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छत्तीसगढ़: खूंखार नक्सली कट्टम सुदर्शन की मौत, कांग्रेस नेताओं पर हमले की रची थी साजिश

Sun, 04 Jun 2023 12:36 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर Published by: ललित कुमार सिंह Updated Sun, 04 Jun 2023 12:36 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ में नक्सली नेता और सेंट्रल कमेटी के सदस्य आनंद उर्फ कट्टम सुदर्शन का निधन हो गया है।

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Naxalite Kattam Sudarshan death in Chhattisgarh, Conspiracy was hatched to attack Congress leaders
नक्सली कट्टम सुदर्शन की मौत - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

छत्तीसगढ़ में नक्सली नेता और सेंट्रल कमेटी के सदस्य आनंद उर्फ कट्टम सुदर्शन का निधन हो गया है। उस पर दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ के जवानों पर हमला करने का आरोप था। इस बड़े नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे। इस घटना से पूरा देश हिल गया था। अविभाजित दंतेवाड़ा के ताड़मेटला (अब सुकमा जिला में) में 6 अप्रैल 2010 को सीआरपीएफ के 75 और जिला बल के एक जवान शहीद हो गए थे। इस घटना से पूरा देश हिल गया था। एक साथ 76 शहीद जवानों का पार्थिव शरीर देखकर पूरा देश रो उठा था। इस घटना से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई थी। इतना ही नहीं सुदर्शन ने ही 25 मई 2013 को झीरम में कांग्रेस नेताओं पर हमले की साजिश भी रची थी। 

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उसकी मौत को लेकर बताया जाता है कि 31 मई को दिल का दौरा पड़ने से उसका निधन हो गया। इस संबंध में माओवादियों ने प्रेस नोट जारी कर इसकी घोषणा की है। सुदर्शन गृहनगर आदिलाबाद जिले के बेलमपल्ली में कन्नलबस्ती का रहने वाला था। वह वारंगल में पॉलिटेक्निक में पढाई की थी और साम्यवादी विचारधारा की ओर आकर्षित होकर वर्ष 1980 में नक्सली आंदोलन में शामिल हो गया था। उसके बाद से ही वह छिपकर नक्सली गतिविधियों को अंजाम देते रहा। वह नक्सलियों की पार्टी में केंद्रीय समिति का सदस्य था। उसे आनंद मोहन, वीरेंद्रजी, कट्टम के नाम से भी जाना जाता है। अक्सर नक्सली इन्हीं नामों से उसे बुलाते थे। 
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मंचिरयाला जिले के कट्टम सुदर्शन 1980 में कोंडापल्ली सीतारमैया के नेतृत्व वाले पीपुल्स वार ग्रुप में शामिल हुआ था। आंध्र प्रदेश राज्य सहित छत्तीसगढ़ के दंडकारण्यम के आदिवासी इलाके में नक्सली आंदोलन के विस्तार में उसकी अहम भूमिका थी।
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नक्सली हमले का बड़ा मास्टरमाइंड
सुकमा में हुए नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे। इस बड़े नक्सली हमले का वो बड़ा मास्टरमाइंड माना जाता है। उसे गुरिल्ला युद्ध का रणनीतिकार भी कहा जाता है। उसकी पत्नी साधना भी नक्सली थी। कई वर्ष पहले पुलिस-नक्सली एनकाउंटर में उसकी मौत हो गई थी। 


17 आपराधिक मामले थे दर्ज
उसके खिलाफ कुल 17 आपराधिक मामले दर्ज थे। वह बीते तीन दशक से उत्तरी तेलंगाना से छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य के आदिवासी इलाकों में नक्सली आंदोलन का नेतृत्व कर रहा था। वह केंद्रीय कमेटी से लेकर छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में नक्सल संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहा था। उसकी मौत से नक्सलियों को छत्तीसगढ़ में बड़ा छटका लगा है। 

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