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Kanker News: ढोल-नगाड़े लेकर निकले आदिवासी, बोले- हमारी बातें नहीं सुनते, गूंगा-बहरा विधायक कुछ तो बोलो
Sun, 16 Jul 2023 08:28 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कांकेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कांकेर
Published by: मोहनीश श्रीवास्तव
Updated Sun, 16 Jul 2023 08:28 PM IST
सार
कांकेर में रविवार को आदिवासी समाज के युवाओं ने अनोखा प्रदर्शन किया। पारंपरिक वेशभूषा में आदिवासी युवक-युवतियों ने हाथ में नारे लिखी तख्तियां पकड़ रखी थीं। इस पर गूंगा बहरा विधायक कुछ तो बोलो का स्लोगन लिखा था।
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हाथों में तख्तियां लिए प्रदर्शन करते आदिवासी।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के कांकेर में रविवार को आदिवासी समाज के युवाओं ने अनोखा प्रदर्शन किया। पारंपरिक वेशभूषा में आदिवासी युवक-युवतियों ने हाथ में नारे लिखी तख्तियां पकड़ रखी थीं। इस पर गूंगा बहरा विधायक कुछ तो बोलो का स्लोगन लिखा था। ढोल-नगाड़े बजाते आदिवासी समाज के लोगों ने गोंडवाना भवन से विधायक निवास तक रैली निकाली। समाज का आरोप है कि एक महीने में चार बार आवेदन-निवेदन देकर अपनी मांगें रख चुके हैं, लेकिन हमारे चुने जनप्रतिनिधि ही हमारी बात नहीं सुनते।
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सर्व आदिवासी समाज युवल प्रभाग के अध्यक्ष योगेश नरेटी ने बताया कि छह महीने से हम आंदोलनरत हैं। एक साल से पेसा कानून में संशोधन की बात कह रहे है। हमारी सरकार नहीं मान रही है। हमारे विधायक ने आज तक विधानसभा सत्र में नही बोला है। इसके चलते चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। इसी के तहत हम आज विधायक को जगाने के लिए विधायक निवास तक आए हैं। वह गहरी नींद में सो रहे हैं, इसलिए बाजे-गाजे के साथ जगाने के लिए आए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि, आज ढोल-नगाड़े बाजा बाजा कर विधायक निवास के सामने प्रदर्शन किया गया है ताकि हमारे चुने जनप्रतिनिधि इसकी आवाज के साथ हमारी मांगों को भी सुनें। यह प्रदर्शन निरन्तर चलता रहेगा, जब तक विधानसभा चुनाव नहीं आ जाते हैं। कहा कि आदिवासी समाज सरकार से नाराज हैं, क्योंकि जो वादा उन्होंने किया था वो तोड़ा गया है। कोई काम नहीं किया गया है। आज हमारे विधायक सही काम करते तो आज हमें चुनावी मैदान में उतरने की जरूरत नहीं पड़ती। हम अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं करते।
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क्या है आदिवासी समाज की मांग
आदिवासी समाज 7 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। समाज ने कहा कि अगर हमारी मांग पूरी नही होती है तो हम सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करेंगे।
- छत्तीसगढ़ राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों के बस्तर संभाग एवं सरगुजा संभाग व कोरबा-पेंड्रा मरवाही जिला एवं अनुसूचित विकासखण्डों में संभाग / जिला कैडर के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थानीय मूल निवासियों को भर्ती की जाए।
- पेसा कानून में संशोधन
- छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 165 (6) (दो) के बाद दिए गए स्पष्टीकरण को विलोपित करते हुए पांचवी अनुसूची क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन को गैर आदिवासियों द्वारा पट्टा पर लिए जाने की छुट को समाप्त किया जाए।