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Chhattisgarh: मानसून में देरी से घबराएं नहीं, समय पर करें धान की बोआई-रोपाई- कृषि वैज्ञानिक
Sat, 04 Jul 2026 09:30 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 04 Jul 2026 09:30 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ में इस वर्ष मानसून सामान्य से कुछ देर से पहुंचा है, लेकिन किसानों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के वैज्ञानिकों ने कहा है कि अभी भी धान की खेती के लिए पर्याप्त समय है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में इस वर्ष मानसून सामान्य से कुछ देर से पहुंचा है, लेकिन किसानों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के वैज्ञानिकों ने कहा है कि अभी भी धान की खेती के लिए पर्याप्त समय है। मौसम को देखते हुए किसानों को कुछ जरूरी कृषि सलाह जारी की गई है।
वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून लगभग 10 दिन देर से आया। जून माह में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई, लेकिन अब प्रदेश के सभी हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार 8 जुलाई तक राज्य में अच्छी वर्षा होने की संभावना है।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि किसान 15 जुलाई तक धान की सीधी बुआई तथा 30 जुलाई तक रोपाई और बियासी का कार्य कर सकते हैं। यदि किसी कारणवश थोड़ा विलंब भी हो जाए और हरेली (12 अगस्त) तक बोआई-रोपाई करनी पड़े, तब भी फसल पर अधिक असर नहीं पड़ेगा।
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मानसून में देरी को देखते हुए किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों, जैसे इन्द्रावती, बस्तर धान-1, छत्तीसगढ़ बारानी धान, इंदिरा एरोबिक धान, एमटीयू-1010, एमटीयू-1153, एमटीयू-1156, एमटीयू-1001, छत्तीसगढ़ धान-1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान और महामाया का उपयोग करने की सलाह दी गई है। किसानों से कहा गया है कि बुआई से पहले बीज का फफूंदनाशक दवा से उपचार अवश्य करें और जैव उर्वरकों का भी उपयोग करें। इससे फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन बढ़ता है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि धान की सीधी बुआई में खरपतवार (खरपतवार/घास) बड़ी समस्या होती है। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में भारी कमी आ सकती है। इसलिए बुआई के बाद पहले 40 दिनों तक खेत को खरपतवार मुक्त रखना जरूरी है। इसके लिए हाथ से निंदाई, पैडी वीडर या कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित खरपतवारनाशकों का उपयोग किया जा सकता है।
उर्वरक प्रबंधन को लेकर किसानों को सलाह दी गई है कि प्रति एकड़ अधिकतम दो बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी का ही उपयोग करें। डीएपी की पूरी मात्रा बुआई या रोपाई के समय दें, जबकि यूरिया की पहली खुराक 30 से 35 दिन बाद और दूसरी खुराक 60 से 70 दिन बाद दें। साथ ही हरी खाद और जैव उर्वरकों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि राज्य की प्राथमिक कृषि साख समितियों में किसानों के लिए यूरिया, डीएपी, एनपीके, सिंगल सुपर फॉस्फेट और पोटाश का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। किसानों को आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान सेवाओं के संचालक डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी ने किसानों से अपील की है कि खेती से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी या समस्या के समाधान के लिए अपने निकटतम कृषि विज्ञान केन्द्र, कृषि अनुसंधान केन्द्र, कृषि महाविद्यालय अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें। विश्वविद्यालय द्वारा समय-समय पर किसानों के लिए आवश्यक तकनीकी सलाह जारी की जा रही है।
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वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून लगभग 10 दिन देर से आया। जून माह में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई, लेकिन अब प्रदेश के सभी हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार 8 जुलाई तक राज्य में अच्छी वर्षा होने की संभावना है।
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कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि किसान 15 जुलाई तक धान की सीधी बुआई तथा 30 जुलाई तक रोपाई और बियासी का कार्य कर सकते हैं। यदि किसी कारणवश थोड़ा विलंब भी हो जाए और हरेली (12 अगस्त) तक बोआई-रोपाई करनी पड़े, तब भी फसल पर अधिक असर नहीं पड़ेगा।
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मानसून में देरी को देखते हुए किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों, जैसे इन्द्रावती, बस्तर धान-1, छत्तीसगढ़ बारानी धान, इंदिरा एरोबिक धान, एमटीयू-1010, एमटीयू-1153, एमटीयू-1156, एमटीयू-1001, छत्तीसगढ़ धान-1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान और महामाया का उपयोग करने की सलाह दी गई है। किसानों से कहा गया है कि बुआई से पहले बीज का फफूंदनाशक दवा से उपचार अवश्य करें और जैव उर्वरकों का भी उपयोग करें। इससे फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन बढ़ता है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि धान की सीधी बुआई में खरपतवार (खरपतवार/घास) बड़ी समस्या होती है। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में भारी कमी आ सकती है। इसलिए बुआई के बाद पहले 40 दिनों तक खेत को खरपतवार मुक्त रखना जरूरी है। इसके लिए हाथ से निंदाई, पैडी वीडर या कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित खरपतवारनाशकों का उपयोग किया जा सकता है।
उर्वरक प्रबंधन को लेकर किसानों को सलाह दी गई है कि प्रति एकड़ अधिकतम दो बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी का ही उपयोग करें। डीएपी की पूरी मात्रा बुआई या रोपाई के समय दें, जबकि यूरिया की पहली खुराक 30 से 35 दिन बाद और दूसरी खुराक 60 से 70 दिन बाद दें। साथ ही हरी खाद और जैव उर्वरकों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि राज्य की प्राथमिक कृषि साख समितियों में किसानों के लिए यूरिया, डीएपी, एनपीके, सिंगल सुपर फॉस्फेट और पोटाश का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। किसानों को आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान सेवाओं के संचालक डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी ने किसानों से अपील की है कि खेती से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी या समस्या के समाधान के लिए अपने निकटतम कृषि विज्ञान केन्द्र, कृषि अनुसंधान केन्द्र, कृषि महाविद्यालय अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें। विश्वविद्यालय द्वारा समय-समय पर किसानों के लिए आवश्यक तकनीकी सलाह जारी की जा रही है।