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Dhamtari : इन आतंकी बंदरों से बचाओ! घरों में घुसकर मचा रहे उत्पात, छतों पर डंडा लेकर ग्रामीण कर रहे पहरेदारी

Sat, 05 Nov 2022 03:40 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धमतरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धमतरी Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Sat, 05 Nov 2022 03:40 PM IST
सार

धमतरी वन मंडल के एसडीओ टीआर वर्मा का कहना है कि बंदरो से नुकसान को लेकर मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। न ही बंदरो को भगाने के लिए प्रवधान है। ऐसे में गांव वाले खुद आपस में बैठकर तय कर लें और गुलेल के माध्यम से उन्हें भगाते रहें। 

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people are guarding roof with sticks to avoid monkeys in chhattisgarh
छत पर डंडा लेकर बंदरों को भगाता ग्रामीण। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

छत्तीसगढ़ के धमतरी में बंदरों का उत्पात जारी है। लोगों के घरों में घुसकर सामानों की तोड़फोड़ करने के साथ ही फसलों और बाड़ी को तहस-नहस कर रहे हैं। सड़क चलते राहगीरों पर हमला कर देते हैं। इसे लेकर ग्रामीणों ने कई बार वन विभाग से शिकायत भी की। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके चलते अब ग्रामीण खुद ही डंडे लेकर छतों पर पहरेदारी कर बंदरों को भगाने में जुटे हैं। 

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दरअसल मगरलोड क्षेत्र के ग्रामों में बंदर करीब चार-पांच साल से लोगों को परेशान कर रहे हैं, लेकिन उनका यह उत्पात अब बढ़ गया है। अब बंदर लोगों के घरों के अंदर तक पहुंचने लगे हैँ। घर में रखे सामान को तोड़ देते हैं। छतों पर फैले कपड़े उठा ले जाते हैं तो चादरों को फाड़ रहे हैं। घरों में बनी बाड़ियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। फल-सब्जी सब चौपट होने के चलते लोगों का गुस्सा भी अब भड़कने लगा है। 
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ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के डर से छत पर कपड़े फैलाना और सामान रखना तक छोड़ दिया है। कच्चे घरों की छतों को बंदरों तोड़-फोड़ कर रहे हैं। खाने-पीने के सामान बिखेर देते हैं। बंदरों के झुंड के झुंड घरों पर चढ़ जाते हैं और उत्पात मचाते हैं। इनके चलते हमें घर के दरवाजे और खिड़की तक बंद कर के रखना पड़ता है। हमने वन विभाग से भी बंदरों को खदेड़ने की मांग की है, पर सुनवाई नहीं हुई। 
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वहीं धमतरी वन मंडल के एसडीओ टीआर वर्मा का कहना है कि बंदरो से नुकसान को लेकर मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। न ही बंदरो को भगाने के लिए प्रवधान है। ऐसे में गांव वाले खुद आपस में बैठकर तय कर लें और गुलेल के माध्यम से उन्हें भगाते रहें। इस इलाके में हाथियों का भी उत्पात है। अब बंदरों के भी आ जाने से लोगों के लिए मुसीबत बढ़ गई है। इसके समाधान के लिए चौकीदारी जारी है। 

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