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Raipur: दो करोड़ की एफडी का झांसा, मेडिकल भुगतान का बहाना; कार कंपनी का मालिक बनकर बैंक मैनेजर से ठगे 4.99 लाख

Tue, 25 Aug 2026 02:02 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Tue, 25 Aug 2026 02:02 PM IST
सार

आरोपी ने खुद को कार कंपनी का संचालक बताकर 2 करोड़ रुपये की एफडी कराने का झांसा दिया और भरोसा जीता। इसके बाद उसने आपातकालीन मेडिकल भुगतान के बहाने धोखाधड़ी कर दूसरे बैंक खाते में राशि स्थानांतरित करवा ली।

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Posing as a car company director, he duped a bank manager and transferred Rs 4.99 lakh to another account
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी के तेलीबांधा थाना क्षेत्र स्थित भारतीय स्टेट बैंक की आईजीकेवी शाखा की बैंक प्रबंधक से जालसाजों ने 4 लाख 99 हजार रुपये की ठगी की। आरोपी ने खुद को कार कंपनी का संचालक बताकर 2 करोड़ रुपये की एफडी कराने का झांसा दिया और भरोसा जीता। इसके बाद उसने आपातकालीन मेडिकल भुगतान के बहाने धोखाधड़ी कर दूसरे बैंक खाते में राशि स्थानांतरित करवा ली। पीड़िता श्वेता शर्मा की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त को श्वेता शर्मा के मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का कॉल आया। फोन न उठने पर उस व्यक्ति ने मैसेज भेजकर संपर्क साधा। बातचीत में आरोपी ने अपना नाम प्रशांत मंधान और खुद को इंटारा कार कंपनी का संचालक बताया इसके बाद, 21 अगस्त को उसने बैंक में करीब 2 करोड़ रुपये की एफडी करवाने की इच्छा जाहिर करते हुए ब्याज दरों की जानकारी मांगी। प्रबंधक ने उसे 6.45 प्रतिशत ब्याज दर की जानकारी दी, जिसके बाद आरोपी ने सोमवार को स्वयं बैंक आकर प्रक्रिया पूरी करने की बात कही।
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जालसाज ने 24 अगस्त को दोबारा बैंक प्रबंधक से संपर्क किया। उसने दावा किया कि उसकी चेकबुक खत्म हो चुकी है और उसे तुरंत अस्पताल में मेडिकल भुगतान करना आवश्यक है। आरोपी ने प्रबंधक से 4 लाख 99 हजार रुपये आरटीजीएस के माध्यम से भेजने का अनुरोध किया। बैंक प्रबंधक के कहने पर आरोपी ने फर्जी ई-मेल आईडी का उपयोग करके भुगतान का आवेदन पत्र भेज दिया। प्रबंधक ने दस्तावेजों तथा हस्ताक्षरों का मिलान करने के बाद दोपहर करीब 1:20 बजे यह रकम मुंबई के कुर्ला स्थित केनरा बैंक के खाते में स्थानांतरित कर दी।
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रकम हस्तांतरित होने के करीब 40 मिनट बाद संबंधित कार कंपनी के वास्तविक प्रबंधक का फोन आया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी की तरफ से ऐसा कोई भुगतान आवेदन पत्र जारी नहीं किया गया है। कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड की पड़ताल की गई, तो आरोपी का मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी भी दर्ज नहीं मिले। इसके बाद बैंक प्रबंधक को साइबर ठगी का आभास हुआ। तेलीबांधा थाना पुलिस अब मोबाइल नंबर, ई-मेल और बैंक खाते के तकनीकी साक्ष्यों को खंगालकर आरोपी की पहचान करने तथा लेनदेन का सुराग लगाने में जुटी है।
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