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CG News: छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन को रफ्तार, 8555 पेयजल योजनाएं ग्राम पंचायतों को सौंपी गईं

Sun, 24 May 2026 02:00 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Sun, 24 May 2026 02:00 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर काम तेज कर दिया है। प्रदेश में अब तक 8555 एकल ग्राम नल जल योजनाओं का संचालन और संधारण ग्राम पंचायतों को सौंपा जा चुका है।

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Jal Jeevan Mission gains momentum in Chhattisgarh, 8555 drinking water schemes handed over to gram panchayats
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यों की समीक्षा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर काम तेज कर दिया है। प्रदेश में अब तक 8555 एकल ग्राम नल जल योजनाओं का संचालन और संधारण ग्राम पंचायतों को सौंपा जा चुका है। वहीं आगामी दो वर्षों में हजारों नई योजनाएं पूरी करने का लक्ष्य तय किया गया है।
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लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अधिकारियों को जल जीवन मिशन के कार्य तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेयजल योजनाओं में लापरवाही और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा प्रत्येक योजना की जवाबदेही तय होगी।
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बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026-27 में 13,183 योजनाएं और 2027-28 में 7352 योजनाएं पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही समूह जल प्रदाय योजनाओं को भी चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। प्रदेश के 7060 गांवों को ‘हर घर जल’ श्रेणी में शामिल किया गया है, जिनमें से 6018 गांवों का सत्यापन भी हो चुका है।
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सरकार ने ग्रीष्मकाल में पेयजल संकट से निपटने के लिए विशेष तैयारी की है। ग्रामीण क्षेत्रों में खराब पड़े 19,807 हैंडपंपों की मरम्मत की गई है। वहीं जलस्तर नीचे जाने से प्रभावित इलाकों में राइजर पाइप बढ़ाने और नए ट्यूबवेल खोदने का काम भी किया जा रहा है।

समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिन गांवों में जल जीवन मिशन के कार्य पूरे हो चुके हैं, वहां हर घर जल योजना का सत्यापन कर संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दी जाए। साथ ही जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए पाइपलाइन की नियमित जांच और जल गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित करने को कहा गया।

बैठक में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि भविष्य में जल संकट से बचने के लिए जल स्रोतों का संरक्षण बेहद जरूरी है।


विभाग के अनुसार प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में वर्तमान में हैंडपंप, सौर ऊर्जा संचालित पंप और नल जल योजनाओं के जरिए पेयजल आपूर्ति की जा रही है। नक्सल प्रभावित और दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में भी सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए मिशन के कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
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