फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   cut of trees for Parsa coal mining project in Chhattisgarh starts villagers protest

छत्तीसगढ़: परसा कोयला खनन परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई शुरू, मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने किया विरोध

Wed, 27 Apr 2022 02:43 AM IST
Jeet Kumar पीटीआई, अंबिकापुर
पीटीआई, अंबिकापुर Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 27 Apr 2022 02:43 AM IST
सार

परसा कोयला खदान परियोजना के लिए इस क्षेत्र में लगभग 1,590 पेड़ काटे जाने हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों से निर्देश मिलने के बाद इस दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विज्ञापन
cut of trees for Parsa coal mining project in Chhattisgarh starts villagers protest
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pexel

विस्तार

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में परसा कोयला खदान के लिए अंतिम मंजूरी देने के बाद वन विभाग ने मंगलवार को क्षेत्र में पेड़ों की कटाई शुरू कर दी, लेकिन इसके विरोध में ग्रामीण खड़े हो गए। बड़ी संख्या में  मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने अधिकारियों को कार्रवाई रोकने की कोशिश की।

विज्ञापन


परसा कोयला खदान परियोजना के लिए रामानुजनगर वन क्षेत्र के जनार्दनपुर गांव में 300 पेड़ काटे गए। एक स्थानीय वन अधिकारी ने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों की आपत्ति के बाद काम रोक दिया गया हैं हालांकि स्थिति को देखते हुए आगे कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन


राज्य सरकार ने छह अप्रैल को राज्य के उत्तरी भाग में सरगुजा और सूरजपुर जिलों में फैली परसा कोयला खदान के लिए 841.538 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग के लिए अंतिम स्वीकृति दी थी। खदान का आवंटन राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) को किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


परसा कोयला खदान परियोजना के लिए इस क्षेत्र में लगभग 1,590 पेड़ काटे जाने हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों से निर्देश मिलने के बाद इस दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पास के साल्ही गांव के निवासी रामलाल करियाम ने बताया कि वनों की कटाई की सूचना मिलने के बाद परियोजना से प्रभावित होने वाले साल्ही, फतेहपुर और हरिहरपुर गांव निवासी वहां पहुंच गए और इसका विरोध किया। करियाम ने बताया कि वनों की कटाई के दौरान 50 से अधिक पुलिसकर्मियों को वहां तैनात किया गया था।

उन्होंने कहा कि हम लंबे समय से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। हमने ग्राम सभा के फर्जी दस्तावेजों की जांच की भी मांग की है, जिसके आधार पर खनन को मंजूरी दी गई है।'


वहीं छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला ने वन विभाग के इस कदम को दुखद कहा है और आरोप लगाया है कि इससे उद्योग घरानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed