{"_id":"667d78750789cb53c504c770","slug":"digital-crop-survey-started-for-first-time-in-chhattisgarh-2024-06-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"डिजिटल क्रॉप सर्वे: भू-सर्वे कार्य होगा आसान, जमीनी मामलों का होगा निराकरण; पटवारियों को दिया गया प्रशिक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डिजिटल क्रॉप सर्वे: भू-सर्वे कार्य होगा आसान, जमीनी मामलों का होगा निराकरण; पटवारियों को दिया गया प्रशिक्षण
Thu, 27 Jun 2024 08:04 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम
अमर उजाला नेटवर्क, कबीरधाम
Published by: श्याम जी.
Updated Thu, 27 Jun 2024 08:04 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ में पहली बार डिजिटल क्रॉप सर्वे शुरू होने वाला है। जियो रेफरेंसिंग के माध्यम से अब छोटी से छोटी भूमि का वास्तविक चिन्हांकन करना आसान होगा। साथ ही अब फसलों का एग्री स्टैक एप के माध्यम से क्रॉप सर्वे किया जाएगा।
विज्ञापन
डिजिटल क्रॉप सर्वे
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रदेश में पहली बार डिजिटल क्रॉप सर्वे शुरू होने वाला है। इस पायलट प्रोजेक्ट में प्रदेश के कबीरधाम, महासमुंद व धमतरी जिले को शामिल किया गया है। कबीरधाम जिले में शासन के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर पटवारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भूमि संबंधी विवाद को दूर करने के लिए नई तकनीकी जियो रेफरेंसिंग का इस्तेमाल करने जा रही है।
विज्ञापन
जियो रेफरेंसिंग के माध्यम से अब छोटी से छोटी भूमि का वास्तविक चिन्हांकन करना आसान होगा। साथ ही अब फसलों का एग्री स्टैक एप के माध्यम से क्रॉप सर्वे किया जाएगा। कबीरधाम जिले के पिपरिया तहसील के ग्राम अगरीकला में प्रशिक्षण आयोजित किया गया। दिल्ली से आए अधिकारियों द्वारा जिले के राजस्व अमला को एग्रीस्टैक एप के माध्यम से डिजिटल क्रॉप सर्वे का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया।
विज्ञापन
मौके पर बताया गया कि जियो रेफरेंसिंग तकनीक के माध्यम से इस वर्ष से डिजिटल क्रॉप सर्वे किया जाना है। सर्वे की जानकारी एग्री स्टैक पोर्टल में ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। एग्री स्टैक पोर्टल में किसानों का पंजीयन सर्वेयर के द्वारा स्वतः करेंगे। पंजीयन होने के बाद पंजीकृत किसानों को एक फार्मर आईडी दी जाएगी। इस पोर्टल में किसानों द्वारा लगाई गई फसल के साथ-साथ उन्हें आवश्यक खाद और पानी की मात्रा की जानकारी मिलेगी।
विज्ञापन
इसके तहत अब प्रत्येक खसरे, भू-खंड में जाकर फसलों के फोटोग्राफ्स लिए जाएंगे, जो कि जियो टैग होंगे। फसलों के वास्तविक खसरावार, ग्रामवार आंकड़े प्राप्त होंगे, जिसका उपयोग एग्रीस्टैक पोर्टल में किसानवार आंकड़ो के संग्रहण के लिए किया जाएगा।
भू-सर्वे कार्य आसान व त्रुटि रहित हो पाएगा। बंदोबस्त त्रुटि सुधार प्रकरणों का त्वरित निराकरण, सीमांकन कार्य में आसानी, भूमि संबंधी विवाद का सही-सही निराकरण, किसी भी शासकीय परियोजना, भू-अर्जन प्रकरण को तैयार करना सरल होगा। वर्तमान में उपलब्ध पटवारी नक्शा व स्थल पर भिन्नता का आंकलन व निराकरण किया जा सकेगा। सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा संबंधी न्यायालयीन प्रकरणों में कमी आएगी।