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Bhoramdev Sanctuary Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, नहीं बनेगा टाइगर रिजर्व; सरकार के हक में फैसला

Wed, 30 Aug 2023 06:46 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम
अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 30 Aug 2023 06:46 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ में भोरमदेव अभयारण्य मामले की जनहित याचिका को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। राज्य सरकार के हक में फैसला सुनाते हुए कहा कि अब यहां टाइगर रिजर्व नहीं बनेगा। 

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PIL challenging the decision of the State Wildlife Board dismissed in Chhattisgarh High Court
भोरमदेव अभयारण्य - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिला अंतर्गत भोरमदेव वन्य जीव अभ्यारण्य को टाइगर रिजर्व घोषित नहीं करने के राज्य वन्य जीव बोर्ड के निर्णय को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। स्थानीय कवर्धा विधायक और प्रदेश के वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में भी अपना पक्ष मजबूती से रखेगी। 

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छत्तीसगढ़ की तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा राज्य वन्य जीव बोर्ड की 9वीं बैंठक 23 मई 2017 को कबीरधाम के भोरमदेव वन्य जीव अभ्यारण्य को टाइगर रिजर्व घोषित करने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद 14 नवंबर 2017 को हुई राज्य वन्य जीव बोर्ड की 10वीं बैठक में यह अनुशंसा की गई कि भोरमदेव अभ्यारण्य को टाइगर रिजर्व घोषित किया जाए।
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टाइगर रिजर्व की घोषणा करने से 39 गांवों को विस्थापित करना पड़ता। इन निवासियों में बैगा जनजाति के लोग बड़ी संख्या में हैं। उनके विस्थापन से उनके प्राचीन संस्कृति, वनों के साथ उनके संबंधों आदि से विस्थापित होना पड़ेगा। कांग्रेस पार्टी ने उस समय भोरमदेव अभ्यारण को टाइगर रिजर्व घोषित करने के तत्कालीन भाजपा सरकार के निर्णय के विरोध में मोहम्मद अकबर के नेतृत्व में आंदोलन चलाया। 
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जिसके बाद में परिस्थितियां बदल गई। राज्य में कांग्रेस की सरकार बन गई। इतना ही नहीं बल्कि मोहम्मद अकबर राज्य के वन मंत्री बन गए। उनके प्रयास से राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक दिनांक 24 नवंबर 2019 में भोरमदेव अभ्यारण्य को टाइगर रिजर्व घोषित नहीं करने का निर्णय लिया गया।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में एक जनहित याचिका क्रमांक WPPIL 17/2019 के माध्यम से नितिन सिंघवी द्वारा चुनौती दी गई थी। इस प्रकरण में सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए न्यायालय को यह बताया गया कि उक्त टाइगर रिजर्व घोषित करने से भोरमदेव अभ्यारण्य में निवासरत आदिवासियों के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सरकार द्वारा दी गई दलीलों से संतुष्ट होकर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका को खारिज कर दी गई।


वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा है कि राज्य सरकार आदिवासियों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने प्रस्तावित भोरमदेव अभ्यारण क्षेत्र के आदिवासियों और बैगा जनजाति के लोगों को भरोसा दिलाया है कि वे कतई चिंता न करें। इस क्षेत्र के विधायक होने के नाते वे हर स्थिति में उनके हितों की रक्षा करेंगे।

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