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Chhattisgarh News: वन अपराधों पर शिकंजा कसने की तैयारी, वनकर्मियों को मिला कानूनी प्रशिक्षण
Sun, 04 Jan 2026 12:16 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 04 Jan 2026 12:16 PM IST
सार
कई मामलों में अपराधियों की गिरफ्तारी के बावजूद तकनीकी और कानूनी कमजोरियों के कारण वे सजा से बच निकलते हैं। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा कर्मचारियों के लिए विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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वन विभाग का विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में अवैध शिकार और अन्य वन अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए वन विभाग ने अब कानूनी मजबूती पर जोर देना शुरू कर दिया है। कई मामलों में अपराधियों की गिरफ्तारी के बावजूद तकनीकी और कानूनी कमजोरियों के कारण वे सजा से बच निकलते हैं। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा कर्मचारियों के लिए विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
वन विभाग के इस प्रयास के तहत दिसंबर माह में दुर्ग वनमंडल कार्यालय के सभागार में एक दिवसीय विधिक साक्षरता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम “प्रोटेक्ट टुडे एंड सिक्योर टुमारो” परियोजना के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यशाला में जिला न्यायालय दुर्ग के काउंसलर चंद्राकर ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कानूनों की विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वनकर्मियों को वन कानूनों की व्यावहारिक समझ देना रहा, ताकि वे प्रकरणों को मजबूत तरीके से तैयार कर सकें और अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। कार्यशाला में भारतीय वन अधिनियम 1927 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के प्रमुख प्रावधानों पर विशेष चर्चा की गई। आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया गया।
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इसके साथ ही राजस्व क्षेत्रों में होने वाले वन अपराधों की रोकथाम, विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया और अदालती मामलों में अपनाई जाने वाली सावधानियों पर भी मार्गदर्शन दिया गया। नालसा के विशेषज्ञों ने “क्या करें और क्या न करें” जैसे व्यावहारिक पहलुओं पर सुझाव दिए, जिससे वनकर्मी न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि से बच सकें।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दुर्ग और धमधा के वन परिक्षेत्र अधिकारी सहित वनमंडल के कार्यपालिक और क्षेत्रीय अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। वन विभाग का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से कर्मचारियों की कानूनी दक्षता बढ़ेगी और वन तथा वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
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वन विभाग के इस प्रयास के तहत दिसंबर माह में दुर्ग वनमंडल कार्यालय के सभागार में एक दिवसीय विधिक साक्षरता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम “प्रोटेक्ट टुडे एंड सिक्योर टुमारो” परियोजना के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यशाला में जिला न्यायालय दुर्ग के काउंसलर चंद्राकर ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कानूनों की विस्तार से जानकारी दी।
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प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वनकर्मियों को वन कानूनों की व्यावहारिक समझ देना रहा, ताकि वे प्रकरणों को मजबूत तरीके से तैयार कर सकें और अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। कार्यशाला में भारतीय वन अधिनियम 1927 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के प्रमुख प्रावधानों पर विशेष चर्चा की गई। आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया गया।
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इसके साथ ही राजस्व क्षेत्रों में होने वाले वन अपराधों की रोकथाम, विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया और अदालती मामलों में अपनाई जाने वाली सावधानियों पर भी मार्गदर्शन दिया गया। नालसा के विशेषज्ञों ने “क्या करें और क्या न करें” जैसे व्यावहारिक पहलुओं पर सुझाव दिए, जिससे वनकर्मी न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि से बच सकें।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दुर्ग और धमधा के वन परिक्षेत्र अधिकारी सहित वनमंडल के कार्यपालिक और क्षेत्रीय अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। वन विभाग का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से कर्मचारियों की कानूनी दक्षता बढ़ेगी और वन तथा वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।