीन दिवसीय प्रार्थना महोत्सव शुरू हुआ। आयोजक डॉ. आशीष चौरसिया और राजेश जाटवर आदि ने पास्टर सचिन और प्रवचनकर्ता चौधरी की अगवानी की। इस मौके पर यूपी के मुरादाबाद की मैसी परिवार क्वायर ने प्रभु के भजन सुनाए।
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पास्टर क्लाइव ने समाज में एक- दूसरे की टांग खींचने वालों और धर्म स्थलों को राजनीति का अड्डा बनाने वालों को खरी-खरी सुनाई। उन्होंने मसीहीजनों से कहा कि समाज में लोग चाहते हैं कि आप आगे बढ़ें। आपकी तरक्की हो, लेकिन वे ये नहीं चाहते कि आप उनसे भी आगे बढ़ जाएं। पास्टर ने कहा कि जैसे ही उन्हें लगता है कि आप आत्मिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। प्रभु आपको आशीष दे रहे हैं। समाज में आपकी इज्जत हो रही है। आप समाज की भलाई के लिए अच्छे काम कर रहे हैं। लोग आपकी तारीफ कर रहे हैं। सराहना कर रहे हैं। आपकी प्रार्थनाओं और प्रभु के संदेशों का लोगों पर असर हो रहा है। वे आपसे जलन रखने लगते हैं। वे आपके दुश्मन बन जाते हैं। वे आपके खिलाफ न्यूक्लियर बम इस्तेमाल करने का प्रयास करते हैं यानी आपको बदनाम करने की कोशिश करते हैं।
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'प्रभु यीशु से भी जलने लगे थे उनके विरोधी'
पास्टर ने कहा कि ये बातें नई नहीं हैं। जब प्रभु यीशु मसीह इस दुनिया में थे। सेवकाई कर रहे थे। धर्म के काम कर रहे थे। आश्चर्यकर्म कर रहे थे। उनके वचनों यानी सुसमाचार प्रचार का प्रभाव समाज पर पड़ रहा था। तब शास्त्री, सदूकी व फारसी उनसे जलने लगे थे। वे उसके खिलाफ सम्मति करने लगे कि कुछ तो करो, सारा संसार उसके पीछे हो चला है। धर्मज्ञाता और समाज के विद्वान होते हुए भी वे उसे घात करने की कोशिश में लग गए। प्रभु के खिलाफ उसके प्रिय शिष्य को ही लालच दिया गया। जिस चेले ने प्रभु के साथ जीने -मरने की कसम खाई थी, वह ही सबसे पहले पलट गया और भाग खड़ा हुआ। आप पर भी जब मसीबत आती है तो सबसे पहले आपके नियरेस्ट-डियरेस्ट ही साथ छोड़ते हैं। पौलुस प्रेरित को आराधना के सरकार ने वचन सुनाने बुलाया। काफी लोग सुसमाचार सुनने आए। अगले सब्त के दिन के लिए फिर पौलुस को सुसमाचार सुनाने आमंत्रित किया गया। सारा शहर आराधनालय के बाहर जमा हो गया।
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'संकट में भी प्रभु पर भरोसा रखो'
आराधनालय का मुखिया पौलुस से जलने लगा कि मुझे सुनने तो लोग आते नहीं। इसे सुनने जनमानस उमड़ पड़ा। ऐसा ही प्रभु यीशु के साथ होता था उन्हें सुनने इतनी भीड़ लग जाती थी। शास्त्रियों -फरीसियों को यही बुरा लगता था कि हमें सुनने तो आराधनालय में कम लोग ही पहुंचते हैं। इसके पीछे संसार क्यों? यहीं से होती है आत्मिक दुश्मनी की शुरुआत। पास्टर क्लाइव ने विश्वासियों से कहा कि संकट के वक्त विपरीत समय में भी प्रभु पर अटल भरोसा रखे।