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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Pt. Dhirendra Shastri is my junior said Premasai Maharaj, Maa Matangi Divyadham

'मेरे जूनियर हैं पं. धीरेंद्र शास्त्री': प्रेमासाई बोले- पहले से लगाता रहा हूं दिव्य और प्रेत दरबार, जानें

Fri, 16 Oct 2026 12:33 PM IST
Lalit Kumar Singh Lalit Kumar Singh
Updated Fri, 16 Oct 2026 12:33 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दिव्य दरबार और प्रेत दरबार को लेकर रार छिड़ी हुई है। प्रेत दरबार लगाने की अनुमति नहीं मिलने पर मां मातंगी दिव्यधाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमासाईं महाराज पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री को लेकर बड़ा बयान दिया है।

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Pt. Dhirendra Shastri is my junior said Premasai Maharaj, Maa Matangi Divyadham
ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दिव्य दरबार और प्रेत दरबार को लेकर रार छिड़ी हुई है। प्रेत दरबार लगाने की अनुमति नहीं मिलने पर मां मातंगी दिव्यधाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमासाईं महाराज ने पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंड़ित धीरेंद्र शास्त्री हैं मेरे जूनियर हैं। इनसे पहले मैं प्रेत और दिव्य दरबार लगा चुका हूं। टीवी पर भी ये कार्यक्रम चल चुके हैं। उनके प्रेत दरबार को रायपुर में अनुमति मिलती रही है, तो मुझे क्यों नहीं दी जा रही? मेरे प्रेत दरबार पर क्यों रोक क्यों लगाई जा रही है? मेरे साथ ही भेदभाव क्यों किया जा रहा है?
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निशुल्क है आयोजन
उन्होंने कहा कि यह आयोजन पूरी तरह से निशुल्क है। कोई दान नहीं लिया जायेगा और कोई दान देना भी चाहेगा तो नहीं लिया जायेगा। दान पेटी भी नहीं लगाई जायेगी। सुबह 8 से रात 10 बजे तक लोगों की पर्ची निकाली जायेगी। रायपुर स्थित अवधपुरी मैदान गुढ़ियारी में 24 से 28 अक्टूबर तक दिव्य दरबार लगायेंगे। वहीं प्रेत दरबार को लेकर संशय की स्थिति है। स्थानीय प्रशासन इसे अनुमति नहीं दे रहा है। अनुमति नहीं देने का मुद्दा प्रदेश में गरमाया हुआ है। मामले में जमकर राजनीति की जा रही है। इस दिव्यधाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमासाईं महाराज ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि धार्मिक आयोजनों को लेकर उनसे भेदभाव क्यों किया जा रहा है? जब बागेश्वर धाम के कार्यक्रमों में दिव्य दरबार और प्रेत दरबार लगते हैं, तब स्थानीय प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं होती और कार्यक्रमों पर रोक नहीं लगाई जाती। मेरे कार्यक्रम को अनुमति नहीं देना स्थानीय संतों का और मेरा अपमान है। इस तरह के धार्मिक आयोजन की अनुमति देने में आपत्ति क्यों है?
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अनुमति नहीं मिली तो करूंगा आंदोलन
महाराज ने चेतावनी दी कि यदि दिव्य दरबार के आयोजन की अनुमति नहीं मिली, तो वे उसी स्थान पर अन्न त्याग कर अनशन पर बैठ जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस धार्मिक आयोजन में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में लगभग 35 से 40 हजार श्रद्धालु शामिल हो सकते हैं। ऐसे में अनुमति को लेकर प्रशासन के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं। महाराज जी ने कहा कि उनका आंदोलन सरकार या मुख्यमंत्री के खिलाफ नहीं होगा, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली के विरोध में होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अच्छे हैं और सरकार भी अच्छी है। मुख्यमंत्री से उनकी भेंट भी हुई है और मुख्यमंत्री की ओर से उन्हें आश्वासन भी मिला है।




महाराज कहा कि 24 से 28 अक्टूबर तक अवधपुरी मैदान गुढ़ियारी में यदि पहली बार दिव्य दरबार आयोजित करने में प्रशासन को कोई परेशानी है, तो वे इस बार अनुमति नहीं मिलने की स्थिति को स्वीकार कर सकते हैं। लेकिन भविष्य में नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। यदि एक संत को इस प्रकार के आयोजन की अनुमति दी जाती है, तो दूसरे संतों के साथ भी समान व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर संतों को रोकने का प्रयास क्यों किया जा रहा है और इस तरह का भेदभाव क्यों किया जा रहा है ?








सरकार को बदनाम करने की कोशिश
महाराज ने कहा कि धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाने या अनुमति के मामले में भेदभाव किए जाने से सरकार और मुख्यमंत्री की छवि प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस तरह की परिस्थितियां पैदा कर मुख्यमंत्री का नाम खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य मुख्यमंत्री या सरकार का विरोध करना नहीं, बल्कि प्रशासन से समानता और निष्पक्षता की मांग करना है। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों की अनुमति के मामले में सभी संतों और आयोजकों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मामले में स्पष्ट निर्णय लिया जाए, ताकि किसी भी संत या धार्मिक आयोजन के साथ भेदभाव की स्थिति पैदा न हो। 
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