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Bilaspur: कटघोरा लव जिहाद मामले में हाईकोर्ट ने कोलकाता की शादी को अमान्य किया, नई शादी की सलाह

Thu, 12 Jun 2025 02:30 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: श्याम जी. Updated Thu, 12 Jun 2025 02:30 PM IST
सार

बिलासपुर हाईकोर्ट ने कटघोरा के कथित लव जिहाद मामले में कोलकाता की शादी को अवैध ठहराते हुए दोनों पक्षों को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत नई शादी पर विचार करने को कहा। युवती को प्रक्रिया पूरी होने तक नारी शक्ति केंद्र में रखने और याचिकाकर्ता की एक लाख रुपये की सुरक्षा निधि वापस करने का आदेश दिया।

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High Court annulled Kolkata marriage In Katghora love jihad case
बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कटघोरा इलाके में हुए कथित लव जिहाद मामले में युवक ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने मध्यस्थता सेंटर की रिपोर्ट आने पर अपने आदेश में कहा कि दोनों पक्ष चाहें तो नये सिरे से विवाह पर विचार कर सकते हैं। कोर्ट ने कोलकाता में हुई शादी को अमान्य करते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका निराकृत कर दी।

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याचिकाकर्ता से जमा कराए गए एक लाख रुपए भी वापस कर दिए, जो सुरक्षा निधि के रूप में कोर्ट ने लिए थे। बीते सुनवाई में हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता सेंटर जाने का निर्देश दिया था। इस सेंटर की रिपोर्ट आने के बाद फिर से सुनवाई हुई। मध्यस्थता सेंटर में दोनों पक्षों की बात को ध्यान से सुनकर कोर्ट ने कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट के अंतर्गत विवाह का आवेदन मैरिज रजिस्ट्रार को दिया जा सकता है। इसके बाद ही यह शादी विधिवत होगी। यह रिपोर्ट प्रस्तुत होने पर कोर्ट ने युवती के कथन पर कहा कि, जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती तब तक उसे नारी शक्ति केंद्र में ही रखा जाएगा।
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बहस के दौरान कोर्ट ने कहा कि, कोलकाता में हुई शादी का प्रमाणपत्र अवैधानिक है , इसलिए खारिज किया जाता है।यह बात भी सामने आई कि, परिजन बिना विवाह या उचित कानूनी प्रक्रिया के युवती को युवक के घर नहीं भेजेंगे। युवती के परिजनों की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने डीबी से आग्रह किया कि, ऐसा अधिकार नहीं दिया जाए कि, कोई एक पक्ष अदालत के आदेश को आधार बनाकर अवमानना याचिका दायर कर सके। कोर्ट ने भी माना कि, मध्यस्थता केंद्र का आदेश पक्षकारों पर बंधनकारी नहीं होगा।

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