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सुकमा में स्वास्थ्य सेवाओं की खुली पोल: एंबुलेंस न मिलने पर मरीज को दो किलोमीटर खाट पर ढोया, व्यवस्था पर सवाल
Fri, 09 Jan 2026 01:18 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, सुकमा
अमर उजाला नेटवर्क, सुकमा
Published by: Digvijay Singh
Updated Fri, 09 Jan 2026 01:18 PM IST
सार
सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद, सुदूर आदिवासी इलाकों में जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है।
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मरीज को ढोते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद, सुदूर आदिवासी इलाकों में जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। 21वीं सदी में भी, कागजों पर हाईटेक व्यवस्था के बावजूद, कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं आज भी खाट और कंधों के सहारे ही संचालित हो रही हैं।
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आपात स्थिति में एंबुलेंस की अनुपलब्धता
यह ताजा मामला कोंटा विकासखंड के कर्रेपारा ग्राम का है। यहां के निवासी कुंजाम हुर्रा द्वारा जहरीले पदार्थ का सेवन करने के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई। परिजनों और ग्रामीणों ने तत्काल एंबुलेंस सेवा की उम्मीद की, लेकिन समय पर कोई मदद नहीं मिल सकी। उप-स्वास्थ्य केंद्र की मौजूदगी के बावजूद, आपात स्थिति में एंबुलेंस का न पहुंचना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी खामी को उजागर करता है।
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दो किलोमीटर तक खाट पर सफर
मजबूरी में, कर्रेपारा गांव तक सड़क सुविधा न होने के कारण, ग्रामीणों ने कुंजाम हुर्रा को लगभग दो किलोमीटर तक खाट पर उठाकर कोंडासावंली तक पहुंचाया। इस दौरान ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरते हुए मरीज की हालत और बिगड़ने का खतरा बना रहा। यह दर्दनाक दृश्य उस सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाता है जो स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के बड़े-बड़े दावे करती है।
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जिला अस्पताल में इलाज जारी
किसी तरह मरीज को कोंडासावंली पहुंचाकर, जगरगुंडा के माध्यम से एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। इसके बाद कुंजाम हुर्रा को सुकमा जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज मिलना अत्यंत महत्वपूर्ण था, अन्यथा जान का खतरा हो सकता था। यह घटना दर्शाती है कि सुकमा जैसे दूरस्थ इलाकों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन सेवाएं कितनी कमजोर हैं, और सड़क, एंबुलेंस व त्वरित चिकित्सा सहायता की कमी किस प्रकार ग्रामीणों को जान जोखिम में डालने पर मजबूर कर रही है।