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बंदूक छोड़ थामा ट्रैक्टर का स्टीयरिंग: पुनर्वास केंद्र में हुनर सीख रहे मुख्यधारा में लौटे 40 सरेंडर नक्सली
Wed, 29 Apr 2026 10:11 AM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, नारायणपुर
अमर उजाला नेटवर्क, नारायणपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Wed, 29 Apr 2026 10:11 AM IST
सार
Narayanpur Naxal News: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में हिंसा और आतंक का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सली अब 'नवनिर्माण' की राह पर निकल पड़े हैं।
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बंदूक छोड़ थामा ट्रैक्टर का स्टीयरिंग
- फोटो : Amar ujala digital
विस्तार
Narayanpur Naxal News: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में हिंसा और आतंक का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सली अब 'नवनिर्माण' की राह पर निकल पड़े हैं। जिले के लाइवलीहुड कॉलेज स्थित पुनर्वास केंद्र में इन लोगों को केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का आधार भी मिल रहा है। कभी बंदूक थामने वाले इन हाथों ने अब खेतों की खुशहाली के लिए ट्रैक्टर का स्टीयरिंग थामना शुरू कर दिया है।
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लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ाव
प्रशासनिक पहल के तहत पुनर्वासितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। इसी कड़ी में हाल ही में 8 पुनर्वासितों को वोटर आईडी कार्ड वितरित किए गए, जिससे वे अब लोकतंत्र का हिस्सा बन गए हैं। इसके अतिरिक्त, 40 लोगों के फॉर्म-6 भरवाकर उन्हें मतदाता सूची से जोड़ने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। यह कदम उन्हें केवल पहचान ही नहीं, बल्कि समाज में बराबरी का हक भी दिला रहा है।
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कलेक्टर की पहल पर शुरू हुआ प्रशिक्षण
पुनर्वास केंद्र के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के समक्ष 40 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने ट्रैक्टर चलाने और उसकी मरम्मत सीखने की इच्छा जताई। कलेक्टर ने इस सकारात्मक पहल को तुरंत मंजूरी दी और सोमवार से ही प्रशिक्षण कार्यक्रम का श्रीगणेश कर दिया।विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की देखरेख में ये सभी लोग अब ट्रैक्टर की तकनीकी बारीकियों और रख-रखाव का प्रशिक्षण ले रहे हैं। गौरतलब है कि इनमें से कई ऐसे हैं जिन्होंने पूर्व में साइकिल तक नहीं चलाई थी, लेकिन आज वे पूरी गंभीरता के साथ आधुनिक कृषि यंत्रों का कौशल सीख रहे हैं।
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आत्मनिर्भरता से उज्ज्वल भविष्य की ओर
यह प्रशिक्षण केवल कौशल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन को नई दिशा देने वाला माध्यम है। खेती-किसानी और परिवहन के क्षेत्र में इस कौशल से उन्हें न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हो सकेंगे। अतीत की अस्थिरता और डर के साये से निकलकर अब इन लोगों के चेहरों पर आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति स्पष्ट उम्मीदें देखी जा सकती हैं। नारायणपुर का यह केंद्र आज केवल एक पुनर्वास स्थल नहीं, बल्कि विश्वास और बदलाव का एक आदर्श उदाहरण बनकर उभरा है। यह साबित करता है कि सही अवसर और सहयोग मिले, तो भटका हुआ हर व्यक्ति समाज की प्रगति में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकता है।