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राजनांदगांव: 29 साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़े म्यूल बैंक खाते का खुलासा, 52 लाख का वित्तीय लेनदेन
Fri, 18 Sep 2026 04:44 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 18 Sep 2026 04:44 PM IST
सार
पुलिस की जांच में 29 साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़े म्यूल बैंक खाते का खुलासा हुआ है। खाते में करीब 52 लाख रुपये का वित्तीय लेनदेन मिला है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजनांदगांव पुलिस की जांच में एक ही बैंक खाते के जरिये 52 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और 29 ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों का बड़ा मामला सामने आया है। समन्वय पोर्टल पर पड़ताल के दौरान कोतवाली थाना पुलिस ने इस म्यूल बैंक खाते और उससे जुड़े संदिग्ध नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
ठगी की शिकायत से खुला मामला
इस मामले की शुरुआत ऑनलाइन साइबर शिकायत के साथ हुई थी। शिकायत में पीड़ित व्यक्ति से साइबर फ्रॉड के जरिये ठगे गए 30 हजार रुपये की राशि बंधन बैंक के एक खाते में जमा होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद, जिले में लेयर-1 म्यूल बैंक खातों की विशेष पड़ताल की जा रही थी। इसी जांच प्रक्रिया के दौरान कोतवाली थाना क्षेत्र से जुड़े इस बैंक खाते का संदिग्ध कनेक्शन उजागर हुआ।
ज्वेलर्स फर्म और खाताधारकों की भूमिका
कोतवाली थाना प्रभारी उपेन्द्र शाह के अनुसार संबंधित बैंक खाते का विवरण जांचने पर उसमें लगभग 52 लाख रुपये का कुल वित्तीय लेनदेन पाया गया। इसके बाद समन्वय पोर्टल पर पड़ताल करने पर 29 ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें इसी खाते से जुड़ी पाई गईं। पुलिस जांच में यह खाता मेसर्स कवासा ज्वेलर्स प्रा. लि. के नाम पर पंजीकृत मिला। पुलिस अब खाते के स्वामी बालचंद भुआर्य और राकेश कुमार सिन्हा की भूमिका की सूक्ष्मता से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त राशि किन हालात में इस खाते में आई और उसका आगे किस तरह उपयोग या ट्रांसफर किया गया।
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संदिग्ध लोगों की भूमिका की जांच
पुलिस ने बैंक दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन की जांच के बाद मामले में भारतीय न्याय संहिता के तहत केस दर्ज किया है। अब खाते से जुड़े अन्य बैंक खातों, दर्ज मोबाइल नंबरों और संदिग्ध लोगों की भूमिका की बारीकी से जांच चल रही है। साइबर अपराध में ठगी की रकम सीधे अपने खाते में मंगाने के बजाय दूसरे बैंक खातों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें म्यूल अकाउंट कहते हैं। पुलिस का कहना है कि जो खाताधारक जानबूझकर या संदिग्ध हालात में ठगी की राशि प्राप्त करने, छिपाने या उपयोग में मदद करते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
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ठगी की शिकायत से खुला मामला
इस मामले की शुरुआत ऑनलाइन साइबर शिकायत के साथ हुई थी। शिकायत में पीड़ित व्यक्ति से साइबर फ्रॉड के जरिये ठगे गए 30 हजार रुपये की राशि बंधन बैंक के एक खाते में जमा होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद, जिले में लेयर-1 म्यूल बैंक खातों की विशेष पड़ताल की जा रही थी। इसी जांच प्रक्रिया के दौरान कोतवाली थाना क्षेत्र से जुड़े इस बैंक खाते का संदिग्ध कनेक्शन उजागर हुआ।
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ज्वेलर्स फर्म और खाताधारकों की भूमिका
कोतवाली थाना प्रभारी उपेन्द्र शाह के अनुसार संबंधित बैंक खाते का विवरण जांचने पर उसमें लगभग 52 लाख रुपये का कुल वित्तीय लेनदेन पाया गया। इसके बाद समन्वय पोर्टल पर पड़ताल करने पर 29 ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें इसी खाते से जुड़ी पाई गईं। पुलिस जांच में यह खाता मेसर्स कवासा ज्वेलर्स प्रा. लि. के नाम पर पंजीकृत मिला। पुलिस अब खाते के स्वामी बालचंद भुआर्य और राकेश कुमार सिन्हा की भूमिका की सूक्ष्मता से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त राशि किन हालात में इस खाते में आई और उसका आगे किस तरह उपयोग या ट्रांसफर किया गया।
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संदिग्ध लोगों की भूमिका की जांच
पुलिस ने बैंक दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन की जांच के बाद मामले में भारतीय न्याय संहिता के तहत केस दर्ज किया है। अब खाते से जुड़े अन्य बैंक खातों, दर्ज मोबाइल नंबरों और संदिग्ध लोगों की भूमिका की बारीकी से जांच चल रही है। साइबर अपराध में ठगी की रकम सीधे अपने खाते में मंगाने के बजाय दूसरे बैंक खातों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें म्यूल अकाउंट कहते हैं। पुलिस का कहना है कि जो खाताधारक जानबूझकर या संदिग्ध हालात में ठगी की राशि प्राप्त करने, छिपाने या उपयोग में मदद करते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।