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Raipur News: फर्जी मेडिकल डिग्री रैकेट का पर्दाफाश, 2.34 करोड़ की ठगी, दिल्ली से महिला आरोपी गिरफ्तार
Thu, 26 Mar 2026 12:27 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 26 Mar 2026 12:27 PM IST
सार
देश में फर्जी डिग्री और नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे बड़े ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। रायपुर पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह लोगों को मेडिकल डिग्री और सरकारी नौकरी का झांसा देकर करोड़ों रुपये वसूल रहा था।
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पुलिस के गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश में फर्जी डिग्री और नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे बड़े ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। रायपुर पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह लोगों को मेडिकल डिग्री और सरकारी नौकरी का झांसा देकर करोड़ों रुपये वसूल रहा था। इस मामले में पुलिस ने मुख्य कड़ी के रूप में साक्षी सिंह (28) को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली है और लंबे समय से गिरोह के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने का काम कर रही थी।
पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित ने 17 फरवरी 2026 को शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि कुछ लोगों ने पोस्ट ऑफिस में नौकरी और मेडिकल डिग्री दिलाने का लालच देकर उससे और उसके परिजनों से कुल 2.34 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। पैसे लेने के बाद न नौकरी मिली और न ही कोई वैध प्रमाणपत्र दिया गया।
यूनिवर्सिटी के नाम पर तैयार होती थीं नकली डिग्रियां
जांच के दौरान पुलिस ने पहले गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ा, जिनसे पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ। इसके आधार पर साक्षी सिंह तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह डीवाई पाटिल विद्यापीठ के नाम पर फर्जी एमबीबीएस और बीएएमएस डिग्रियां तैयार करती थी।
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इन नकली डिग्रियों का उपयोग गिरोह भोले-भाले लोगों को विश्वास में लेने और उनसे बड़ी रकम वसूलने के लिए करता था। दस्तावेज इतने पेशेवर तरीके से बनाए जाते थे कि पहली नजर में असली लगते थे। पुलिस ने आरोपी के पास से तीन मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इनमें मौजूद डेटा से इस अंतरराज्यीय गिरोह के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है। जांच एजेंसियां अब लेन-देन, संपर्क और अन्य सहयोगियों की जानकारी खंगाल रही हैं।
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पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित ने 17 फरवरी 2026 को शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि कुछ लोगों ने पोस्ट ऑफिस में नौकरी और मेडिकल डिग्री दिलाने का लालच देकर उससे और उसके परिजनों से कुल 2.34 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। पैसे लेने के बाद न नौकरी मिली और न ही कोई वैध प्रमाणपत्र दिया गया।
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यूनिवर्सिटी के नाम पर तैयार होती थीं नकली डिग्रियां
जांच के दौरान पुलिस ने पहले गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ा, जिनसे पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ। इसके आधार पर साक्षी सिंह तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह डीवाई पाटिल विद्यापीठ के नाम पर फर्जी एमबीबीएस और बीएएमएस डिग्रियां तैयार करती थी।
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इन नकली डिग्रियों का उपयोग गिरोह भोले-भाले लोगों को विश्वास में लेने और उनसे बड़ी रकम वसूलने के लिए करता था। दस्तावेज इतने पेशेवर तरीके से बनाए जाते थे कि पहली नजर में असली लगते थे। पुलिस ने आरोपी के पास से तीन मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इनमें मौजूद डेटा से इस अंतरराज्यीय गिरोह के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है। जांच एजेंसियां अब लेन-देन, संपर्क और अन्य सहयोगियों की जानकारी खंगाल रही हैं।